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जानिये जन्मपत्री मे कैसे बनते हैं ग्रहण योग, चंडाल योग, दरिद्र योग, कलह योग

जानिये जन्मपत्री मे कैसे बनते हैं ग्रहण योग, चंडाल योग, दरिद्र योग, कलह योग

जन्मपत्री मे ग्रहो से निर्मित कुयोग (ग्रहण योग, चंडाल योग, दरिद्र योग, कलह योग, शकट योग, उन्माद योग ) की शांति / उपाय न होने पर ये शुभ ग्रहो की दशा व राजयोग का शुभ फल देने मे बाधा बनते है। ग्रहण योग... जन्मकुण्डली में किसी भी भाव में जब आत्मा कारक सूर्य या मन के कारक चंद्रमा के साथ राहू और केतु में से कोई भी एक ग्रह उपस्थित होता है तो सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण योग बनता है। जन्मपत्री मे ग्रहण योग के कारण जातक को शारीरिक-मानसिक पीड़ा, अपमान, अपनों से वैमनस्य, रोग, ऋण, शत्रु, कलंक तथा राजदण्ड आदि का सामना करना पड़ सकता है। जन्मपत्री के जिस भाव मे ग्रहण दोष हो, वह भाव भी बुरा फल देता है। चंडाल योग: बृहस्पति गृह की जन्मपत्री के किसी भी भाव में राहू या केतु से युति होने पर गुरु चंडाल योग बनता है। इस योग के कारण व्यक्ति के जीवन मे हर 2 - 3 साल बाद, कुंडली के जिसे भाव मे यह होता है। उस भाव से समबन्धित कोई न कोई रूकावट या परेशानी आती है। ऐसे ग्रहो के योग के कारण व्यक्ति को धोखा, शरीर पर कोई चोट का निशान व व्यक्ति का मन / दिमाग अनैतिक अथवा अवैध कार्यों में जल्दी लग जाता है। इस योग वाले अधिकांश व्यक्ति हिंसक, धार्मिक कट्टरवादी तथा पाखंडी व उनकी कथनी और करनी में अंतर होता है। दरिद्र योग.... यदि लग्न या चंद्रमा से सभी केंद्र स्थान रिक्त हों या सभी केंद्रों में पाप ग्रह हों तो दरिद्र योग होता है। ऐसे योग वाले इंसान को आजीवन कंगाली और बदहाली का सामना करना पड़ता है। कलह योग: जब कुण्डली में चंद्रमा किसी भी पाप ग्रह के साथ बारहवें, पांचवें अथवा आठवें भाव में मौज़ूद होकर राहु के साथ भी संयोग कर ले तो कुण्डली में कलह योग का निर्माण हो जाता है। ऐसे योग वाला जातक कलह प्रिय होता है और यदि वह स्वयं कलह का कारण न भी बने, उसके जीवन में आए दिन कलह के संयोग उपस्थित होते रहते हैं। ऐसे जातक की सारी ऊर्जा कलह से निपटने में खर्च होती रहती है। शकट योग.. कुंडली में चन्द्रमा बृहस्पति से 6 अथवा 8वें घर में स्थित हो तो ऐसी कुंडली में शकट योग बनता है जिसके कारण जातक की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में अनेक बार गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्माद योग... (1) कुंडली मे लग्न में सूर्य हो व सप्तम में मंगल हो, (2) यदि लग्न में शनि और सातवें ,पांचवें या नवें भाव में मंगल हो (3) यदि धनु लग्न हो व लग्न- त्रिकोण में सूर्य-चन्द्र युति हों साथ ही गुरु तृतीय भाव या किसी भी केंद्र में हो तो गुरुजनों द्वारा उन्माद योग की पुष्टि की गयी है.जातक जोर जोर से बोलने वाला गप्पी होता है.ऐसे में यदि ग्रह बलिष्ट हों तो जातक पागल हो जाता है | Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at https://astrolok.in/my-profile/register/

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