Learn what’s best for you

horoscopes

गुप्त नवरात्रि तीन जुलाई से

गुप्त नवरात्रि 3 जुलाई बुधवार से प्रारंभ होकर 10 जुलाई बुधवार तक रहेगी।
सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण अष्टमी व नवमी एक ही दिन की होगी।

जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र के दौरान साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि नवरात्र में देवी की साधाना अधिक कठिन होती है। इन नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। रात के समय की गई गुप्त पूजा गुप्त मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।
व्यक्ति के पास धन-धान्य, ऐश्वर्या, सुख-स्मृद्धि और शांति की कोई कमी नहीं रहती।

*नवरात्र में इन देवियों की पूजा की जाती है*
नवरात्र के पहले दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नौवें दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है|

 *गुप्त नवरात्र की पूजा विधि*

जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं।  यदि साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रतिकूल प्रभाव भी साधक पर पड़ सकते हैं इसलिए साधना अपने गुरु के निर्देशन में ही करें।

चोपड़ा जी ने बताया कि दशमी तिथि को भड़ली नवमी होने के कारण उस दिन अबूझ मुहूर्त रहेगा। इस मुहूर्त पर विवाह एवं शुभ कार्य किये जा सकते है।
 

comments

Leave a reply

Download Prospectus
Thank You
Let's Chat