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Saturn in 1st House of Vedic Astrology

Saturn is known as a malefic planet. So, what result it shows when placed in someone's horoscope? It is not that bad because Saturn is an excellent teacher who let the people evolve in the difficulties and problems.  The first house of the birth chart is known to be the most significant one. Saturn, the planet of hurdles, troubles, limitations as well as discipline, indicates rigid nature. It generally creates issues/problems for the native. 

In Vedic Astrology, when Jupiter and Saturn tie together with having the aspect strength, it causes a problem in the relationship. Additionally, in whatever house, Saturn sits, it affects opposition houses to it. It makes a person serious as life presses them to work hard, grow, and evolve. 

Impact of Saturn in the first house:

  1.  It delays in marriage. 

  2.  It grants a feeling of personal evolution.

  3. The sense of responsibility can go far away.

  4.  Self-confidence usually becomes low.

  5.  It does not grant beauty to the native’s body.

  6. Saturn may bring quite an older partner.

  7.  It makes the person hard working.

  8.  Hard to discriminate between various types of work.

  9.   It creates fear of losing what you have.

  10.  It delays in career and professional life.

  11. It gives a tendency to respect people of all classes.

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Saturn in Vedic Astrology

"Saturn: What goes round comes round."

We all know, Saturn as the planet & part of the solar system, but in Astrology, Saturn plays a very crucial role. One of the slowest yet disciplined planets it has a cold & restricted nature.

It helps you study lessons of struggles and hard work to become stronger and more intelligent in the journey of life. It is entirely related to the karmic planet. In the situation of Saturn transits in a person's horoscope, the life of the person affected. There can be situations like sade sati, dhaiya, maha dashas & Antar dashas when a person can reduce to rags.

Positive Traits of Saturn:

1.Saturn has the potential to bring name, fame and prosperity when it is placed right in the horoscope.

2.Saturn gives better organization skills & power to work to achieve goals.

3.It gives you the ability to answer diplomatically even when you are in a clever state of mind.

4.When it is placed in a person's birth chart then, help you to make a better decision in personal & professional life.


Negative Traits of Saturn:

1.A person has to face a struggle when Saturn is not happy on the horoscope. 

2.Delay in events when there is a Sade Sati, dhaiya, transit over birth chart houses. 

3.Saturn taking a person one step forward and 3 steps backwards because the main motto of this is to make a person learn and take experiences. 

4.When it is placed badly in a person's horoscope, it gives depression, lower self-esteem etc. Also, promote a feeling of laziness and constant mental & physical pain.

5.Unlike positive Saturn, negative Saturn makes a person say things without even thinking. 

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Daily Panchang for 22nd October 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 22 अक्टूबर 2019
⛅ दिन - मंगलवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ *मास - कार्तिक *
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - अष्टमी 23 अक्टूबर प्रातः 03:33 तक तत्पश्चात नवमी
⛅ नक्षत्र - पुष्य शाम 04:40 तक तत्पश्चात अश्लेशा
⛅ योग - साध्य शाम 07:57 तक तत्पश्चात शुभ
⛅ राहुकाल - शाम 03:02 से शाम 04:27 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:37
⛅ सूर्यास्त - 18:08 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - स्वामी रामतीर्थजी जयंती
💥 विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 धनतेरस के दिन यमदीपदान 🌷
➡ 25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार को धनतेरस है ।
🙏🏻 इस दिन यम-दीपदान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। पूरे वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा सिर्फ  दीपदान करके की जाती है। कुछ लोग नरक चतुर्दशी के दिन भी दीपदान करते हैं।

👉🏻 स्कंदपुराण में लिखा है
🌷 कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे ।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनिश्यति ।।
➡ अर्थात कार्तिक मासके कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन सायंकाल में घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप रखने से अपमृत्यु का निवारण होता है ।

👉🏻 पद्मपुराण में लिखा है
🌷 कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां तु पावके।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति।।
➡ कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को घर से बाहर यमराज के लिए दीप देना चाहिए इससे दुरमृत्यु का नाश होता है।  

🔥 यम-दीपदान सरल विधि
यमदीपदान प्रदोषकाल में करना चाहिए । इसके लिए आटे का एक बड़ा दीपक लें। गेहूं के आटे से  बने दीप में तमोगुणी ऊर्जा तरंगे एवं आपतत्त्वात्मक तमोगुणी तरंगे (अपमृत्यु के लिए ये तरंगे कारणभूत होती हैं) को शांत करने की क्षमता रहती है । तदुपरान्त स्वच्छ रुई लेकर दो लम्बी बत्तियॉं बना लें । उन्हें दीपक में एक -दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुँह दिखाई दें । अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें । प्रदोषकाल में इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली , अक्षत एवं पुष्प से पूजन करें । उसके पश्चात् घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी -सी खील अथवा गेहूँ से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है । दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा (दक्षिण दिशा यम  तरंगों के लिए पोषक होती है अर्थात दक्षिण दिशा से यमतरंगें  अधिक मात्रा में आकृष्ट एवं प्रक्षेपित होती हैं) की ओर देखते हुए चार मुँह के दीपक को खील आदि की ढेरी के ऊपर रख दें । ‘ॐ यमदेवाय नमः ’ कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें ।

🔥 यम दीपदान का मन्त्र :
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह |
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ||
➡ इसका अर्थ है, धनत्रयोदशीपर यह दीप मैं सूर्यपुत्रको अर्थात् यमदेवताको अर्पित करता हूं । मृत्युके पाशसे वे मुझे मुक्त करें और मेरा कल्याण करें ।

📖 *आचार्य अरूणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145 *
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏
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Daily Panchang for 21st October 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 21 अक्टूबर 2019
⛅ दिन - सोमवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - कार्तिक
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - सप्तमी सुबह 06:44 तक तत्पश्चात अष्टमी
⛅ नक्षत्र - पुनर्वसु शाम 05:33 तक तत्पश्चात पुष्य
⛅ योग - सिद्ध रात्रि 10:28 तक तत्पश्चात साध्य
⛅ राहुकाल - सुबह 07:55 से सुबह 09:21 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:36
⛅ सूर्यास्त - 18:09 
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - कालाष्टमी, अष्टमी क्षय तिथि
💥 विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा  शरीर का नाश होता है।एवं अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 हेमंत ऋतु 🌷
➡ 23 अक्टूबर 2019 बुधवार से हेमन्त ऋतु प्रारंभ।
👉🏻 पथ्य आहार :- वातनाशक, मधुर, खट्टा, कड़वा, तीखा, घर की बनी मिठाई, दूध, ताजी दही, मट्ठा, मलाई, रबड़ी, नये चावल, उड़द के बड़े पकोड़े, गाजर, टमाटर, बीट, काला चना, खजूर, सूखा  मेवा, मक्खन, घी, दूध से बनी खीर, गेहूँ के आटे से बने पदार्थ, उड़द दाल, गरम जल, ऋतुनुसार हरि सब्जियाँ जैसे कि पालक, मेथी, सरसों, मकाई का आटा एवं रसयुक्त पदार्थों का सेवन करें ।
👉🏻 पथ्य विहार :- वातनाशक तेल से मालिश करें ।आँवला, तिल के उबटन से स्नान, व्यायाम तथा सुबह की सूर्यकिरणों का सेवन करें ।
👉🏻 अपथ्य आहार :- सूखे चने, सूखे मटर, मुरमुरे जैसे वातवर्धक और रुखे पदार्थ तथा ठंडे पेय-पदार्थ का सेवन न करें ।

👉🏻 अपथ्य विहार :- ठंडी हवा का सेवन ।
   🌷 स्वास्थ्यप्रद नुस्खे 🌷
1⃣ सोंठ, गुड़ और घी को मिक्स करके गोलियाँ बनायें और रोज सुबह दो गोलियाँ खायें ।
2⃣ सुबह 5 से 10 ग्राम काले तिल व गुड़ का खाली पेट सेवन करें ।
3⃣ *रात को एक मुट्ठी काले चने व दो खजूर पानी में भिगोकर रखें और सुबह चबा-चबाकर खायें ।
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्या 🌷
➡ 23 अक्टूबर 2019 बुधवार से हेमन्त ऋतु प्रारंभ।
➡ शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु होता जाता है लेकिन सूर्य की किरणें एकदम से इतनी प्रखर भी नहीं होती कि रस सुखाकर हमारा शोषण कर सकें। अपितु आदानकाल का प्रारम्भ होने से सूर्य की हल्की और प्रारम्भिक किरणें सुहावनी लगती हैं।

➡ शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है। प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि ठंडी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने से जठर में  सुरक्षित रहती है जिसके फलस्वरूप अधिक प्रबल हो जाती है। यह प्रबल हुई जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है। इस भभकती अग्नि को यदि आहाररूपी ईंधन कम पड़े तो वह शरीर की धातुओं को जला देती है। अतः शीत ऋतु में खारे, खट्टे मीठे पदार्थ खाने-पीने चाहिए। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए पौष्टिक, शक्तिवर्धक और गुणकारी व्यंजनों का सेवन करना चाहिए।

➡ इस ऋतु में घी, तेल, गेहूँ, उड़द, गन्ना, दूध, सोंठ, पीपर, आँवले, वगैरह में से बने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का सेवन करना चाहिए। यदि इस ऋतु में जठराग्नि के अनुसार आहार न लिया जाये तो वायु के प्रकोपजन्य रोगों के होने की संभावना रहती है। जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो उन्हें रात्रि को भिगोये हुए देशी चने सुबह में नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खाना चाहिए। जो शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं उन्हें केले, आँवले का मुरब्बा, तिल, गुड़, नारियल, खजूर आदि का सेवन करना अत्यधिक लाभदायक है।

➡ एक बात विशेष ध्यान में रखने जैसी है कि इस ऋतु में रात लंबी और ठंडी होती है।  अतः केवल इसी ऋतु में आयुर्वेद के ग्रंथों में सुबह नाश्ता करने के लिए कहा गया है, अन्य ऋतुओं में नहीं।

➡ अधिक जहरीली (अंग्रेजी) दवाओं के सेवन से जिनका शरीर दुर्बल हो गया हो उनके लिए भी विभिन्न औषधि प्रयोग जैसे कि अभयामल की रसायन, वर्धमान पिप्पली प्रयोग, भल्लातक रसायन, शिलाजित रसायन, त्रिफला रसायन, चित्रक रसायन, लहसुन के प्रयोग वैद्य से पूछ कर किये जा सकते हैं।

➡ जिन्हें कब्जियत की तकलीफ हो उन्हें सुबह खाली पेट हरड़े एवं गुड़ अथवा यष्टिमधु एवं त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यदि शरीर में पित्त हो तो पहले एक टुकी चूर्ण एवं मिश्री लेकर उसे निगद लें । सुदर्शन चूर्ण अथवा गोली थोड़े दिन खायें।

➡ विहारः आहार के साथ विहार एवं रहन-सहन में भी सावधानी रखना आवश्यक है। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए तेल की मालिश करनी चाहिए। चने के आटे, लोध्र अथवा आँवले के उबटन का प्रयोग लाभकारी है। कसरत करना अर्थात् दंड-बैठक लगाना, कुश्ती करना, दौड़ना, तैरना आदि एवं प्राणायाम और योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, सूर्यस्नान एवं धूप का सेवन इस ऋतु में लाभदायक है। शरीर पर अगर का लेप करें। सामान्य गर्म पानी से स्नान करें किन्तु सिर पर गर्म पानी न डालें। कितनी भी ठंडी क्यों न हो सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। रात्रि में सोने से हमारे शरीर में जो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है वह स्नान करने से बाहर निकल जाती है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है।

➡ सुबह देर तक सोने से यही हानि होती है कि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय, शुक्राशय आदि अंगों पर अपना खराब असर करती है जिससे अलग-अलग प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से इन अवयवों को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखा जा सकता है।

➡ गर्म-ऊनी वस्त्र पर्याप्त मात्रा में पहनना, अत्यधिक ठंड से बचने हेतु रात्रि को गर्म कंबल ओढ़ना, रजाई आदि का उपयोग करना, गर्म कमरे में सोना, अलाव तापना लाभदायक है।

➡ अपथ्यः इस ऋतु में अत्यधिक ठंड सहना, ठंडा पानी, ठंडी हवा, भूख सहना, उपवास करना, रूक्ष, कड़वे, कसैले, ठंडे एवं बासी पदार्थों का सेवन, दिवस की निद्रा, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है।

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Online Astrology by Mr. Alok Khandelwal

In this tech-driven world, do you think learning astrology would be useful?


Astrology is as old as time which helps to learn & predict past, present, and future aspect. 


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This unique webinar was held on 15th September & 2nd October 2019 guided by expert Astrologer, Mr. Alok Khandelwal. This webinar was based on the coming online live course of "Astromani - 6 Months Online Astrology Course.

 

Mr. Khandelwal has cleared the dicey perspective of people who wants to do the Astrology course but, not sure how they will do it and what they can get back.  


Attended by 40+ aspirants, this webinar was great for a beginner, intermediate as well as advanced astrologers seeking a better understanding of ancient + modern astrology.  The detailed overview of what they will learn in this course, who will take this course, what will be the mode of teaching and benefits of pursuing this course was covered in this webinar. 


Asttrolok generally conducts this kind of webinar for people seeking knowledge about astrology and its numerous aspects so, stay connected with us to attend the next webinar. 


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Daily Panchang for 18th October 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞


⛅ दिनांक 18 अक्टूबर 2019

⛅ दिन - शुक्रवार 

⛅ *विक्रम संवत - 2076 

⛅ शक संवत -1941

⛅ अयन - दक्षिणायन

⛅ ऋतु - शरद

⛅ *मास - कार्तिक 

⛅ पक्ष - कृष्ण 

⛅ तिथि - चतुर्थी सुबह 07:29 तक तत्पश्चात पंचमी

⛅ नक्षत्र - रोहिणी शाम 05:00 तक तत्पश्चात मॄगशिरा

⛅ योग - वरीयान् 19 अक्टूबर प्रातः 03:24 तक तत्पश्चात परिघ

⛅ राहुकाल - सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 तक 

⛅ सूर्योदय - 06:35

⛅ सूर्यास्त - 18:12 

⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में

⛅ *व्रत पर्व विवरण - 

💥 विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞


🌷 घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय 🌷

👉🏻 20 अक्टूबर 2019 को सुबह 07:30 से 21 अक्टूबर सूर्योदय तक) रविवारी सप्तमी है।

🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-

🌷 "जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"

💥 नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी । 

🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞


🌷 मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि 

🙏🏻 सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।

🌷 इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।

🙏🏻 (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)

           🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞


🌷 रविवार सप्तमी 🌷

🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता है  |

🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे , तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं , अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे | इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये |

🌞 सूर्य भगवान पूजन विधि 🌞

🙏🏻 १) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |

🙏🏻 २) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |

🌞 सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र 🌞

🌷 1. ॐ मित्राय नमः।

🌷 2. ॐ रवये नमः।

🌷 3. ॐ सूर्याय नमः।

🌷 4. ॐ भानवे नमः।

🌷 5. ॐ खगाय नमः।

🌷 6. ॐ पूष्णे नमः।

🌷 7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

🌷 8. ॐ मरीचये नमः।

🌷 9. ॐ आदित्याय नमः।

🌷 10. ॐ सवित्रे नमः।

🌷 11. ॐ अर्काय नमः।

🌷 12. ॐ भास्कराय नमः।

🌷 13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।


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