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जानिये क्या हैं ज्योतिष शास्त्र ??

नमस्कार, जय माता जी

मैं आपके सामने अपने गुरुओ की कृपा से वैदिक ज्योतिष पर थोड़ी चर्चा करना चाहूँगा |

कई आदरणीय ज्योतिष शास्त्री फलादेश करके ज्योतिष शास्त्र का प्रचार प्रसार कर रहे है मुझे भी इस पवित्र और विशाल शास्त्र पर गुरु कृपा से थोड़ा प्रकाश डालने का प्रयास करूँगा कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या और इसका उद्भव कब हुआ |

ज्योतिष शास्त्र यह शब्द सामने आते ही हमारे मन मे कई प्रकार की जिज्ञासा स्थान लेने लगती है, जैसे क्या ज्योतिष के माध्यम से भविष्य मे होने वाली घटनाओं का पता चल सकता है? क्या ज्योतिष उपाए द्वारा हम हमारा भाग्य बदल सकते है? वगैरा वगैरा.... इन सभी जिज्ञासाओ को परे करके हमे पहले यह जानना चाहिए कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या? ज्योतिष एक वेदांग है अर्थात वैदो का अंग है |

ज्योतिष के बारे मे यजुर्वेद मे एक श्लोक आता है "यथा शिखा मयूराणा, नागानां मणियों यथा| तद्वद्वेंदांग स्त्राणां ज्योतिषं मूर्धानि स्थितम् ||" अर्थात जैसे मोरों मे शिखा है, नागों मे मणि इसी प्रकार वेदांग शास्त्रों मे ज्योतिष चोटी पर है |

वेद हमारी प्राचीन धरोहर है | वैदों मे सम्पूर्ण ज्ञान का सार समाया हुआ है | ज्योतिष भी वैदों की ही एक शाखा है, वैदों का ही अंग है इसे वैदों के नेत्र माना जाता है | वैदो का उद्भव कब हुआ पता लगाना असंभव है और ज्योतिष इसका अंग है इसलिए ज्योतिष शास्त्र का उद्भव कब हुआ यह पता लगाना लगभग असंभव है, परंतु हमारे पौराणिक काल में ऋषियों ने अथक प्रयास और तपस्या के द्वारा यह अनमोल शास्त्र हम तक काफी हद तक विकसित होके पहुंचा है | आइए अब हम ज्योतिष शास्त्र को परिभाषित करते है |

पुराणों मे ज्योतिष के बारे मे कहा गया है "सूर्यादी ज्योतिषां ग्रहणां बोधक शास्त्रम" अर्थात वह ज्ञान जो ग्रहो की स्थिति एवं उनके भ्रमण और काल एवं उनका हम सब पर पड़ने वाले प्रभाव को बताता है | उसे ज्योतिष शास्त्र केहते हैं |

यह तो हुई ज्योतिष की परिभाषा हमारी सीधी भाषा मे अब यह जानते है कि ज्योतिष किस आधार पर कार्य करता है इसकी तार्किकता क्या है | प्रत्येक मनुष्‍य अपने कर्मो के अधीन रहता है |

उसे कर्म अवश्य करना पड़ता है और यही जीवन है | अब प्रत्येक कर्म का प्रतिफल होता है | यह सर्वभोमिक सिद्धांत है |वैदिक विचारधारा कर्म और उसका प्रतिफल एक साथ काम नहीं करते जैसे कि हम स्थूल रूप से देखते है | किसी भी कर्म का प्रतिफल सोया रेह सकता है और बाद मे कभी भी उभर के सामने आ सकता है, यह एक सुविचारित तथ्य है | कर्म और कर्म फल का यही लचीला सिद्धांत ही ज्योतिष का सार है |

ज्योतिष शास्त्र मे कर्म बहुत महेत्व रखते है |

क्योंकि पिछले जन्मों मे किए गए कर्म और उनके प्रतिफल के आधार पर ही इस जन्म मे प्रारब्ध बनता है जो ज्योतिष शास्त्र द्वारा प्रकाशमान होता है | इसीलिए इसे वेदांग केहते है | सीधे तौर पर कहे तो हमारे द्वारा किए गए कर्मो के प्रतिफल को जानने मे जो शास्त्र हमारी मदद करता है वह ज्योतिष शास्त्र है | ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विषय है जिसे जानना बहुत कठिन है |

और अगर इस पर चर्चा की जाए तो जितना समय लिया जाए सब कम है इसीलिए तो इसे सामुद्रिक शास्त्र भी कहा गया है क्योंकि यह समुद्र के जैसे गहरा है | पौराणिक काल मे कई ऋषियों ने अपने अथक प्रयास और सहयोग से वैदों के साथ ही ज्योतिष का भी विकास और प्रचार किया हैं जिससे यह शास्त्र हम तक पहुँचा है |

मैंने भी ऋषि समान मेरे गुरुओ के अथक प्रयासों से यह ज्ञान प्राप्त किया और इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने का प्रयास किया है | आशा करता हूँ आपको मेरा यह प्रयास पसंद आया होगा और ज्योतिष शास्त्र अखिरकार क्या है उस पर थोड़ा बोध हुआ होगा | मेरा लेख पड़ने के लिए

धन्यवाद

सचिन कुमार हलवदिया 🙏

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जानिए प्रकृति कैसे देती है आने वाली घटनाओं का संकेत !!

पौराणिक कथाओं में ऐसी कई शुभ व अशुभ घटनाओ के बारे में वर्णन मिलता है कि प्रकृति हमारे जीवन मे हीने वाली शुभ व अशुभ घटनाओ के संकेत देती है, हमे इन संकेतों की जानकारी न होने के कारण हम उन पर ध्यान नही देते। जबकि प्रत्येक होने वाली घटना के संकेत प्रकर्ति हमे दे देती है।

आज हम आपको कुछ संकेतो के बारे में जानकारी देंगे। पशु, पक्षी,शरीर के अंग हमे संकेत देते रहते है, जैसे पृथ्वी पर जब भी प्रलय, तूफान भूचाल होने वाली होती है तो जानवर परेशान हो जाते है।

पक्षी अपने छिपने की जगह ढूंढने लग जाते है, कुत्ते जोर जोर से भोकने लगते है, ऐसी घटनायें हमे आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के संकेत देती है।

जैसे अंगों का फड़कना :- पुरुष की दायीं आंख फड़कना अच्छा व बाई आँख फड़कना बुरा मन जाता है, उसी प्रकार स्त्रियों की बाईं आंख फड़कना अच्छा व दाहिनी आंख फड़कना बुरा मन जाता है।

शकुन शास्त्र के अनुसार यदि आप नए घर मे प्रवेश कर रहे है तो घर के मालिक को नए घर मे छिपकली मरी हुई या मिट्टी लगी हुई मिल जाये तो उसमें निवास करने वाले लोगों को बिमारिओ का सामना करना पड़ता है।

यदि आपकी छत पर कोये झगड़ते हुए दिख जाए तो समझ ले कि कोई विपति आपके घर आने वाली है

यदि कोये मुह में रोटी य मास का टुकड़ा ले जाते हुए दिख जाए तो समझ ले कि आपकी इच्छा पूरी हीने वाली है। यदि कोया सुबह आपके पैर को स्पर्श कर उड़ जाए तो यह शुभ होता है।

कुत्ते वफादार होते है इनकी छटी इंद्री अधिक विकसित होती है |

उसे आने वाली घटनाओं का पूर्व में पता लग जाता है, जब कुत्ता रोता है तो शुभ नही होता।

यदि कुत्ता आसमान की और मुह करके बैठा है तो समझ ले कि पानी की कमी रहेगी। यदि कुत्ता जमीन पर उल्टा लोटता हुआ दिखाई दे तो जिस कार्य के लिए आप जा रहे है वह कार्य नही होगा। यदि कुत्ता आपकी चप्पल लेकर भाग जाता है तो मानलीजिए आपका आर्थिक नुकसान होने वाला है |

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा, ग्वालियर 


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Do you know why divorce takes place in life ??

Divorce/separation  - Divorce in Kundli

Why divorce takes place in life ???

Today divorce and separation is very common in the fast moving life.I have seen many couples get married after long courtship but after sometime they take the decision to get separated/divorce.

If the divorce is mutual so none of them go through legal harassment.

If that is not so,it can create complications of various way.

There can be several reason for divorce or separation will only discuss Astrology divorce indicators.
But I want to suggest you that proper Horoscope matching can reduce the chances of marital discord.

But Ashatkoota Guna matching is not the proper way of doing a kundli Matching. Proper marriage matching is very effective to avoid divorce or separation even after malefic influence in chart. Astrology gives very clear indications of divorce ie; sun, mars ,rahu ,saturn are separative planet there aspect or association with 7th h or 7th lord,conjunction of 6th , 8th, 12th house or there lord lead the native to divorce.

Planetary combination of divorce : If 7th lord is hemmed between malefics or positioned in 6th, 8th or 12th house. 

If malefic sun,mars,saturn or rahu posited in 7th house or lagna, lord of 7th house is debilitated or cumbust ,7th house and karka of marriage are afflicted. 

Jupiter and venus being debilitated ,hemmed between malifics or positioned in malefic navmansha. 

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Rahu:The Demon with a Difference (Part-1)

Part -1 I am not a professional astrologer, but I was going through Rahu MD and I researched vigorously about rahu. I have concluded that Rahu actually works like Saturn but there's a difference. Rahu is basically a demon whereas Saturn is a deity, hence they work accordingly. When Rahu is positive he bestows the native with "immeasurable" success or wealth almost blinding him/her with the "High of Success" on the other hand Saturn when positive makes the native work really hard. Similarly, while punishing the native Saturn doesn't go beyond the endurance of the native but Rahu doesn't care about the endurance, he keeps on delivering blows one after another. According to some experts Rahu acts as a subordinate to Saturn co ruling Capricorn. They both act as a team- Rahu during its dasha, blinds a native with power of wealth or success and he/she usually looks down upon others. If negative, Rahu keeps on obstructing the path of the native hence tempting him/her to take a "shortcut". Both ways Rahu actually makes the native to accumulate a huge karmic debt which is taken care by Saturn later. Even then we all need to understand that Rahu is actually delivering our past karma and making us bound to the materialistic world by entangling us into Maya. We should try to understand it's nature and make the most of the Rahu MD or AD. The positive side of Rahu is that he will continuously throw the native into deep waters and the native is forced to seek help from his near and dear ones. That's where the native will realise who is a "friend in need". Rahu tores off the "mask" on the faces surrounding you. Being the son of Maya and a Mayavi himself he can see across the illusion/mask of fake friendship, love or care. Usually people going through Rahu MD feel lonely, this is a big reason, because Rahu narrows your circle. Rahu MD prepares the native for life. Rest in next part If you are interested in writing articles related to astrology then do register at - https://astrolok.in/my-profile/register/ or  contact at astrolok.vedic@gmail.com
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Who am I ? Kaun hoon Main ? Self Realization ! Know Yourself

ATMASHATKAM is a composition consisting of 6 fold śloka (and hence the name Ṣaṭ-ka to mean six-fold) written by the Hindu philosopher Adi Shankara summarizing the basic teachings of Advaita Vedanta, or the Hindu teachings of non-dualism and the knowledge of the true identity of the self.

Here below its meaning in simple English words is given for easy understanding the concept on non-duality and to realize the God and the Shiva within one own self.

I am neither the mind, the intellect, nor the silent voice within; Neither the eyes, the ears, the nose, nor the mouth. I am not water, fire, earth, nor ether I am Consciousness and Bliss. I am Shiva! I am Shiva! I am not the life-force nor the vital airs; Not the seven components nor the five sheaths. I am not the tongue, hands, feet, nor organ of procreation I am Consciousness and Bliss. I am Shiva! I am Shiva! Neither attachment nor aversion can touch me; Neither greed, delusion, pride, nor jealousy is mine at all. I am not a duty, nor wealth, nor happiness I am Consciousness and Bliss.

I am Shiva! I am Shiva! I am not virtue nor vice; not pain nor pleasure; I am neither temple nor holy word; not sacred fire nor the Vedas I am Consciousness and Bliss.

I am Shiva! I am Shiva! I have neither death, nor doubt, nor class distinction; Neither father nor mother, nor any birth at all. I am not the brother, the friend, the Master, nor the disciple I am Consciousness and Bliss.

I am Shiva! I am Shiva! I am not detachment nor salvation, nor anything reached by the senses; I am beyond all thought and form. I am everywhere, and nowhere at all I am Consciousness and Bliss. I am Shiva! I am Shiva!

If you want more specific analysis and prediction of your birth chart , your name and your palm , then full analysis of your whole chart need to be done before giving any kind of prediction or reaching to any conclusions and hence suggesting solutions to your existing problems .

OM

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जानिए ज्योतिष दृष्टिकोण से सफल होने के लिए श्री हनुमान जी की साधना क्यों जरुरी हैं ?

जानिए ज्योतिष दृष्टिकोण से सफल होने के लिए श्री हनुमान जी की साधना क्यों जरुरी हैं ? नोट:- हनुमान जी की पूजा आराधना व हनुमान चालीसा करने से आकस्मिक आपदाये , प्रॉपर्टी में रुकावट, गुप्त शत्रुओ पर विजय मिलती हैं. आकस्मिक  दुर्घटनाये व टोना टोटका व भुत प्रेत की बाधा हटती हैं.कोर्ट कचहरी में जीत  होती हैं.घर व जीवन में  नकारात्मक ऊर्जा घटती हैं व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती हैं. ज्योतिष विज्ञानं के अनुसार मेष व वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह जिसके अधिष्ठाता स्वयं हनुमान जी हैं . मेष राशि :- पहले भाव का प्रतिनिधत्व करती हैं जिसमे आपकी आत्मा, आत्म-शक्ति, स्वास्थ, शारीरिक बनावट, बालो का रंग, कलर , व्यक्तित्व,  मानसिक शांति, कद  मानसिक स्थिति,  निर्णय लेने की क्षमता,  दूरददर्शिता,  मन का झुकाव, बल, धीरज, हौसला, नेतृत्व, प्रतिरोध शक्ति, स्वास्थ्य, रुप-रंग तथा व्यक्तित्व सामान्य रुप से देखा जाता है. वृश्चिक राशि :- अष्टम भाव का प्रतिनिधत्व करती हैं जिसमे  गुप्त शत्रुओं, साजिश, छुपी योजनाएं, प्यार के छुपे मामले, दुर्घटना, आँपरेशन, गर्भपात, शरीर के हिस्से बेकार हो जाना, अपयश, नैतिक पतन, अचानक होने वाली हानि व लाभ, शेयर बाजार, रेस से आय की प्राप्ति होती है. श्री हनुमान जी को प्रसन करने के सरल उपाय :- १)  हनुमान चालीसा का  पाठ नियमित करे. २)  हर मंगलवार चमेली के तेल का दिया हनुमान जी के मंदिर में लगाए. ३)  गाय को गुड़ व रोटी दे. ४)  ॐ  हनु हनुमंतये  नमः  की  माला  करे. Guruwani (Astrologer & Consultant) 98267-36794 Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at https://astrolok.in/my-profile/register/
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