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जानिए ज्योतिष्य दृष्टिकोण से वैदिक पद्धति के अनुसार कुंडली का अध्ययन..

जानिए ज्योतिष्य दृष्टिकोण से वैदिक पद्धति के अनुसार कुंडली का अध्ययन.. यहाँ में चंद वाक्यों से स्पष्ट करना चाहता हूँ की सबसे पहले हमे (ज्योतिष) संपूर्ण कुंडली का अध्ययन करना चाहिए और जातक को संपूर्ण जानकारी देना चाहिए ताकि लोगो का वैदिक ज्योतिष विज्ञानं पर विश्वास बना रहे और उनको इसका संपूर्ण लाभ मिल सके. १) उदाहरण :- यदि जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह प्रबल हैं तो जातक के रिश्ते मधुर होंगे व उसमे एक क्रिएटिविटी होगी और उसको शुक्र ग्रह से सम्बंधित काम भी फलदायी होंगे.
२) उदाहरण :- यदि सूर्य ग्रह प्रबल हैं तो पिताजी से सम्बन्ध मधुर होंगे व उसमे आत्म-शक्ति भरपूर होगी और उसको सरकारी नौकरी में कोई समस्या नहीं होगी. ३) उदाहरण :-यदि चन्द्रमा ग्रह प्रबल हैं तो उसके माता से सम्बन्ध मधुर होंगे व उसमे सोचने की क्षमता अच्छी होगी और जातक किसी भी परिस्थिति से बाहर निकलने की क्षमता रखता हैं ४) उदाहरण :- यदि मंगल ग्रह प्रबल हैं तो उसके दोस्तों से सम्बन्ध मधुर होंगे व उसमे ऊर्जा भरपूर होगी और जातक को आर्मी,पुलिस व खेल में सफलता आसानी से मिल जाएगी. ५) उदाहरण :- यदि बुध ग्रह प्रबल हैं तो उसके भाई बहन से सम्बन्ध मधुर होंगे व उसमे निर्णायक शक्ति अच्छी होगी और जातक कम्युनिकेशन सम्बंधित काम करेगा. ६) उदाहरण :- यदि गुरु ग्रह प्रबल हैं तो गुरु/शिक्षक से सम्बन्ध मधुर होंगे व जातक में टीचरशिप या लीडरशिप कवालिटी होगी और जातक अपने ज्ञान से अपनी आजीविका करेगा ७) उदाहरण :-यदि शनि ग्रह प्रबल हैं तो अपने नौकरो या स्टाफ से सम्बन्ध मधुर होंगे और जातक मेहनती होगा और वह मेहनत से धन अर्जित करेगा. नोट:- सबसे महत्वपूर्ण जातक की कुंडली में वर्तमान समय में किस ग्रह की महादशा चल रही हैं व कहा बैठा हैं और कहा का स्वामी हैं वैसे फल वर्तमान समय में प्राप्त होंगे. उदाहरण :- यदि धन के स्वामी की महादशा चल रही हैं तो धन आएगा , यदि छटे भाव के स्वामी की महादशा चल रही हैं तो ऋण, रोग या शत्रु उत्पन होंगे . Guruwani(Astrologer & Consultant) 98267-36794 Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at https://astrolok.in/my-profile/register/
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कुण्डलिनी जागरण आधुनिक तकनीक

पहले के समय मे कुण्डली जागृत करने के लिए वर्षो का समय लगता है। लेकिन आजकल आधुनिक तकनीक की मदद से एक दिन के वर्कशॉप में यह काम हो जाता है। कुण्डली जागरण की तकनीक सीखाना या फिर उसके लिए लोगो को प्रोत्साहित करना कोई गलत कार्य नही है। लेकिन लोगो को यह बताना कि यह काम कुछ दिनों में हो जाएगा, यह बेवकूफी है। ऐसे ही काम बहुत से गुरुजी और गुरुजीनि करते है। शक्तिपात करेंगे ये करेंगे वो करेंगे। आपको पता होना चाहिए कि अगर कुण्डली जागरण 2-3 दिनों या एक महीने में भी हो गया तो आप मर जाओगे या आपको शारीरिक मानसिक क्षति पहुँचेगी, क्योकि इतनी शक्ति आपका शरीर एक साथ नही संभाल सकता। इसके लिए पहले अपने शरीर को लायक बनाओ। फिर धीरे धीरे शक्ति बढ़ाओ और फिर वह समय आ जायेगा जब आप काफी शक्तिशाली बन जाओगे। कुण्डली जागरण के लिए शरीर, मन, आत्मा के साथ साथ कर्मो को भी बैलेंस करना होता है। मतलब अभी तक के पाप कर्मों के फल आपको भोगने है और सत्कर्मो के फल पाने है। जब यह हो जाये फिर ही आपकी साधना को शक्ति से मिला सकते है। ■ क्या है वास्तविक तरीके कुण्डली जागरण के किताबी तरीके क्या है यह मुझे पता नही। मैं अपने तरीके बता सकता हूँ। जिससे मैंने साधना की है। यह तरीके भी मैंने नही बनाये यह भी मैंने अघोरी ज्योतिष व तांत्रिको से सीखा है, उन्ही से ज्योतिष और कई तरह का ज्ञान लिया। लेकिन वह लोग न फेसबुक चलाते है न कोई इंस्टीट्यूट न ही किस मंदिर मठ में मिलेंगे। उनका अनिश्चित प्रवास रहता है। सबसे पहले अपनी कुंडली के सभी ग्रहों नक्षत्रों राशियों को साधना होती है। इनको साधने में लगभग 4 वर्ष लग जाते है। क्योंकि 12 ग्रह (आप 9 ग्रह से भी काम चला सकते है) इनको अगर 1-1 माह भी साधना से प्रसन्न करेंगे तो 1 वर्ष हो गया। फिर 27 या 28 नक्षत्र के हिसाब से करीब 2 साल से सवा 2 साल। इसके बाद राशियों की आवश्यकता होती है इसमें लगभग 18 हफ्ते से 6 महीने तक का वक्त लग सकता है। इन सबमे अगर आपकी कुंडली मे ग्रह अधिक खराब है तो आपको अधिक समय लगेगा। अगर अच्छे है तो दिए गए समय से आधे समय मे परिणाम दिखने लगते है। इस साधना में फायदा ही फायदा है, कुण्डली जागरण हो गयी तो उससे कई फायदे होते है। अगर पूर्ण रूप से जागृत नही भी हुई तो जीवन स्तर काफी ऊपर उठ जाता है और जीवन की सामान्य परेशानियां खत्म हो जाती है। ■ विशेष साधना कुण्डली जागरण साधना के साथ साथ आपको कुछ विशेष साधनाये करनी होती है। जैसे शक्ति संचय करने की साधना। यह साधना को आधुनिक भाषा मे समझे तो महाशक्ति उपयोग करने का पास या लाइसेंस होता है। शेष.... इसके लिए कुंडली विश्लेषण रिपोर्ट आदि के लिए संपर्क किया जा सकता है। ■■■■ If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com
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जानिये हाथ में त्रिभुज का मतलब ??

June 26, 2018 Palmist Rataan, Trident Sign In Palm, हस्त रेखा विज्ञान हाथ मे त्रिभुज का मतलब दोस्तो हमारे हाथ मे हाथ का आकार,उंगलिया, अंगूठा,पर्वत ओर मुख्य रेखाओ के अलावा लघु रेखाओ से बनने वाले चिन्हों का भी विशेष महत्व होता है। ऐसी कड़ी में आज हम बात करेंगे त्रिभुज की। हाथ मे अलग अलग स्थान पर त्रिभुज होने का क्या मतलब होता है।इसी कड़ी में सबसे पहले बात करेंगे।पर्वतो पर त्रिभुज का परिणाम। 1 गुरु पर्वत पर त्रिभुज होना बहुत ही सोभाग्य की बात है।ऐसे में जातक सफलता प्राप्त करेगा,बुद्धिमान होगा,शासन करने वाला,महत्वकांशी,उपकार करने वाला,कूटनीतिज्ञ,प्रबंधक,यश प्रप्ति ,प्रगति करने वाला,उच्च पद प्राप्त करने वाला,चालाक, न्याधीश, नियमित जीवन चर्या वाला,ओर धर्मिक व सामाजिक होगा। 2 सूर्य पर्वत पर त्रिभुज होना भी सोभाग्य की बात है ऐसे जातक कलाकार होते है।चित्रकला में नाम रोशन करने वाले,उपकारी,उच्च पद को प्राप्त करने वाले,ज्ञानी होंगे लेकिन अभिमान बिल्कुल नही होगा,ऐसे इंसान जीवन मे बहुत यस प्राप्त करते है । लेकिन अगर त्रिबुज में दोष है जैसे कनिष्का से सुरु होकर सूर्य पर्वत को क्रॉस कर रहा है तो के सही नही है ऐसे में ये जातक को बदनामी दिलवायेगा ।असफलता मिलेगी। 3. चंद्र पर्वत पर त्रिभुज होना भी सोभाग्य की बात मानी गयी है।ऐसे में जातक बड़ा कलाकार,राष्ट्रकवि,अनेक विदेश यात्राओं का योग,दार्शनिक, मिलनसार,गुप्त विद्या का जानकार,जादूगर,लेखक,संगीतज्ञ,अभिनेता,जीवन मे सफलता प्राप्त करने वाला। अगर त्रिभुज में दोष है तो कल्पना शक्ति अधिक होगी लेकिन कार्य शक्ति बिल्कुल नही,लेकिन ऐसे जातक को किसी स्त्री से धन प्राप्त होता है। 4 मंगल पर्वत पर त्रिभुज का निशान अच्छा माना गया है! ऐसे जातक योजना बना कर काम करने वाले।रण में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता,सेना पति, धर्य वान ,साहसी, संकट में रक्षा करने वाला,नेता,या उच्च कोटि का सृजन होता है। अगर त्रिभुज में दोष हो तो ऐसे जातक निर्दय ओर कायर होता है। 5 बुध पर्वत पर त्रिभुज होना अति सोभाग्य की बात है,ऐसे जातक कूटनीतिज्ञ ,सुखी,सफल,प्रतिभावान,लेखक,स्थिर भूस्वामी, वक्ता,मेहनती,विदेशो में व्यापार करने वाला,वैज्ञानिक,कलाकार, कमजोरी का फायदा उठाने वाला,विद्वान,धनी,यश प्राप्त करने वाला,ओर चक्रवर्ती सम्राट होता है।लेकिन आगेर त्रिभुज में दोष है तो जातक अस्थिर मानसिकता का व्यक्ति,मज़ाकिया, जुवारी,दिवाला निकलने वाला होता है। 6 सुक्र पर्वत पर त्रिभुज होने से ऐसे जातक जीवन मे बहुत सी स्त्रियो को भोगने वाला,सरल,मधुर,प्रेम का संतुलन बनाये रखने वाला,भौतिक, शान शोकत का मालिक ,उच्च स्तर का कलाकार,सौन्दर्य प्रेमी, चित्रकार,गणितज्ञ होता है। लेकिन अगर त्रिभुज में दोष है तो जातक पर स्त्रीगामी,दुष्चरित्र का इंसान होता है। 7 शनि पर्वत पर त्रिभुज होने का मतलब जातक गुप्त विद्याओ का जानकार है।ऐसे जातक त्राटक में माहिर होते है,तंत्र मंत्र के जानकार,साधक,ज्योतिषी,एकांत वाशी ,योगी,चित्रकार,धार्मिक, व्यक्तिगत स्वभिमान को अहमियत देने वाले होते है। 8 राहु पर्वत पर त्रिभुज होना बहुत ज्यादा भाग्य की बात होती है ऐसे जातक मुँह में सोने का चमच्च लेकर पैदा होते है,राजनीतिज्ञ,विद्वान,उपकारी, मन्त्री ,दृढ़ निश्चय रखने वाला, घम्बिर,यात्रा प्रेमी होता है। लेकिन अगर त्रिभुज में दोष है तो जातक को संघर्ष का सामना करना पड़ता है। 9 केतु पर्वत पर त्रिभुज होने का मतलब है बाल्य काल से से ही जातक धन में खेलेगा, राजनीति से ज़ुड़ा होगा,उच्च पद को प्राप्त करेगा । लेकिन अगर त्रिभुज में दोष है तो जातक बचपन से ही बीमार होगा। 10 प्रजापति ( हर्षल) का मतलब है जातक को संघर्ष के बाद ही सफलता मिलेगी।लेकिन बाद में विश्व स्तर पर स्मान प्राप्त करता है।निर्भय वैज्ञानिक अनुसंधान कर्ता।अगर त्रिभुज में दोष है तो जीवन को खतरा हो सकता है। 11, वरुण ( नेप्च्यून) चतुर,लेखक,विदेश में विवाह,कवि होता है। उसके बाद बात करते है रेखाओ की 1 जीवन रेखा अगर त्रिभुज जीवन रेखा पर है तो जातक को सम्मान दिलवाता है, दीर्घायु ,धनवान,पिता से लाभ मिलता है। 2 मस्तिष्क रेखा पर त्रिभुज होना अच्छा होता है। ऐसे जातक विज्ञान और बुद्धि से धन प्राप्त करते है।इनको मामा से धन प्राप्त होता है,ऐसे जातक प्रारम्भ में कुशाग्र बुद्धि वाले होते है और अंत मे अविष्कारक होते है। अगर त्रिभुज भाग्य रेखा से मिलकर बनता है तो जातक धर्मिक भी होता है। 3 ह्रदय रेखा पर त्रिभुज होना अच्छा है ऐसे जातक भाग्य शाली होते है।स्वस्थ, यश प्राप्त करने वाले।होते है। 4 सूर्य रेखा पर त्रिभुज होना सोभाग्य की बात है ऐसे जातक अंतरराष्ट्रीय सफलता प्राप्त करता है।स्पस्टवक्ता होता है जीवन मे सभी सुखों की प्राप्ति करता है। 5 भाग्य रेखा पर त्रिभुज होना एच नही कहा जा सकता ये जीवन मे संघर्ष करवाता है।बार बार असफलता मिलती है।लेकिन कई बार अचानक धन की प्राप्ति भी होती है।अगर सुरु में है तो प्रतिभा से उन्नति,अगर मस्तिक्ष रेखा के पास है तो तो युवा अवस्था मे सफलता । आगे ह्रदय रेखा के पास है तो वर्द अबस्था में सफलता मिलती है। 6 विवाह रेखा पर त्रिभुज होना बिल्कुल एच नही होता। ऐसे में जातक आजीवन अविवाहित राह सकता है।ग्रस्थजीवन बेकार,तलाक,के योग बनता है। If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com
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जानिये हस्ताक्षर के माध्यम से इंसान का व्यक्तित्व

*हस्ताक्षर बताये आपका व्यक्तित्व* किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व और व्यवहार को जानने के बहुत से तरीके हैं।जैसे-कुंडली,हस्तरेखाएं,अंकशास्त्र,चाल-ढाल,रहन-सहन ,हस्ताक्षर इत्यादि।उनमे से हस्ताक्षर करने के तरीके से भी सम्बंधित व्यक्ति का व्यक्तित्व और व्यवहार बताया जा सकता है।कुछ तरीके और हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति का स्वभाव मैं बता रहा हूँ। *सिंगल अंडरलाइन(single underline)*- ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे हुए और सदाचारी व्यक्तित्व वाले होते हैं।थोड़े मतलबी होते हैं किन्तु सभी खुशियों के साथ जीवन जीने में विश्वास रखने वाले होते हैं। *हस्ताक्षर के नीचे दो बिंदु(dots)*- ऐसे जातक रोमांटिक प्रवृत्ति के होते हैं।जीवन में बड़े ही आसानी से समायोजन कर लेतें हैं जैसे कि हम कपडे बदलते हैं।ये दूसरों को अपनी ओर बड़ी ही जल्दी आकर्षित कर लेते हैं।ये दूसरे व्यक्ति की सुंदरता को प्राथमिकता देने के अलावा खुद को सुंदर दिखाने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। *हस्ताक्षर के नीचे एक बिंदु(Single Dot)* ऐसे जातकों का क्लासिकल आर्ट्स की तरफ अधिक झुकाव होता है।स्वभाव से बहुत सरल,शांत होते हैं।यदि आपने इनके विश्वास को तोडा या इन पर अविश्वास दिखाया तो ये आपको कभी भी पीछे मुड़कर नही देखेंगे।अतः ऐसे व्यक्तियों से सावधान रहना ही हितकर होता है। *हस्ताक्षर के नीचे कोई बिंदु या अंडरलाइन नही*: ऐसे जातक अपने तरीके से अपने जीवन को जीकर खुश होते हैं,कभी दूसरों के विचारों पर ध्यान नही देते हैं।ऐसे जातक अच्छी प्रकृति के पाये जाते हैं किन्तु स्वार्थी अधिक होते हैं। *नाम और हस्ताक्षर के बीच असमानता*: ऐसे जातक बहुत स्मार्ट बनने की कोशिश करते हैं।हर तरह की बात छिपाते हैं।सीधे-साधे तरीके से कभी कोई बात न कहकर घुमा-फिराकर या व्यंग्य के रूप में कहते हैं।साथ ही दूसरों के द्वारा कही गयी बात पर या तो ध्यान नही देते या अनसुना कर देते हैं। *नाम और हस्ताक्षर में समानता*: ऐसे जातक बुद्धिमान होते हैं किन्तु दूरदर्शिता नही होती।ऐसे जातक अपनी सोच और विचारों में ठीक उसी तरह से बदलाव ले आते हैं जैसे हवा अपने बहाव की दिशा के अनुरूप बदलाव ले आती है।ये कभी नही सोचते कि कोई विशिष्ट व्यक्ति या वस्तु सही है या गलत।ये चापलूसी करके उनका मन भी जीत लेते हैं। *प्रिंटेड अक्षरों के समान हस्ताक्षर*: ऐसे जातक किसी के लिए भी बहुत दयालु होते हैं।अच्छा दिल रखते हैं।स्वार्थी होते तो हैं लेकिन अपने प्रियजनों के लिए सर्वस्व लुटाने के लिए भी तत्पर रहते हैं।ये किसी भी बात को बहुत ही गहराई तक सोचते हैं।गुस्सा भी इनको बहुत ही जल्दी आ जाता है। *हस्ताक्षर में अपना पूरा नाम लिखना*: ऐसे जातक बहुत दयालु,किसी भी प्रकार के वातावरण में अपने आप को समायोजित करने वाले तथा प्रत्येक प्रकार के व्यक्तियों से बात करने वाले होते हैं।ऐसे व्यक्ति अपने विचारों के मामले में सुदृढ़ तथा बहुत अधिक इच्छा शक्ति वाले होते हैं। Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at https://astrolok.in/my-profile/register/
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जानिए ज्योतिषीयदृष्टिकोण से बुध ग्रह के स्वामी श्री गणपति जी की पूजा का महत्व व प्रसन करने के सरल उपाय..

जानिए ज्योतिषीयदृष्टिकोण से बुध ग्रह के स्वामी श्री गणपति जी की पूजा का महत्व व प्रसन करने के सरल उपाय.. बुध ग्रह कारक हैं:- बुद्धि, कार्य कुशलता,  वाणी,  कम्युनिकेशन,  छोटे भाई बहन,  शोक,  त्वचा,  मार्केटिंग, एकाउंट्स,  सेल्स,  दूरसंचार,  नर्वस सिस्टम,  व्यापार,  कॉम्पीटीशन,  कमीशन,  इत्यादि. जैसा की ज्योतिष विज्ञानं के अनुसार नव ग्रह होते हैं और हर ग्रह के स्वामी होते हैं ग्रहो में बुध ग्रह के स्वामी श्री गणपति जी हैं इसलिए श्री गणपति जी की पूजा व आराधना करने से हमारा बुध ग्रह प्रबल होता हैं व हमें जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती हैं. हमे हमारे जीवन में जो भी सफलता मिलती हैं वो हमें कम्युनिकेशन व बुद्धि के कारण ही मिलती हैं यदि आपकी कुंडली में बुध ग्रह प्रबल हैं तो आप अच्छे व्यापारी बन सकते हैं व आपकी वाणी से लोग प्रभावित होंगे व आपमें एक मार्केटिंग स्किल होगी जो की एक व्यापार व प्रोफेशन के लिए बहुत जरुरी हैं. क्यों ख़ास हैं इस बार की गणेश चतुर्थी :- 18.09.2018 से बुध ग्रह स्वयं की राशि कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिसके स्वामी श्री गणेश जी स्वयं हैं. जो भी जातक  श्री गणेश जी की पूजा व आराधना सच्चे दिल से करेगा उसकी मनोकामना  अवश्य पूरी होगी. गणेश जी को प्रसन करने के सरल उपाय :- १) हर दिन सुबह स्नान पूजा करके गणेश जी को गिन कर पांच दूर्वा यानी हरी घास अर्पित करें। दुर्वा गणेश जी के मस्तक पर रखें। चरणों में दुर्वा नहीं रखें। २) सिंदूर की लाली गणेश जी को बहुत पसंद है। गणेश जी की प्रसन्नता के लिए लाल सिंदूर का तिलक लगाएं। गणेश जी को तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। इससे गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है। ३) गणपति अथर्वशीष का नियमित पाठ करे. ४) गणेश जी  को मोदक व लडडू का भोग लगाए. ५) हर बुधवार गाय को हरे मुंग या हरी घास खिलाये. Guruwani(Astrologer & Consultant) 98267-36794 Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at https://astrolok.in/my-profile/register/
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गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय धयान दें

27 जुलाई 2018 को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण गुरुपूर्णिमा को शुक्रवार के दिन पड़ रहा है जो 3 घंटे 55 मिनेट तक रहेगा। भारतीय समय के अनुसार रात 11:54 से प्रारंभ होकर 3:49 तक रहेगा। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष नियम अपनाने के लिए कहा गया है, वैसे तो समाज काफी आगे बड़ चुका है और लोग रूढ़िवादी बातो पर भरोसा नही करते लेकिन कई ऐसी मान्यताये आज भी है जिन पर लोग भरोसा करते है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान खास ध्यान रखने को कहा जाता है। ऐसा मन जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती है जो पेट मे पल रहे शिशु पर बुरा असर डाल सकती है। यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इस दुष्परिणाम से बच जा सकता है। गर्भवती महिलाएं ग्रह के दौरान किसी भी नुकीली, धारदार,पैनी वस्तुए जैसे कैची,ब्लेड, चाकू या सुई का इस्तेमाल न करें। मान्यता है कि इन वस्तुओं का इस्तेमाल करने से शिशु के शरीर पर असर पड़ता है ष्षरीर का कोई अंग काट हुआ या कट का निशान पाया जाता है। जब तक ग्रहण का समय है तब तक कोई भी काम न करे। घर के खिड़की दरवाजे बंद रखे तथा घर से बाहर भी न निकले। यदि घर बाहर निकलना आवश्यक हो तो सिर पर कपड़ा बांध लें, नाभि पर गेरू का लेप लगाकर उसे कपड़े से ढक ले। चादर ग्रहण को भूलकर भी न देखे अन्यथा ग्रहण की किरणों से शिशु की आंखों को नुकसान हो सकता है, नेत्र संबधित गंभीर रिग हो सकता है। कुछ लोगो का मानना है कि ग्रहण के समय गर्भवती महिलाये पानी तक न पिएं कुछ खाये भी नही यह तक कि सोये भी नही। उस समय बैठकर मंत्रो का जाप करें ताकि ग्रह आपके शिशु को नुकसान न पहुच सके। ग्रहण के समय एक नारियल अपने पास जरूर रखे जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव उनके शिशु पर न पड़े। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा, ग्वालियर If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com  
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