प्रयागराज, जिसे संगम नगरी भी कहा जाता है, सदियों से भारत की आध्यात्मिक धरोहर का केंद्र रहा है। इसी पावन नगरी में स्थित है माता ललिता देवी शक्तिपीठ, जिसे माँ सिद्धेश्वरी देवी के रूप में भी पूजा जाता है। कहा जाता है कि यहाँ माता सती की अंगुली गिरी थी और तभी से यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ माँ ललिता देवी की आराधना करने से जीवन की हर कठिनाई दूर होती है और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
यह मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र ही नहीं, बल्कि कुंभ मेला और माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण भी है। कहा जाता है कि यहाँ दर्शन करने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के समय मंदिर का माहौल अद्भुत होता है, जब श्रद्धालु दिन-रात माता की साधना में लीन रहते हैं।
कुंभ मेला के अवसर पर यहाँ दर्शन का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
यहाँ का वातावरण भक्तों को शांति, विश्वास और ऊर्जा से भर देता है।
जिन लोगों की जन्म कुंडली में ग्रह दोष या पितृ दोष हो, वे यहाँ आकर पूजा करें तो राहत मिलती है।
विवाह में समस्या झेल रहे लोग कुंडली मिलान से पहले यहाँ दर्शन करें, तो विवाह योग्य योग प्रबल होता है।
व्यापार या नए कार्य की शुरुआत से पहले चौघड़िया देखकर माता की आराधना करने से सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है।
शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोग भी यहाँ आराधना कर मानसिक शांति पाते हैं।
अंक ज्योतिष के अनुसार जिनका जीवन बार-बार असफलताओं से जूझता है, उनके लिए यह स्थान विशेष शुभ माना गया है।
घर या कार्यालय के निर्माण में बाधाएँ आ रही हों तो यहाँ दर्शन कर वास्तु शास्त्र के अनुरूप कदम उठाने चाहिए।
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कैसे पहुँचें: प्रयागराज रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे से मंदिर तक आसानी से टैक्सी, ऑटो और लोकल परिवहन उपलब्ध है।
सर्वश्रेष्ठ समय: नवरात्रि और माघ मेला यहाँ आने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
✔️ आसपास स्थित अन्य मंदिर जैसे अक्षमवट, बड़े हनुमान मंदिर, और भरद्वाज आश्रम।
टिप्स:
✔️ यदि आप विशेष पूजन कराना चाहते हैं तो स्थानीय पंडित से पहले से संपर्क करें।
माता ललिता देवी शक्तिपीठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन, ज्योतिष और आत्मिक उन्नति से गहराई से जुड़ा है। यहाँ आकर भक्तों को न केवल माँ की कृपा मिलती है, बल्कि जीवन की जटिलताओं को समझने और उनसे पार पाने का मार्ग भी मिलता है। यदि आप कभी प्रयागराज जाएँ तो इस शक्तिपीठ के दर्शन अवश्य करें।
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