भारत की धरती सदियों से शक्ति उपासना का केंद्र रही है। देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक, कामाख्या शक्तिपीठ (गुवाहाटी, असम), अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमय वातावरण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह स्थान न सिर्फ़ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ का अनुभव साधकों, भक्तों और आम लोगों के लिए भी आध्यात्मिक यात्रा का अविस्मरणीय अध्याय बन जाता है।
कामाख्या मंदिर की पहचान इसकी अनूठी पूजा पद्धति और वहाँ होने वाले अंबुबाची मेले से है, जिसे शक्ति की अदृश्य ऊर्जा का उत्सव माना जाता है। जो भी इस धाम में आता है, वह देवी की अलौकिक उपस्थिति को अपने हृदय में गहराई से महसूस करता है।
कहते हैं कि जब माता सती का देह त्याग हुआ था, तब भगवान शिव शोक में उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे। उस समय भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता के अंगों को विभाजित किया, और जो अंग जहाँ गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। गुवाहाटी स्थित कामाख्या धाम उसी में से एक है।
यहाँ देवी के "योनि अंग" की पूजा होती है, और यही कारण है कि इसे सृजन शक्ति और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक शिला है जिस पर जलधारा निरंतर प्रवाहित होती रहती है। यही शिला शक्ति की जीवंत उपस्थिति का प्रतीक है।
हर वर्ष जून महीने में यहाँ अंबुबाची मेला आयोजित होता है। इस दौरान मंदिर के द्वार तीन दिनों तक बंद रहते हैं क्योंकि यह माना जाता है कि इन दिनों माता रजस्वला होती हैं। चौथे दिन मंदिर खुलने पर लाखों श्रद्धालु देवी के दर्शन करने आते हैं।
यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि ज्योतिष और तांत्रिक साधना का भी केंद्र है। कई साधक यहाँ आकर अपनी साधनाएँ पूर्ण करते हैं।
भारतीय संस्कृति में हर धार्मिक स्थल का संबंध ज्योतिष और आध्यात्मिक विज्ञान से रहा है।
✔️ कामाख्या धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालु अपनी जन्म कुंडली में आने वाले दोषों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
✔️ कई लोग यहाँ आने से पहले चौघड़िया देखकर यात्रा का शुभ समय तय करते हैं।
✔️ विवाह योग्य लोग अक्सर अपनी कुंडली मिलान से संबंधित शंकाओं को दूर करने के लिए देवी से आशीर्वाद लेते हैं।
✔️ जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, वे यहाँ साधना करके मानसिक शांति का अनुभव करते हैं।
✔️ वहीं, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र से जुड़े साधक भी यहाँ से विशेष प्रेरणा पाते हैं।
✔️ अगर आप भी ज्योतिष को गहराई से समझना चाहते हैं तो ऑनलाइन ज्योतिष कोर्स
आपके लिए एक बेहतरीन साधन साबित हो सकते हैं।
गुवाहाटी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे से कामाख्या मंदिर की दूरी लगभग 7-8 किलोमीटर है। यह नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी तक जाने के लिए टैक्सी और बस दोनों की सुविधा उपलब्ध है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही आपको एक दिव्य ऊर्जा का अनुभव होगा।
मंदिर के आस-पास छोटा बाजार है जहाँ से आप धार्मिक वस्तुएँ और असम की स्थानीय संस्कृति से जुड़े सामान ले सकते हैं।
सुबह के समय मंदिर में दर्शन करने जाएँ, भीड़ कम रहती है।
✔️ अंबुबाची मेले के समय दर्शन का अनुभव अद्वितीय होता है, लेकिन भीड़ अधिक होती है।
✔️ पहाड़ी पर चढ़ते समय आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।
✔️ मंदिर परिसर में शांति और श्रद्धा बनाए रखें।
✔️अपनी आध्यात्मिक और व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए ज्योतिष परामर्श
का लाभ ले सकते हैं।
कामाख्या धाम की यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन की कठिनाइयों से उबरने की प्रेरणा भी देती है। चाहे आपका प्रश्न जन्म कुंडली, वास्तु शास्त्र या कुंडली मिलान से जुड़ा हो, यहाँ आकर एक अजीब-सी आत्मशांति का अनुभव होता है।
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