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Different topics are seen through the Divisional or Varga horoscope.

The details of which are some of the major topics and the horoscope to be seen for them.

● D1 All Kind of Subjects

● D2 Property, Capitals, Prosperity

● D3 Brother-Sister, Own Power

● D4 Luck, Fortune, Fixed-Non Fixed Assets, Affairs, Mentality

● D5 Child, Creativity, Nature, Activity, Intelligence

● D6 Health, Disease, Loan, Fights, Litigation

● D7 Child, Partnership, Married Life

● D8 Major Diseases, Big Problems, Litigation, Longevity, Married Life

● D9 Mental Level, Nature, Inner Qualities, Compatibility, Longevity

● D10 Business, Work, Job, Power, Position

● D11 Gains, Profit, Income from Work, Married Life

● D12 Parents, Guardian, Birth Reason, Dream, Mental Health

● D16 Conveyance, Vehicle, Travel

● D20 Worship, Past Life, Any Gain, Sudden Events

● D24 Learning, Study, Intelligence, Knowledge

● D27 Strength, Weakness, Dreams, Communication

● D30 Evil Effects, Children's Future

● D36 Strength During Positive, Negative events

● D40 Auspicious & Inauspicious, All kind of Health issues, Vaastu

● D42 Balance Sheet of Life

● D45 Own Luck, Health, Happiness, Sustainability, Stability, Power of Relation

● D50 All kind of Family & Relatives

● D60 Brief Points, Birth Time Rectification

● D75 Foreign Settlement, Job/Business Changes, Transfer, Promotion, General Health, Result of Efforts

● D81 Power of Planets, Planet Promises, Birth Time Rectification, Large and Major Events, Effects of Dasha's.

There are many more Divisional horoscopes in this way, generally we only mention the horoscope for the predictions. Whilst they have different subjects. According to the subject only the horoscope should be seen.

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CHILDLESSNESS (principles and remedies)

This is a major issue in the Hindu perspective and the marriage in Hindus has acquired sanctity because of the belief that the male issues are a must for the perpetual growth of bandha i.e. the clan.

The eldest Son is called the "Karma Putra" and it is who has the right to lit the pure after death of his parents and it is also responsibility till his death to perform the obsequies for his after parents after death.

Hindu believe in shastra . In Bhagwat Geeta lord krishna says " तस्माच्छात्रं प्रमानंते कार्याकार्य व्ययस्थितौ " which means that shastras should be considered as praman , the reference and perform the (DO's)karya and (DONT's) aakarya as per the dictum enunciated in shastra.

Therefore , Hindus in particular , have the more inclination for male children though it is not ruled out in other religions.

The shastra says that a man without a son does not get emanicipation by the saying "अपुत्रस्यर्गतिं नास्ति". But, unfortunately , some parents do not get be-get male child at all in their life time , but there may be female issues.

In some cases there may be absolutely no issues whether male or female. Many times , to he couples may be puzzle for not becoming parents inspire of they being perfectly fit medically .

Then what is the Problem ??

Astrologically, there are number of factors for this happening .

Sage Parashar has given as to why such child less news take place.

Particularly to those who suffer without a male issue, Parashara has states a number of putr akshaya yoga talking place due to course of sarpa , brothers, material uncle , mother , brahmins, wife, lady , and atripta atmas i.e. unfulfilled and dissatisfied would etc.

Number of planetry combination have been enunciated to identity these courses . In short Parashara has lines that one has to study the affliction of 5th house and tirth lord , the putra karana Jupiter and the karana under heading the analysis for the course is made.

For example one has to study Moon's affliction with her post koning or aspect along with Putra karka Jupiter and the 5th lord. Moon being the significa tor of mother will throw light as to whether the native has any Matrishapa.

Similar ,Mars is to be analyzed for bhratrishapa . Neeche is to be analysed to find the course of maternal uncle, Sun is to Be analysed with Ketu for Pitrishapa. Affliction of Jupiter to be analysed for Brahman shape.

Affliction of Venue should translated for Stree and patni shapa . Affliction of Saturn and Rahu should be get analysed for the preta shala.

1. If navamash lord of 5th ,2nd and 7th houses are conjoined with malefic or aspects by malefics it causes childlessness

2. If Jupiter , lord of lagna , the 7th lord and 5th lord are all devoid of strength it causes childlessness.

3. If the navaja shadi pati of 12th house lord occupies the eighth of the fifth lord occupies krUra sharanagat it causes childlessness.

4. If Sun ,Mars, Rahu and Saturn are strong and if putra karana Jupiter is devoid of strength , the native Mars will not have children.

5. If the 5th lord occupies 6th, 8th, 12th houses it causes childlessness.

6. If the 5th lord occupies kendra and trikon sthanas it is auspicious for birth of children . If the 5th lord occupies 6th, 8th, 12th , sons will not be Born. If the 5th lord is conjoined with malefic or combust , sons are not Born . If Born the sons will die. 

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जानिये गण्डमूल नक्षत्र के बारे में !!

कौन से नक्षत्र है जिन्हें गंडमूल के नाम से जाना जाता है ?

ये नक्षत्र है  - अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती

इस नक्षत्र में जन्म लेने से गंडमूल योग बनता है |

मूल, ज्येष्ठा व आश्लेषा ये तीन गंड कारक होते हैं।

अश्विनी, रेवती और मघा ये तीन अपगंड नक्षत्र होते हैं। मू

ल, ज्येष्ठा व आश्लेषा की अंतिम चार घड़ी (1.36 मिनट) गंड कहलाती है।

सामान्यतः इन तीनों नक्षत्रों को गंड माना है।

मूल और ज्येष्ठा का बुरा प्रभाव दिन में, आश्लेषा और मघा का बुरा प्रभाव रात्रि में, अश्विनी और रेवती का बुरा प्रभाव सायं काल में होता है। अश्विनी का प्रथम चरण, मघा के पहले दो चरण व रेवती का अंतिम चरण अनिष्ट कारक होता है। गंडमूल नक्षत्रों में जन्मे जातक पर नकारात्मक प्रभाव तो अवश्य पड़ता ही है विशेष रूप से कई बार जन्म समय से ही बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तथा माता-पिता पर भी इसका दुष्प्रभाव कई बार देखा जा सकता है।गंडमूल नक्षत्रों में उत्पन्न होने वाले जातक ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से अरिष्टकारक होता है क्योंकि इन नक्षत्रों में पैदा होने वाले जातकों को न तो पिछली राशि, नक्षत्र तथा न ही प्रारंभ होने वाले नक्षत्र एवं राशि का फल प्राप्त होता है। रात में जातक का जन्म हो और गंडांत दोष हो तो माता को बहुत कष्टकारी होता है।

दिन के गंडयोग में कन्या का जन्म हो और रात में पुरूष जातक का जन्म हो तो यह दोष बहुत कम बल्कि न के बराबर हो जाता है। गंडमूल नक्षत्र की शांति वापस उसी नक्षत्र के आने पर 27 दिन बाद की जानी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में तो यहाँ तक कहा गया है की शांति के बाद ही पिता को बच्चे का मुंह देखना चाहिये। 6 माह व 12 दिन में शांति करने का विधान भी कुछ ज्योतिषाचार्यों ने माना है।

आइये जानते है गंडमूल नक्षत्रों का जातक पर क्या प्रभाव होता है—-?

अश्विनी नक्षत्र :
मेष राशि एवं केतु के इस नक्षत्र में पैदा हुए जातक सुंदर, सौभाग्ययुक्त, चालाक, स्त्री प्रिय, शूरवीर, बुद्धिमान, दृढ़निश्चयी, जल्दबाज, निरोग, राजपक्ष से लाभ कमाने वाले और संघर्षमय जीवन व्यतीत करते हैं।

अश्विनी प्रथम चरण : पिता के लिए कष्टकारक।

दूसरा चरण : अधिक पैसा खर्च करने वाले।

तीसरा चरण : घूमने वाला (भ्रमणशील)

चौथा चरण : अपने शरीर के लिए कष्टकारी

आश्लेषा नक्षत्र : कर्क राशि व बुध के नक्षत्र में पैदा हुये जातक शीघ्र ही बदल जाने वाले, धनवान, कलाकार, चतुर बुद्धि, लोगों के काम करने में तत्पर, खाने-पीने के शौकीन व हंसमुख होते हैं। अगर यह नक्षत्र पाप ग्रहों के प्रभाव में हो तो जातक धूर्त, क्रूर कार्य करने वाला, परस्त्रीगामी, व्यसनी, स्वार्थी तथा शीघ्र क्रुद्ध हो जाता है।

आश्लेषा प्रथम चरण : विशेष दोष नहीं।

दूसरा चरण : पैतृक धन हानि

तीसरा चरण : माता या सास के लिए अरिष्ट कारक 

चतुर्थ चरण : पिता को कष्टकारी

मघा नक्षत्र : सूर्य की राशि सिंह एवं केतु के नक्षत्र में पैदा हुये जातक स्पष्टवादी, मुंहफट, जल्दी गुस्सा करने वाले व हठी प्रकृति के होते हैं। कठोर मन वाला और स्त्री पक्ष से द्वेष रखने वाला होता है।

मघा प्रथम चरण : माता या मातृ पक्ष को हानि।

दूसरा चरण : पिता को अरिष्ट

तीसरा चरण : शुभ फलदायक

चौथा चरण : विद्या और धन के लिए शुभ होता है।

ज्येष्ठा नक्षत्र : मंगल की राशि (वृश्चिक) बुध के इस नक्षत्र में पैदा हुये जातक क्रोधी, सरल हृदय, अध्ययनशील, स्पष्टवादी, तर्कशील, वाकयुद्ध में प्रवीण, धार्मिक, सहयोगी व अहंकारी होते हैं।

ज्येष्ठा प्रथम चरण : बड़े भाई को अरिष्ट

दूसरा चरण : छोटे भाई को अरिष्ट

तीसरा चरण : माता या नानी को अरिष्ट

चौथा चरण : जातक स्वयं को अनिष्टकारी ज्येष्ठा नक्षत्र के संपूर्ण मान को दस भागों में विभाजित करें।

यदि ज्येष्ठा नक्षत्र का कुल मान 60 घड़ी है तो 10 द्वारा भाग देने पर प्रत्येक खंड का मान 6 अंश होगा। इसका फल नीचे लिखे विभाग संखया द्वारा निर्दिष्ट किया गया है।

मूल नक्षत्र : केतु के नक्षत्र और गुरु की राशि धनु में पैदा जातक धार्मिक, उदार हृदय, धनी, ईमानदार, मिलनसार, परोपकारी, नीतिवान, सामाजिक कार्यों में व्यस्त और अच्छे संस्कारों से युक्त होते हैं। सामान्यतया समस्त मूल नक्षत्र को अरिष्ट कारक माना गया है।

मूल नक्षत्र में पैदा हुये जातक का शुरू एवं अंत की घड़ियों में विद्वान आचार्यों में मतांतर पाया जाता है।

मूल प्रथम चरण – पिता का नाश

दूसरा चरण – माता का नाश

तीसरा चरण – धन का नाश

चौथा चरण – जातक सुखी, धनी , मूल नक्षत्र के संबंध में अनेक मत प्रचलित हैं। लेकिन जयार्णव नामक ग्रंथ में मूल नक्षत्र के बारे में विशेष पद्धति से बताया गया है जोकि प्रचलित तथा मान्यताप्राप्त हैं। मूल नक्षत्र का संपूर्ण मान 60 घड़ी है। इसे 8 विभागों में बांटा है। इस प्रकार 7+8+10+11+12+5+4+3 = 60 घड़ी।

अब दूसरे प्रकार से अनिष्ट देखते हैं। संपूर्ण मूल नक्षत्र के मान को 15 से विभाजित करें। देखें कि जन्म समय मूल नक्षत्र के कितने घड़ी पल व्यतीत हो चुके हैं। जिस खंड में जन्म हो, इसके अनुसार अनिष्ट फल होगा।

1. पिता

2. पिता का भाई

3. बहनोई

4. पितामह

5. माता

6. मौसा

7. मामा

8. ताई या चाची

9. सर्वस्व

10. पशु

11. नौकर

12. स्वयं जातक

13. बड़ा भाई

14. बहन

15. नाना।

रेवती नक्षत्र : बुध के नक्षत्र और गुरु की राशि मीन में पैदा हुये जातक धनवान, सुंदर, तर्कशील, विद्यावान, पुत्र एवं कुटुंब से युक्त, बुद्धिमान, धार्मिक अध्ययनशील, सरल स्वभाव के होते हैं।

रेवती के प्रथम चरण : राजा के समान वैभवशाली

दूसरा चरण : मंत्री के समान सुखी

तीसरा चरण : धनवान

चौथा चरण : माता-पिता के लिए आरिष्टकारी।

केवल नक्षत्र गण्डांत पर ही विचार नहीं किया जाता अपितु तिथि एवं लग्न के भी गण्डांत का विचार किया जाता है।

नक्षत्र गण्डांत पर अपवाद : वशिष्ठजी का मत है कि अगर जातक का रात्रि में मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में अथवा दिन में मूल के दूसरे चरण में जन्म हो तो जातक माता-पिता के लिये अरिष्ट कारक नहीं होता।

गर्गाचार्य का मत है कि रविवार को अश्विनी, बुध या रविवार को हस्त, चित्रा, स्वाती अनुराधा, ज्येष्ठा अथवा रेवती नक्षत्र में जन्म हो तो त्रिविध गण्डांत का दोष नहीं होता। चंद्रमा की शुभ स्थिति में कुंडली में केंद्र और त्रिकोण में शुभ एवं उच्च के ग्रहों की स्थिति में गंडमूल नक्षत्रों का प्रभाव बलहीन हो जाता है। मंत्रेश्वर महाराज ने बहुत सुंदर लिखा है कि लग्न और लग्नेश के बलवान होने से सारी कुंडली सुधर जाती है। त्रिकोण (5, 9) व केंद्र (1, 4, 7, 10) में बलवान बुध होने पर 100 दोषों का तथा बलवान शुक्र होने पर 200 दोषों का और बलवान गुरु होने पर एक लाख दोषों का नाश हो जाता है। इसी तरह लग्नेश केंद्र या लग्न नवांशेश हो तो वह भी दोष समूह को इस प्रकार शांत करता है जैसे अग्नि रूई को जला देती है।

जानिए गंडमूल नक्षत्रों के उपाय कब करना चाहिये—-?

जिस गंडमूल नक्षत्र में बच्चे का जन्म हो वही नक्षत्र 27 दिन के बाद आए या जन्म से 12वें दिन अथवा आठवें वर्ष में जब कभी भी शुभ समय में अपना जन्म नक्षत्र हो। इसी नक्षत्र में किसी सुयोग्य ब्राह्मण द्वारा नक्षत्र, ग्रह, देवी-देवताओं का पूजन और हवन कराना चाहिए।

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Daily Panchang - 16th July 2018

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 16 जुलाई 2018* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2075 ⛅ *शक संवत -1940* ⛅ *अयन - दक्षिणायन* ⛅ *ऋतु - वर्षा* ⛅ *मास - आषाढ़* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - चतुर्थी शाम 06:40 तक तत्पश्चात पंचमी* ⛅ *नक्षत्र - मघा सुबह 11:13 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी* ⛅ *योग - व्यतीपात शाम 05:06 तक तत्पश्चात वरीयान्* ⛅ *राहुकाल - सुबह 07:48 से सुबह 09:27 तक* ⛅ *सूर्योदय - 06:07* ⛅ *सूर्यास्त - 19:22* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी, संक्रांति (पुण्यकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक)* 💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞आचार्य अरुणा दाधीच जयपुर 9983974145 🌷 *संक्रांति* 🌷 ➡ *16 जुलाई 2018 सोमवार को संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से सूर्यास्त तक)* 🙏🏻 *इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म अक्षय होता है ।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *गुप्त नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *इन दिनों आषाढ़ मास का गुप्त नवरात्रि चल रही हैं । गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जप करने से सभी सुखों की प्राप्ति संभव है। ये मंत्र बहुत ही चमत्कारी हैं, अगर विधि-विधान से इनका जप किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। (दुर्गा सप्तशती के मंत्र बहुत ही शीघ्र असर दिखाते हैं, यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।) मंत्र जप की विधि इस प्रकार है-* 🌷 *जप विधि* 🌷 ➡ *1. गुप्त नवरात्रि में रोज सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुशा (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से मंत्रों का जप करें।* ➡ *2. इन मंत्रों की प्रतिदिन 5 माला जप करने से मन को शांति तथा प्रसन्नता मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाते हैं।* 👩🏻 *सुंदर पत्नी के लिए मंत्र* *पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।* *तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।* 💰 *गरीबी मिटाने के लिए* *दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता।। रक्षा के लिए शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।। बाधा शांति के लिए सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वरिविनासनम्।।* 😌 *सपने में सिद्धि-असिद्धि जानने के लिए* *दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।* 👨‍👨‍👧‍👧 *सामूहिक कल्याण के लिए* *देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न: ।। भय नाश के लिए यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।* 😷 *रोग नाश के लिए* *रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।* 🤢 *विपत्ति नाश के लिए* *देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।* 🙏आचार्य अरुणा दाधीच जयपुर 9983974145🙏 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷🌻☘🌸🌹🌼🌺💐🙏🏻 If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com
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Health- 15th July 2018 to 15th August 2018

1. मेष :- मेष राशि वाले जातकों के लिए इस महीने में जल से होने वाली बिमारियों से खतरा रहेगा |  सर्दी, खांसी, जुकाम , बुखार, विष बाधा , होने की सम्भावना बनी रहेगी | खान पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है | नसों से सम्बंधित बीमारी भी हो सकती है | माता के स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है | माता की तबियत ख़राब हो सकती है.| उपाय :- मंगलवार के दिन हनुमान जी को बूंदी का लड्ड़ू चढ़ाएं | एवं हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें | 2. वृषभ :- वृषभ राशि के जातकों को शरीर में फोड़ा , फुंसी , सर्दी, जुकाम , लिवर में परेशानी होने की संभावना रहेगी | मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए ये समय काफी परेशानियों वाला रहेगा | शरीर में जलन , ह्रदय सम्बन्धी बीमारियां  , आँखों में तकलीफ होने की संभावना बानी रहेगी | स्त्री जातकों के लिए नाभि के निचे  या गर्भाशय  में विकार उत्पन्न हो सकता है | कमजोरी महसूस करेंगे | उपाय :-शुक्रवार के दिन गे को ढूढ़ से बना हुआ खीर या मिठाई खिलाएं | श्री  सूक्त  का पाठ करें | 3. मिथुन :- मिथुन राशि के जातकों के लिए ये समय काफी सावधानी बरतने का है | वहां चलते समय ध्यान दें | वाहन ज्यादा रफ़्तार में न चलाएं | अपघात होने की संभावना बानी रहेगी | सर पर चोट लग सकता है | लड़ाई झगड़े से बचें | उपाय :- माँ दुर्गा की आराधना करें | बुधवार के दिन गे को हरा चारा खिलाएं | 4. कर्क राशि :- कर्क राशि वाले जातकों के लिए कफ , वात  की तकलीफ बानी रहेगी  | अधिक काम के कारन  थकन महसूस करेंगे | मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहेगा |  sharir के किसी अंग में पत्थर या पेड़ से चोट लगने की संभावना  रहेगी | उपाय :- ॐ नमः शिवाय का जप करें | सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पण करें | 5. सिंह :- सिंह राशि के जातकों के लिए मानसिक बिमारियों का खतरा रहेगा | गुदा रोग होने की संभावना रहेगी | आंखोंमें तकलीफ होगी | आंख में फोड़ा या आँखें लाल होना | वात अथवा शूल रोग होगा | पेट में जलन की समस्या रहेगी | भूख नहीं लगना , जी  मिचलाना  , खाना का नहीं पचना इस तरह की समस्याएं होंगी | उपाय :- सूर्य को जल अर्पण करें | विष्णु मंदिर में जाएँ | 6. कन्या :- कन्या राशि के जातकों के लिए ये समाया कान के रोग का देने वाला होगा | कान में दर्द , फोड़ा ,  घाव वगैरह हो सकता है | सां लेने में तकलीफ या फेफड़े से सम्बंधित बीमारियां हो सकती हैं | नाभि के निचे पेट में दर्द  रहने की संभावना रहेगी | मानसिक रूप से परेशां रहेंगे | उपाय :- माँ दुर्गा की आराधना करें  | गाय को हरा चारा खिलाएं तथा हनुमान जी को बूंदी का लड़डू चढ़ाएं | 7. तुला :- तुला राशि के जातकों के लिए लिवर तथा किडनी से सम्बंधित बीमारियां होने की संभावना बनेगी | पीलिया रोग होने की संभावना है | मधुमेह के रोगियों के लिए समय स्वास्थ्य के ऊपर ध्यान देने का है , अर्थात वो अपने खान पान का ध्यान दें | सर्दी , जुकाम ,  कफ से पीड़ा होने की संभावना बनेगी | उपाय  :- माता लक्ष्मी की आराधना करें | 8. वृश्चिक :- वृश्चिक राशि वाले जातकों को अपघात  का भय रहेगा | मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की पीड़ा हो सकती है   | वाहन चलाने पर ध्यान दे | पैर के निचले हिस्से में चोट या दर्द हो सकता है | गुदा रोग , पेशाब में  तकलीफ इत्यादि बीमारियां होने की प्रबल संभावना बनेगी | उपाय :-   हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें | 9. धनु :- धनु राशि वाले जातकों को त्वचा सम्बंधित बीमारी होने के प्रबल संभावनाएं बनेंगी | जल से होने वाली बीमारियां | कमजोरी , आँखों में तकलीफ , नाभि के निचे तकलीफ होगी | स्त्री जातकों के लिए गर्भाशय में समस्या उत्पन्न होंगी | अस्थियों से सम्बंधित बीमारियां  या टूटना  होने की संभावना रहेगी | उपाय :- भगवान विष्णु की  उपासना करें | गुरुवार के  दिन  साई बाबा या दत्ता मंदिर या  किसी गुरु के मंदिर में जाएँ | गाय को केले खिलाएं | 10. मकर :- मकर राशि वाले जातकों के लिए ये समय विशेष ध्यान देने योग है | मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहने की संभावना है | नसों से होने वाली बीमारियां , नसों में अकड़न , हाँथ पैर का कांपना , हाथ पैर में सूजन इत्यादि समस्याएं हो सकतीं हैं | हैजा , मलेरिया बुखार इत्यादि से परेशानी होगी | पानी  से  होने वाले तकलीफ  जलीय जीवों से खतरा रहेगा | खून  से सम्बंधित बीमारियां हो सकतीं हैं | उपाय :- हनुमान चालीसा का पाठ करें | शनिदेव को तेल चढ़ाएं | 11. कुम्भ :-  कुम्भ राशि वालों के लिए ह्रदय सम्बंधित रोग , अग्नि से सम्बंधित बीमारियां , शरीर में जलन होने की संभावना रहेंगी | ईर्ष्या की भावना बनेगी जिससे मानसिक परेशानियां बहुत ज्यादा रहेंगी | गलत कर्म करने की इच्छा होगी | रासायनिक  प्रतिक्रिया  दवाईयों या जहर से वाली शरीर को हानि पहुंचा सकती है।  पैरों में दर्द या चोट लगने की संभावना रहेंगी | सर्प दंश का भय रहेगा | उपाय :- हनुमान जी की आराधना करें | नाग देवता को ढूढ़ चढ़ाएं | 12. मीन :- मीन के जातकों को एनीमिया की तकलीफ हो सकती है | वात तथा कफ से होने वाली बिमारियों का खतरा रहेगा | आँखों में तकलीफ , मूत्र विकार ,  सामान्य और स्त्री रोग सम्बन्धी बीमारियां हो सकतीं हैं | चहरे की चमक फीका पद सकता है , शारीरिक दुर्बलता , अचानक वजन काम होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकतीं हैं | उपाय :- भगवान विष्णु की आराधना करें |     गाय को केला खिलाएं | केशर का तिलक लगाएं |
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जानिये क्या हैं ज्योतिष शास्त्र ??

नमस्कार, जय माता जी

मैं आपके सामने अपने गुरुओ की कृपा से वैदिक ज्योतिष पर थोड़ी चर्चा करना चाहूँगा |

कई आदरणीय ज्योतिष शास्त्री फलादेश करके ज्योतिष शास्त्र का प्रचार प्रसार कर रहे है मुझे भी इस पवित्र और विशाल शास्त्र पर गुरु कृपा से थोड़ा प्रकाश डालने का प्रयास करूँगा कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या और इसका उद्भव कब हुआ |

ज्योतिष शास्त्र यह शब्द सामने आते ही हमारे मन मे कई प्रकार की जिज्ञासा स्थान लेने लगती है, जैसे क्या ज्योतिष के माध्यम से भविष्य मे होने वाली घटनाओं का पता चल सकता है? क्या ज्योतिष उपाए द्वारा हम हमारा भाग्य बदल सकते है? वगैरा वगैरा.... इन सभी जिज्ञासाओ को परे करके हमे पहले यह जानना चाहिए कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या? ज्योतिष एक वेदांग है अर्थात वैदो का अंग है |

ज्योतिष के बारे मे यजुर्वेद मे एक श्लोक आता है "यथा शिखा मयूराणा, नागानां मणियों यथा| तद्वद्वेंदांग स्त्राणां ज्योतिषं मूर्धानि स्थितम् ||" अर्थात जैसे मोरों मे शिखा है, नागों मे मणि इसी प्रकार वेदांग शास्त्रों मे ज्योतिष चोटी पर है |

वेद हमारी प्राचीन धरोहर है | वैदों मे सम्पूर्ण ज्ञान का सार समाया हुआ है | ज्योतिष भी वैदों की ही एक शाखा है, वैदों का ही अंग है इसे वैदों के नेत्र माना जाता है | वैदो का उद्भव कब हुआ पता लगाना असंभव है और ज्योतिष इसका अंग है इसलिए ज्योतिष शास्त्र का उद्भव कब हुआ यह पता लगाना लगभग असंभव है, परंतु हमारे पौराणिक काल में ऋषियों ने अथक प्रयास और तपस्या के द्वारा यह अनमोल शास्त्र हम तक काफी हद तक विकसित होके पहुंचा है | आइए अब हम ज्योतिष शास्त्र को परिभाषित करते है |

पुराणों मे ज्योतिष के बारे मे कहा गया है "सूर्यादी ज्योतिषां ग्रहणां बोधक शास्त्रम" अर्थात वह ज्ञान जो ग्रहो की स्थिति एवं उनके भ्रमण और काल एवं उनका हम सब पर पड़ने वाले प्रभाव को बताता है | उसे ज्योतिष शास्त्र केहते हैं |

यह तो हुई ज्योतिष की परिभाषा हमारी सीधी भाषा मे अब यह जानते है कि ज्योतिष किस आधार पर कार्य करता है इसकी तार्किकता क्या है | प्रत्येक मनुष्‍य अपने कर्मो के अधीन रहता है |

उसे कर्म अवश्य करना पड़ता है और यही जीवन है | अब प्रत्येक कर्म का प्रतिफल होता है | यह सर्वभोमिक सिद्धांत है |वैदिक विचारधारा कर्म और उसका प्रतिफल एक साथ काम नहीं करते जैसे कि हम स्थूल रूप से देखते है | किसी भी कर्म का प्रतिफल सोया रेह सकता है और बाद मे कभी भी उभर के सामने आ सकता है, यह एक सुविचारित तथ्य है | कर्म और कर्म फल का यही लचीला सिद्धांत ही ज्योतिष का सार है |

ज्योतिष शास्त्र मे कर्म बहुत महेत्व रखते है |

क्योंकि पिछले जन्मों मे किए गए कर्म और उनके प्रतिफल के आधार पर ही इस जन्म मे प्रारब्ध बनता है जो ज्योतिष शास्त्र द्वारा प्रकाशमान होता है | इसीलिए इसे वेदांग केहते है | सीधे तौर पर कहे तो हमारे द्वारा किए गए कर्मो के प्रतिफल को जानने मे जो शास्त्र हमारी मदद करता है वह ज्योतिष शास्त्र है | ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विषय है जिसे जानना बहुत कठिन है |

और अगर इस पर चर्चा की जाए तो जितना समय लिया जाए सब कम है इसीलिए तो इसे सामुद्रिक शास्त्र भी कहा गया है क्योंकि यह समुद्र के जैसे गहरा है | पौराणिक काल मे कई ऋषियों ने अपने अथक प्रयास और सहयोग से वैदों के साथ ही ज्योतिष का भी विकास और प्रचार किया हैं जिससे यह शास्त्र हम तक पहुँचा है |

मैंने भी ऋषि समान मेरे गुरुओ के अथक प्रयासों से यह ज्ञान प्राप्त किया और इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने का प्रयास किया है | आशा करता हूँ आपको मेरा यह प्रयास पसंद आया होगा और ज्योतिष शास्त्र अखिरकार क्या है उस पर थोड़ा बोध हुआ होगा | मेरा लेख पड़ने के लिए


सचिन कुमार हलवदिया 🙏

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