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Astrology and You

Astrology is not merely acknowledged as prophecy anymore but an esoteric language of ancient science. Purely mathematical calculations of celestial positions and their influence on our world that can help us to expand our vision and senses to better connect with the supreme cosmic energies that dwell in this vast multi-verse.This profound education has been a part of Indian heritage since forever. It was being utilized in identifying directions in several phases of life great personalities, and is still been nurtured by many aficionados who are pursuing it as a profession and educating others about the same.

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We at Asttrolok, pledge to teach diligent aspirers about the depths of studying celestial positions and energies that once was a very popular academic part in many civilizations. Hence, in lead up to this, we stepped in the educational process with our own institute, where we can impart this incredible knowledge of self-discovery with our students who ultimately can help many others in rising above their problems and lead a life of contentment through effective techniques.

Asttrolok is been serving as a multi-purpose platform for budding astrologers, wherein its not just the education we impart with them but also provide them with a room for being a part of our expert clan. This will help them to give a kick-start to their career as an astrologer.

Daily Horoscope

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Taurus (Vrushabh)

आज के दिन दैनिक कार्यो के अलावा धार्मिक कार्यो के लिये भी समय निकालेंगे परोपकार की भावना दिखावे की रहेगी दान पुण्य मतलब के लिये ही करेंगे। व्यवहारिक जगत के लिये आज आप नकारा ही सिद्ध होंगे। अपना कार्य साधने के लिये मीठे बनेंगे परन्तु किसी और का कार्य करने में क्रोध आएगा। कार्य-व्यवसाय से आज लाभ की उम्मीद अधिक रहेगी धन लाभ होगा भी आशाजनक लेकिन असमय होने उत्साहित नही करेगा। नौकरी वाले लोग जदबाजी में कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे जिसके उजागर होने पर आलोचना होगी। पारिवारिक वातावरण गरिमामय रहेगा लेकिन परिजनों मन ही मन कुछ ना कुछ उधेड़ बुन में रहेंगे। घरेलू कार्यो की टालमटोल से बचे कलह हो सकती है। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी।

Gemini (Mithun)

आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही शारीरिक शिथिलता सभी कार्यो में बाधा डालेगी फिर भी जबरदस्ती करना बाद में महंगा पड़ेगा। शारीरिक रूप से आज कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा। घर अथवा व्यावसायिक कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे लेकिन फिर भी मनोरंजन की योजना बनायेगें। कार्य व्यवसाय से लाभ निश्चित होगा लेकिन किसी के सहयोग से ही। महिलाये भी आरोग्य में कमी रहने के कारण धीमी गति से कार्य करेंगी घर का वातावरण अस्त-व्यस्त रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन आशाजनक नही रहेगा फिर भी कर्म की तुलना में अधिक ही होगा। परिवार के सदस्य झुंझलाहट में बेवजह ही एक दूसरे से उलझेंगे। यात्रा टालें।

Cancer (Karka)

आज का दिन पिछले दिन की तुलना में बेहतर रहेगा लेकिन फिर भी आज दिमाग से सभी प्रकार के डर को दूर करके ही लाभ पाया जा सकता है। दिन के आरंभ से मानसिक रूप से हल्कापन अनुभव करेंगे मन मे विचित्र ख्याल चलते रहेंगे। व्यवसायी वर्ग आज जल्दी ही अपने कामो में जुट जाएंगे इसके विपरीत नौकरी वाले लोग पहले विलम्ब करेंगे बाद में कार्य खत्म करने की जल्दी रहेगी। काम-धंधा मध्यान बाद से गति पकड़ेगा आज कोई बड़ा निर्णय ना ही ले तो बेहतर रहेगा। बचकानी हरकतों से आस-पास का माहौल हास्यप्रद बनाएंगे परिवार में धन अथवा अन्य कारण चिता का विषय रहेंगे। संध्या बाद यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। सेहत में सुधार अनुभव होगा।

Leo (Sinh)

आज का दिन वृद्धिकारक रहेगा। जिस कार्य से कोई आशा नही रहेगी वहां से भी कुछ ना कुछ लाभ ही होगा। अकस्मात लघु यात्रा आने से दैनिक कार्यो में फेरबदल करना पड़ेगा। आलस्य से आज बचें एक बार किसी कार्य मे विलम्ब हुआ तो रात्रि तक यही क्रम जारी रहेगा। मध्यान बाद व्यस्तता बढ़ेगी व्यवसाय में अकस्मात उछाल आएगा लेकिन इसके अनुरूप आपकी तैयारी नही होने पर खासी मशक्कत करनी पडेगी फिर भी धन की आमद एक से अधिक मार्ग से होगी आर्थिक दृष्टिकोण से भविष्य के प्रति आज निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर मे किसी ना किसी से कलह होकर ही रहेगी। स्वास्थ्य मानसिक दुविधा के कारण सर दर्द अथवा अन्य छोटी मोटी परेशानी आ सकती है।

Virgo (Kanya)

आज आप स्वभाव से विवेक का परिचय देंगे इसके विपरीत घर का वातावरण बेवजह के झमेलों में डालेगा जिस कारण बाहर समय बिताना अच्छा लगेगा। दैनिक कार्य आज व्यवस्थित रहेंगे अधिक से अधिक धन कमाने की मानसिकता चैन से बैठने नही देगी। कार्य क्षेत्र पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहेंगे फिर भी इसका लाभ आशाजनक नही मिलेगा। आज आप अनैतिक कार्यो से स्वयं ही दूरी बनाकर रहेंगे फिर भी प्रलोभन से स्वयं को बचाना बड़ी चुनौती रहेगी। धन की आमद अन्य दिनों की अपेक्षा सुधरेगी लेकिन घर मे फरमाइशें की सूची भी लंबी रहने के कारण तुरंत निकल जायेगा। सामाजिक कार्यो के प्रति उदासीनता व्यवहारिक जगत से दूरी बढ़ाएगी। स्वयं अथवा परिजन के स्वास्थ्य के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।

Libra (Tula)

आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। घर एवं बाहर की परिस्थितियां पल पल पर क्रोध दिलाएंगी इसलिये आज आपको अधिक से अधिक मौन रहने की सलाह है। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मी अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से तालमेल बिगड़ेगा आपको उनका एवं उनको आपका व्यवहार उद्दंड लगेगा जिससे कलह बढ़ेगी। गलती करने पर मान लें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से भी दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा जिस लाभ के आप अधिकारी है उसे कोई अन्य ले जाएगा अथवा बहुत कम होने पर निराश होंगे। व्यवसायी वर्ग तगादा करते समय विनम्र रहें अन्यथा गरमा गर्मी में धन डूब सकता है। मन आज वर्जित और असंवैधानिक कार्यो में शीघ्र आकर्षित होगा। महिलाए घर का वातावरण जितना सुधारने का प्रयास करेंगी उतना अधिक बिगड़ेगा। सेहत में नई समस्या बनेगी।

Scorpio (Vrushchik)

आज का दिन सामाजिक एवं राजकीय कार्य के लिये अनुकूल है धन के साथ पद प्रतिष्ठा का भी लाभ मिलेगा। समाज के उच्चवर्गीय लोगो से जान पहचान होगी परन्तु इनसे तुरंत लाभ उठाने का प्रयास ना करें अन्यथा संबंधों में तुरंत खटास भी आ सकती है। सार्वजिक क्षेत्र पर आवश्यकता पड़ने पर ही बोले जल्दबाजी में कुछ अप्रिय बयानबाजी कर देंगे जिससे व्यक्तित्व में कमी आ सकती है। व्यवसायी वर्ग धन कमाने के चक्कर मे जल्दबाजी करेंगे परन्तु ध्यान रहे प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी आज धैर्य रखने का परिणाम बाद में अवश्य ही लाभ दिलाएगा। धन की आमद संतोषजनक रहेगी खर्च करने में पीछे नही हटेंगे। घर का वातावरण गलतफहमी के कारण कुछ समय के लिये अशान्त बनेगा। जोड़ो अथवा मासपेशी संबंधित समस्या बन सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।

Sagittarius (Dhanu)

आज के दिन परिस्थितियां विपरीत बनेगी पूर्व में बनाई योजना परिस्थिति वश अंत समय मे बदलनी पड़ेगी। जिस कार्य ने लाभ देख रहे थे वहां से लाभ तो होगा लेकिन आशा से बहुत कम। व्यवसायी वर्ग धन अथवा महंगी वस्तुओ संबंधित कार्य विचार कर ही करें हानि की संभावना आज अधिक है। धन के फंसने पर आगे के कार्य प्रभावित होंगे। नौकरी वाले जातक विषम परिस्थितियों में भी निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर के वातावरण में कुछ ना कुछ उथल-पुथल लगी रहेगी। धन की आमद प्रयास करने पर हो जाएगी लेकिन आवश्यकता की तुलना में कम रहेगी। महिला वर्ग भावुक कर खर्चा करवाएगी कर्ज बढ़ने के आसार है खर्च आज सोच समझ कर ही करे। सेहत में नया विकार आएगा।

Capricorn (Makar)

आज का दिन यादगार रहेगा। कई दिनों से मन में चल रही कामना की पूर्ति आज होने से अकस्मात खुशी मिलेगी। कार्य व्यवसाय में भी उन्नति के योग है जिस किसी कार्य को करेंगे उसमें स्वयं के बल पर ही सफलता पा लेंगे भागीदारी के कार्यो में बड़े निर्णय लेने से आज बचें अन्यथा तालमेल की कमी के कारण आपस मे फुट पड़ सकती है। महिलाए भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें वरना घर का सुरम्य वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण लंबे समय के लिये अशान्त बनेगा। धन की आमद सही समय पर होगी फिर भी आज संतोष की कमी रहने पर कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। व्यवहारिक संबंधों को छोड़ अन्य सभी कार्य में विजय मिलेगी। सेहत उत्तम रहेगी।

Aquarius (Kumbha)

आज का दिन धैर्य से बिताने में ही भलाई है। मेहनत करने पर तुरंत लाभ की आशा ना रखें आज किया परिश्रम का फल संध्या बाद से दिखने लगेगा लेकिन प्राप्ति में अड़चनें आएंगी आज की तुलना में कल दिन ज्यादा बेहतर रहेगा। आज केवल आश्वासनो से ही काम चलाना पड़ेगा। मध्यान तक का समय कार्य व्यवसाय के लिये उतार चढ़ाव वाला रहेगा इसके बाद परिस्थिति से समझौता कर लेंगे स्वभाव में संतोष बनेगा। धन अथवा अन्य किसी भी प्रकार के वादे ना करें पूरे नही कर पाएंगे उलटे आलोचना ही होगी। घर का कोई सदस्य जिद पर अड़ेगा जिससे कुछ समय के लिये शांति भंग होगी। महिलाए अपने कार्य छोड़ अन्य के कार्य मे मीन मेख निकालेंगी यह झगड़े का कारण बनेगा। बदन दर्द स्नायु तंत्र में दुर्बलता रहेगी।

Pisces (Meen)

आज का दिन कार्य सिद्धि वाला रहेगा जिस भी कार्य को करेंगे उसमे परिस्थितियां स्वतः ही अनुकूल बनने लगेंगी आवश्यकता के समय सहयोग भी आसानी से मिल जाएगा। अधिकांश कार्य सही दिशा और भाग्य का साथ मिलने से समय पर पूर्ण होंगे। कारोबारी लोग आज किया निवेश का लाभ निकट भविष्य में उठाएंगे फिर भी ज्यादा जोखिम ना लें। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त कार्य आने पर असहज अनुभव करेंगे सहयोग भी कम मिलेगा फिर भी अपने पराक्रम से थोडे विलम्ब से विजय पा लेंगे। धन की आमद दोपहर बाद निश्चित होगी अतिरिक्त खर्च भी होंगे। गृहस्थ का माहौल पल-पल में बदलने से तालमेल बैठाने में परेशानी होगी। परिजनों के लिये समय निकालें अन्यथा मतभेद हो सकते है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

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चंद्रग्रहण में क्या करे और क्या न करें

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                                                                 चंद्रग्रहण में क्या करे और क्या न करें

16-17 जुलाई की मध्य रात्रि को चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह उत्तराषाढ़ नक्षत्र धनु राशि मे होगा। गुरूपर्णिमा पर लगातार यह दूसरा साल है जिस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले 27 जुलाई 2018 को गुरुपूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्रग्रहण लगा था।
चंद्रग्रहण 16 जुलाई देर रात 1:31 से सुबह 4:31 बजे तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत मे आंशिक रूप से दिखाई देगा तथा साथ ही ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप एवं दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा।

गुरुपूर्णिमा पर विशेष पूजा पाठ ध्यान किया जाता है । लोग इस दिन गुरुओं की पूजा करते है। गुरु पूजा के कार्यक्रम सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। 16 जुलाई को सूतक  दोपहर 1:30 बजे से ही लग जायेगा। जिस कारण पूजा पाठ इस समय से पूर्व हो करना होगा।

*ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति*

शनि व केतु ग्रह चंद्र ग्रह के साथ ही ग्रहण के समय धनु राशि में रहेंगे। जिससे ग्रहण का प्रभाव ज्यादा पड़ेगा।
सूर्य के साथ राहु और शुक्र मिथुन राशि मे रहेंगे। इस दौरान मंगल ग्रह नीच का रहेगा। जिससे जातको पर यह योग तनाव बड़ा सकता है। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रहो शुक्र, शनि , राहु, केतु के घेरे में रहेंगे जिससे प्राकृतिक आपदा व भूकंप की आशंका रहेगी।

*ग्रहण के समय क्या करे*

ग्रहण काल मे पूजा पाठ करना चाहिए। तथा घर मे रखी हुईं कच्ची सब्जियों एवं फ़लों में कुशा या तुलसी के पत्ते डाल कर रखे।
चंद्र ग्रहण के पश्चात पूरे घर को गंगाजल से साफ करना चाहिए व स्वयं किसी नदी में या गंगाजल से स्नान करें। उसके पश्चात घर की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान करवा कर उनकी पूजा करें।
चंद्रग्रहण के पश्चात सफेद चीजो का दान करना चाहिए।
जिन्हें मंगल दोष हो वह ग्रहण के समय सुंदरकांड का पाठ करें।

*ग्रहण के समय क्या न करें*

ग्रहण के बाद पहले से बने हुए भोजन का इस्तेमाल  न करें।
किसी भी प्रकार का शुभ कार्य ग्रहण के समय न करें।
गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय घर से बाहर न निकले।

चंद्र ग्रहण के कारण मनुष्य के जीवन पर कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता है। इस बार 8 राशियों पर चंद्र ग्रहण का बुरा असर पड़ेगा । तथा मेष, मिथुन, सिंह व धनु राशि वालो के लिए यह ग्रहण अच्छा रहेगा।

*मेष राशि* के जातको पर सकारात्मक असर पड़ेगा। शत्रुओ का नाश होगा रुके हुए कार्य पूरे होंगे।

*वृषभ राशि* के जातको के अचानक खर्चे बढ़ेगे, यात्रा से लाभ होगा। स्वास्थ्य में परेशानी होगी।

*मिथुन राशि* पैतृक संपत्ति से लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

*कर्क राशि* नौकरी में स्थानांतरण की संभावना बनेगी। स्वास्थ्य में परेशानी होगी। कर्जदारों में बढ़ोतरी होगी।

*सिंह राशि* परिवार में खुशी माहौल होगा। नए कार्य मे निवेश से फायदा होगा। आय के अन्य मार्ग खुलेंगे।

*कन्या राशि* जीवन साथी के साथ संबंध अच्छे नही रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें, शत्रुओ से हानि होगी।

*तुला राशि* परिवार में कलह हो सकता है। प्रेम संबंधों में निराशा हाथ लगेगी। नए कार्य मे निवेश न करे।

*वृश्चिक राशि* बेवजह के खर्चो से बचे। नोकरी में तनाव की स्थिति बनेगी। वाहन ध्यानपूर्वक चलाये।

*धनु राशि* अचानक धन लाभ होगा। नोकरी मिलने की संभावना बनेगी। स्वास्थय अच्छा रहेगा। अध्यात्म की और मन लगेगा।

*मकर राशि* खर्चो में वृद्धि होगी। व्यापारिक नुकसान की सम्भावनाये बनेगी। विदेश यात्रा के योग बनेंगे।

*कुम्भ राशि* सेहत में गिरावट आएगी, ग्रहण का नकारात्मक असर पड़ेगा। धन हानि के योग बनेंगे।

*मीन राशि* प्रेम संबंधों में धोखा मिल सकता है, किसी से झगड़ा होने की संभावना है। जरूरी कार्यो में बाधा हो सकती है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
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*देवशयनी एकादशी 12 जुलाई से मांगलिक कार्यो पर लगेगा विराम*

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देवशयनी एकादशी 12 जुलाई शुक्रवार आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी के दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग में मनाई जाएगी।

एकादशी तिथि 11 जुलाई शाम 3:32 बजे से प्रारंभ होकर 12 जुलाई शाम 3: 01 बजे तक रहेगी। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ भी माना गया है.
देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा के नाम से भी जाना जाता है सभी उपवासों में देवशयनी एकादशी व्रत श्रेष्ठतम कहा गया है. इस व्रत को करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, तथा सभी पापों का नाश होता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करने का महत्व होता है क्योंकि इसी रात्रि से भगवान का शयन काल आरंभ हो जाता है जिसे चातुर्मास या चौमासा का प्रारंभ भी कहते है।

देवशयनी एकादशी के बाद सभी शुभ कार्यो पर जैसे यग्योपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षा, यज्ञ, ग्रह प्रवेश सभी पर विराम लग जायेगा। इस समय भगवान विष्णु चार माह के लिए राजा बलि के यहाँ पाताल लोक में विश्राम करते है।

वास्तव में यह वे दिन होते हैं जब चारों तरफ नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने लगता है और शुभ शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं ऐसे में जरूरी होता है कि देव पूजन द्वारा शुभ शक्तियों को जाग्रत रखा जाए। देवप्रबोधिनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को भगवान विष्णु देवता के उठने के साथ ही शुभ शक्तियां प्रभावी हो जाती हैं और नकारात्मक शक्तियां क्षीण होने लगती हैं।

*देवशयनी पर ऐसे करें पूजा*

देवशयनी एकादशी को सुबह जल्दी उठें। इसके बाद घर की साफ-सफाई और नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर में पवित्र जल से छिड़काव करें। घर के पूजा स्थल या किसी पवित्र स्थान पर भगवान श्री विष्णु जी की सोने, चांदी, तांबे या कांसे की मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद षोडशोपचार से उनकी पूजा करें।
भगवान विष्णु को पीतांबर आदि से विभूषित करें। फिर व्रत कथा सुने, इसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें। सफेद चादर से ढके हुए बिस्तर पर श्री विष्णु को शयन कराना चाहिए। इन चार महीनों के लिए अपनी रुचि या इच्छा के अनुसार दैनिक व्यवहार के पदार्थों का त्याग करें।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
9302325222


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गुप्त नवरात्रि तीन जुलाई से

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गुप्त नवरात्रि 3 जुलाई बुधवार से प्रारंभ होकर 10 जुलाई बुधवार तक रहेगी।
सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण अष्टमी व नवमी एक ही दिन की होगी।

जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र के दौरान साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि नवरात्र में देवी की साधाना अधिक कठिन होती है। इन नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। रात के समय की गई गुप्त पूजा गुप्त मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।
व्यक्ति के पास धन-धान्य, ऐश्वर्या, सुख-स्मृद्धि और शांति की कोई कमी नहीं रहती।

*नवरात्र में इन देवियों की पूजा की जाती है*
नवरात्र के पहले दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नौवें दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है|

 *गुप्त नवरात्र की पूजा विधि*

जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं।  यदि साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रतिकूल प्रभाव भी साधक पर पड़ सकते हैं इसलिए साधना अपने गुरु के निर्देशन में ही करें।

चोपड़ा जी ने बताया कि दशमी तिथि को भड़ली नवमी होने के कारण उस दिन अबूझ मुहूर्त रहेगा। इस मुहूर्त पर विवाह एवं शुभ कार्य किये जा सकते है।
 
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सायन पद्धति से 21 जून को सूर्य दक्षिणायन होगा, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्षा के योग

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                                                         *सायन पद्धति से 21 जून को सूर्य दक्षिणायन होगा*

सायन पद्धति के अनुसार सूर्य 21 जून को दक्षिणायन हो जाएगा जो 22 दिसम्बर तक रहेगा। जबकि निरयण पद्धति से यह समय 15 जुलाई से लेकर 14 जनवरी के बीच होता है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। इसे ही उत्तरायण व दक्षिणायन कहते है। जब सूर्य मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है तब इस समय को उत्तरायण कहते है। और जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तो इसे दक्षिणायन कहते है।

कर्क संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ने के बाद क्रमशः दक्षिण की और खिसकते हुए मकर संक्रांति के दिन मकर रेखा पर सीधी पड़ती है। सूर्य की सीधी किरणों के पड़ने के खिसकाव में छह माह लग जाते है। यह समय 21 जून से लेकर 22 दिसम्बर तक होता है। जबकि निरयण पद्धति में यह समय 15 जुलाई से 14 जनवरी के बीच होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायन का काल देवताओ की रात्रि है।
दक्षिणायन के समय रातें लंबी हो जाती है और दिन छोटे होने लगते है। दक्षिणायन में सूर्य दक्षिण की और झुकाव के साथ गति करता है। दक्षिणायन के दौरान वर्षा, शरद ऋतु, और हेमंत यह तीन ऋतुएं होती है। तथा आकाश बदलो से घिरा रहता है।

 दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते है। सूर्य दक्षिणायन होने से इस बार वर्षा अधिक होगी। वायु में आद्रता बनी रहेगी। उमस का वातावरण रहेगा।

                                                           *ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्षा के योग*

वर्षा ऋतु का प्रारंभ 21 जून से सूर्य के दक्षिणायन होते ही हो जाएगा जो 23 अगस्त तक रहेगा। उसके पश्चात शरद ऋतु का प्रारंभ होगा।
जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में आता है तो वर्षा प्रारम्भ होती है । यह नक्षत्र 22 जून को आएगा। वर्षा आने के आठ नक्षत्र माने गए है। आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र।
जब सूर्य इन नक्षत्र से भ्रमण करता है तो बारिश आती है।

इस वर्ष ज्योतिष के अनुसार संवत्सर के राजा शनि व मंत्री सूर्य देवता है और संवत्सर का नाम परिधावी है। इसलिए इस बार अच्छी वर्षा के योग बने हुए  है। और आंधी तूफान के भी योग है। 

वर्षा आने के दिन इस प्रकार रहेंगे, जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में 22/23 जून, पुनर्वसु नक्षत्र में 6/7 जुलाई को, पुष्य नक्षत्र 20/21 जुलाई को व अश्लेषा नक्षत्र 3,4 अगस्त को भारी वर्षा के योग बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
Mob. No. 9302325222
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*15 जून को सूर्य का मिथुन राशि मे प्रवेश*

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*15 जून को सूर्य का मिथुन राशि मे प्रवेश* 
*कई दुर्लभ योग व चतुर्ग्रही योग बनेगे*

15 जून शनिवार शाम 5:38 बजे सूर्य देव वृषभ राशि से अपनी मित्र राशि मिथुन मे प्रवेश करेंगे जिससे मिथुन राशि मे चतुर्ग्रही योग व कई दुर्लभ योग बनेगें। मिथुन राशि मे मंगल, राहु व बुध के पूर्व में होने से त्रिग्रही योग बना हुआ है। सूर्य के प्रवेश से चतुर्ग्रही योग बनेगा जो की 21 जून तक यह योग बना रहेगा। 

21जून सुबह 2:29 बजे बुध अपनी स्वराशि मिथुन छोड़कर चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश करेगा। इसके पश्चात मिथुन राशि मे त्रिग्रही योग बना रहेगा। जो 22 जून रात्रि 11: 21 बजे मंगल के कर्क राशि मे प्रवेश से समाप्त होगा।

    सूर्य के इस गोचर के साथ ही 15 जून  से कई दुर्लभ योग बनेगें।

*बुधादित्य योग*  सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के साथ ही मिथुन राशि में 'बुधादित्य योग' का निर्माण होगा। 'बुधादित्य योग' एक राजयोग है, जो जातक को जीवन में प्रचुर लाभ व समृद्धि प्रदान करता है।  सूर्य व बुध की युति को 'बुधादित्य' नामक राजयोग के नाम से जाना जाता है।
*गजकेसरी योग*  चंद्र वृश्चिक राशि में रहेंगे। चंद्र किसी भी राशि में मात्र सवा दो दिन तक ही स्थित रहते हैं। नवग्रहों में एकमात्र चंद्र ही ऐसे ग्रह हैं, जो सबसे कम दिन किसी राशि में रहते हैं। देवगुरु बृहस्पति पहले से ही वक्र गति होकर वृश्चिक राशि में विराजमान हैं। चंद्र की गोचरवश इस उपस्थिति से वृश्चिक राशि में  'गजकेसरी' नामक राजयोग का सृजन होगा। 'गजकेसरी' योग भी सुप्रसिद्ध राजयोग है, जो जातक को जीवन आशातीत सफलता एवं उन्नति प्रदान करता है।

*ग्रहण योग*  सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के साथ ही मिथुन राशि में 'ग्रहण योग' का भी निर्माण होने जा रहा है। मिथुन राशि में राहु पूर्व से ही स्थित हैं। सूर्य के गोचर से मिथुन राशि में सूर्य-राहु की युति का निर्माण होगा जिसे 'ग्रहण योग' के नाम से जाना जाता है। 'ग्रहण योग' एक अशुभ योग है, जो जातक को जीवन असफलता व संघर्ष देता है।
*अंगारक योग* राहु व मंगल की युति पूर्व से ही मिथुन राशि मे बनी हुई है। जिससे 'अंगारक' योग बना हुआ है। 'अंगारक योग' एक अत्यंत अशुभ व अनिष्टकारी योग है जिसके कारण जातक को अपने जीवन में संकटों व असफलताओं का सामना करना पड़ता है। मंगल के 22 जून को कर्क राशि मे प्रवेश से यह योग समाप्त हो जायेगा।

*किन किन राशियो पर पड़ेगा सर्वाधिक प्रभाव*

 इन दुर्लभ संयोगों से सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे किंतु सर्वाधिक प्रभावित मिथुन राशि वाले जातक होंगे, क्योंकि इनमें से अधिकतर योग मिथुन राशि में ही बन रहे हैं।
शुभ प्रभाव वाली राशियां- वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, मीन होंगी।
अशुभ प्रभाव वाली राशियां- मेष, मिथुन, सिंह, धनु, कुंभ 

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
9302325222
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*निर्जला एकादशी रवि योग में मनेगी*

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                                                               *निर्जला एकादशी रवि योग में मनेगी*


गुरुवार 13 जून जयेष्ठ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि चित्रा नक्षत्र रवियोग में मनेगी। एकादशी तिथि 12 जून शाम 6:26 बजे से प्रारंभ होकर 13 जून शाम 4:49 बजे तक रहेगी।

निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते है। ऋषि वेदव्यास जी के अनुसार इस एकादशी को भीमसेन ने धारण किया था, इसी वजह से इस एकादशी का नाम भीमसेनी एकादशी पड़ा। 

इस एकादशी को व्रत करने से वर्ष की 24 एकादशियो के व्रत के समान फल मिलता है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से बाकी इस वर्ष की सभी 23 एकादशियो का पुण्य लाभ मिलता है तथा व्यक्ति को दीर्घायु व मोक्ष की प्राप्ति होती है। निर्जला अर्थात जल को बिना ग्रहण कर व्रत करना कहा जाता है। यह एक कठिन व्रत है जिसमे जल का सेवन नही किया जाता।

       इस व्रत में सबसे पहले ब्रह्मा बेल में उठकर गंगा स्नान या किसी भी नदी में स्नान करना चाहिए। उसके पश्चात भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है, तथा व्रत कथा को सुना जाता है।
108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप किया जाता है। पूजा पाठ के पश्चात सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को दक्षिणा मिष्ठान देना चाहिए। इस दिन गौ दान करने का विशेष महत्व है। जिससे करोड़ो गायों को दान करने के समान फल मिलता है। इस दिन खाली मटका, हाथ का पंखा व खरबूजों का दान किया जाता है। जिससे पूरे वर्ष की 23 एकादशियो का पुण्य फल इसी एक निर्जला एकादशी के व्रत व दान से मिलता है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
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