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हरियाली तीज 2022 किस दिन है? जानिए तारीख और मुहूर्त?

Created by Asttrolok in Astrology 30 Aug 2023
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हरियाली तीज 2022 किस दिन है? जानिए तारीख और मुहूर्त?

हरियाली तीज सावन मास के शुक्‍ल पक्ष के दो दिन बाद अर्थात तीसरे दिन पूरे मन और श्रधा से मनाई जाती है। ये त्यौहार महिलाओं द्वारा पूरे जोश और मन से मनाया जाता है। इस दिन सभी महिलाओं की सुन्दरता देखते ही बनती है। इस दिन उनके चेहरे पर अलग ही तेज होता है। ये त्यौहार सावन के मौसम में आता है और चारो तरफ हरियाली ही हरियाली होती है और पूरा वातावरण मिट्टी की मंद खुशबु से सुगन्धित हो जाता है। इस दिन महिलाएं झुला झूलकर ख़ुशी मनाती हैं।

सम्पूर्ण भारतवर्ष में हिन्दू महिलाएं इसे मनाती हैं। कई शहरों में इस दिन मेले लगते हैं और सांस्कृतिक जुलूस निकलते हैं। इस दिन माँ पार्वती का आशीष पाने के लिए महिलाएं व्रत रखती है। हर शादी शुदा महिला के लिए हरियाली तीज त्यौहार का महत्व होता है। ये पर्व महिलाओं की सुन्दरता, आकर्षण, प्रेम और फर्टिलिटी को दिखाता है। ये त्यौहार भोलेनाथ और माँ पार्वती से जुड़ा है।

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हरियाली तीज कौन सी तारीख को है?


इस साल हरियाली तीज 31 अगस्‍त को है। इस दिन छुट्टी का दिन है अर्थात ये पर्व रविवार को आने वाला है।


हरियाली तीज पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?


हरियाली तीज का मुहूर्त 31 जुलाई प्रात: 2।29 मिनट से लेकर 1 अगस्‍त प्रात 4। 18 मिनट तक है।


हरियाली तीज त्यौहार का ज्‍योतिष शास्त्र अनुसार महत्‍व


हमारे ग्रंथो और शास्त्रों अनुसार हरियाली तीज का त्यौहार खुशियों की शुरवात और अच्छी सेहत के लिए मनाया जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति परमेश्वर की सेहत और धन धान्य के लिए व्रत और प्रार्थना करती हैं। इस दिन कुवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं ताकि उन्हें माँ पार्वती और भोलेनाथ का आशीर्वाद मिले और उनका पति भी उनसे उतना ही प्रेम करे जितना माँ पार्वती को उनके पति अर्थात शिवजी करते है।अपने पति परमेश्वर की लम्बी उम्र की कामना करते हुए निर्जला अर्थात भोजन के साथ साथ बिना पानी पिए व्रत करती हैं। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन का बहुत महत्व है क्योकि इसी नक्षत्र में माँ पार्वती और शिवजी का विवाह हुआ था और सम्पूर्ण संसार में हर चीज संतुलित और व्यवस्थित हुई थी।

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हरियाली तीज के रीति रिवाज

  • इस त्यौहार को नवविवाहित महिलाएं अपने मायके जाकर मनाती हैं।
  • हरियाली तीज से पहले ससुराल से सिंजारा आता है जिसमें उनके लिए बहुत सारे उपाहार होते हैं जैसे ज्वेलरी, कपड़े, मिठाई और मेकअप का सामान आदि।
  • महिलाएं इस दिन अपने सुन्दर हाथो पर आकर्षक मेहँदी लगाती हैं और अपने कोमल पैरो और आलता लगाती हैं। ऐसा इसलिए क्योकि मेहँदी और आलता दोनों ही पवित्र शादी के बंधन के प्रतीक हैं।
  • महिलाएं इस दिन अपनी सासु माँ के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं और अपनी माँ समान सास को कोई उपहार देती हैं। जिनकी सास नही होती हैं या दूर हैं वो अपनी नन्द को उपहार देकर रस्म पूरी करती हैं।
  • इस महिला शादी के समान ही पूर्ण श्रंगार करती हैं।
  • इस दिन महिलाएं प्रकृति का सौंदर्य निहारते हुए मिलकर ख़ुशी से झूलती हैं। इस दिन कई लोकगीत भी गाए जाते हैं।

हरियाली तीज की पूजन विधि 

  • प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, नित्य क्रिया के बाद स्नान करके हरे रंग के साफ़ कपडे पहने जाते हैं।
  • अब जहाँ आप पूजा करने वाले हैं उसे साफ़ करके चौकी लगाए। अब चौकी को गंगा जल से शुद्ध करे और उस पर लाल कपडा बिछा दे, ध्यान रहे कपडा साफ़ और शुद्ध होना चाहिए।
  • अब शिवजी, माँ पार्वती और गणेश जी की आर्गेनिक मिटटी से मूर्ति बनाना शुरू करे। धातु की मूर्ति न रखे।
  • मूर्ति बनाकर उसे चौकी पर श्रधा से स्थापित करे। 
  • अब मूर्तियों के आगे दिया जगाए।
  • सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करे और उन्हें अक्षत अर्थात चावल चढ़ाएं। अब कलावा ले और ताम्बे के कलश में बांधे और स्‍थापित करें।
  • अब कलश पर पान, सुपारी, हल्दी, कुमकुम और गंगाजल अर्पित करे। कलश पर आम की पत्तियां भी लगाई जा सकती हैं। अब इसके ऊपर नारियल रखे।
  • अब पूजा पूरी श्रधा से करने का संकल्प करे और गंगजल आपके द्वारा बनाई गई सभी मूर्तियों पर छिड़क दें।
  • अब शिवजी को चंदन,धतुरा और सफ़ेद फूल अर्पित करे। 
  • माँ पार्वती को सफ़ेद फूल चढ़ाएं।
  • अब सुहाग की सभी निशानियो जैसे कुमकुम, सिंदूर, काजल, मेहँदी, लाल चुनरी,चूडियां और आटा अर्पित करे।
  • अब नैवेद्य या प्रसाद अर्पित करे।
  • अब धूप दीप जगाकर हरियाली तीज कथा को श्रधा और पूरे मन से पढ़े या सुने।
  • कथा के बाद आरती करे।

इस तरह हरियाली तीज की पूजा संपन्न होती है।

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