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Daily Panchang for 12th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 12 सितम्बर 2019
⛅ दिन - गुरुवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - चतुर्दशी पूर्ण रात्रि तक
⛅ नक्षत्र - धनिष्ठा शाम 04:59 तक तत्पश्चात शतभिषा
⛅ योग - सुकर्मा शाम 07:35 तक तत्पश्चात धृति
⛅ राहुकाल - दोपहर 01:55 से शाम 03:27 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:25
⛅ सूर्यास्त - 18:43 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ *व्रत पर्व विवरण - अनंत चतुर्दशी, गणेश महोत्सव समाप्त, चतुर्दशी वृद्धि तिथि
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 श्राद्ध पक्ष में अपनाए जाने वाले सभी मुख्य नियम
➡ 13 सितम्बर 2019 शुक्रवार से महालय श्राद्ध आरम्भ ।
👉🏻 1) श्राद्ध के दिन भगवदगीता के सातवें अध्याय का माहात्मय पढ़कर फिर पूरे अध्याय का पाठ करना चाहिए एवं उसका फल मृतक आत्मा को अर्पण करना चाहिए।

👉🏻 2) श्राद्ध के आरम्भ और अंत में तीन बार निम्न मंत्र का जप करें l
➡ मंत्र ध्यान से पढ़े :
🌷 ll देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च l
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव भवन्त्युत ll
🙏🏻 (समस्त देवताओं, पितरों, महायोगियों, स्वधा एवं स्वाहा सबको हम नमस्कार करते हैं l ये सब शाश्वत फल प्रदान करने वाले हैं l)


👉🏻 3) “श्राद्ध में एक विशेष मंत्र उच्चारण करने से, पितरों को संतुष्टि होती है और संतुष्ट पितर आप के कुल खानदान को आशीर्वाद देते हैं
➡ मंत्र ध्यान से पढ़े :
🌷 ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा|

👉🏻 4) जिसका कोई पुत्र न हो, उसका श्राद्ध उसके दौहिक (पुत्री के पुत्र) कर सकते हैं l कोई भी न हो तो पत्नी ही अपने पति का बिना मंत्रोच्चारण के श्राद्ध कर सकती है l

👉🏻 5) पूजा के समय गंध रहित धूप प्रयोग करें  और बिल्व फल प्रयोग न करें और केवल घी का धुआं भी न करें|
🙏🏻 श्राद्ध महिमा पुस्तक से 
          🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 श्राद्ध में पालने योग्य नियम 🌷
🙏🏻 श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरों की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे 'श्राद्ध' कहते हैं।

🙏🏻 हमारे जिन संबंधियों का देहावसान हो गया है, जिनको दूसरा शरीर नहीं मिला है वे पितृलोक में अथवा इधर-उधर विचरण करते हैं, उनके लिए पिण्डदान किया जाता है।
बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिण्डदान नहीं किया जाता।


🙏🏻 विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही संयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दे। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।

🙏🏻 भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर, भोजनकर्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए। पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुर वाणी से कहना चाहिए कि 'हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें।'

🙏🏻 श्रद्धायुक्त व्यक्तियों द्वारा नाम और गोत्र का उच्चारण करके दिया हुआ अन्न पितृगण को वे जैसे आहार के योग्य होते हैं वैसा ही होकर मिलता है। (विष्णु पुराणः 3.16,16)

🙏🏻 श्राद्धकाल में शरीर, द्रव्य, स्त्री, भूमि, मन, मंत्र और ब्राह्मण-ये सात चीजें विशेष शुद्ध होनी चाहिए।

🙏🏻 श्राद्ध में तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिएः शुद्धि, अक्रोध और अत्वरा (जल्दबाजी नही करना)।
श्राद्ध में मंत्र का बड़ा महत्त्व है। श्राद्ध में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, लेकिन आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम अस्त-व्यस्त हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।
जिनकी देहावसना-तिथि का पता नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए।

🙏🏻 हिन्दुओं में जब पत्नी संसार से जाती है तो पति को हाथ जोड़कर कहती हैः 'मुझसे कुछ अपराध हो गया हो तो क्षमा करना और मेरी सदगति के लिए आप प्रार्थना करना।' अगर पति जाता है तो हाथ जोड़ते हुए पत्नी से कहता हैः 'जाने-अनजाने में तेरे साथ मैंने कभी कठोर व्यवहार किया हो तो तू मुझे क्षमा कर देना और मेरी सदगति के लिए प्रार्थना करना।'

🙏🏻 हम एक दूसरे की सदगति के लिए जीते जी भी सोचते हैं, मरते समय भी सोचते हैं और मरने के बाद भी सोचते हैं।
🙏🏻 क्या करें क्या न करें पुस्तक से
         🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 महालय श्राद्ध आरम्भ 🌷
🙏  जो कर्म श्रद्धापूर्वक किया जाय उसे श्राद्ध कहते हैं । श्राद्ध  अवश्य करना चाहिए । 

🙏 भगवान सूर्य कहते हैं : जो व्यक्ति श्राद्ध नहीं करता, उसकी पूजा न तो मैं, न तो कोई देवता ग्रहण करते हैं । श्राद्ध न करनेवाला घोर तामिस्त्र नरक पाता है और अंत में सुकर योनि में उत्पन्न होता है । 

🙏 देवताओं को अन्न का भाग देने के लिए मंत्र के पीछे "स्वाहा" शब्द का और पितरों को भाग देने के लिए श्राद्ध में 3 बार "स्वधा"शब्द का उच्चारण करना चाहिए ।
🌷 श्राद्ध में 3 वस्तुएँ पवित्र मानी गई हैं :
1⃣ तिल
2⃣ दौहित्र (पुत्री का पुत्र)
3⃣ कुतप (दिन के आठवे प्रहर में जब सूर्य का ताप घटने लगता है, उस समय को कुतप कहते हैं) । उसमें पितरों को दिया हुआ दान अक्षय होता है ।  

🙏 गाय का दही, दूध, घी व शक्कर आदि से युक्त अन्न पितरों के लिए तृप्तिकारक होते हैं । शहद मिलाकार तैयार किया हुआ कोई भी पदार्थ तथा गाय का घी व दूध मिलाकर बनाई हुई खीर भी पितरों को दी जाय तो वह अक्षय होती है ।
🌷 पितरों को क्या प्रिय है और क्या अप्रिय
✅ प्रिय
कुश, उड़द, साठी चावल, जौ, गन्ना, मूंग, सफ़ेद फूल, शहद, गाय का दूध एवं घी ये वस्तुएँ पितरों को सदा प्रिय हैं अतः श्राद्ध में इनका उपयोग करें ।
❎ अप्रिय
मसूर, मटर, कमल, बिल्व, धतूरा, भेड़-बकरी का दूध इन वस्तुओं का उपयोग श्राद्ध में न करें ।
         🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 श्राद्ध सम्बन्धी बातें 🌷
➡ श्राद्ध कर्म करते समय जो श्राद्ध का भोजन कराया जाता है, तो ११.३६ से १२.२४ तक उत्तम काल होता है l
➡ गया, पुष्कर, प्रयाग और हरिद्वार में श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l
➡ गौशाला में, देवालय में और नदी तट पर श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l
➡ सोना, चांदी, तांबा और कांसे के बर्तन में अथवा पलाश के पत्तल में भोजन करना-कराना अति उत्तम माना गया है l लोहा, मिटटी आदि के बर्तन काम में नहीं लाने चाहिए l
➡ श्राद्ध के समय अक्रोध रहना, जल्दबाजी न करना और बड़े लोगों को या बहुत लोगों को श्राद्ध में सम्मिलित नहीं करना चाहिए, नहीं तो इधर-उधर ध्यान बंट जायेगा, तो जिनके प्रति श्राद्ध सद्भावना और सत उद्देश्य से जो श्राद्ध करना चाहिए, वो फिर दिखावे के उद्देश्य में सामान्य कर्म हो जाता है l
➡ *सफ़ेद सुगन्धित पुष्प श्राद्ध कर्म में काम में लाने चाहिए l लाल, काले फूलों का त्याग करना चाहिए l अति मादक गंध वाले फूल अथवा सुगंध हीन फूल श्राद्ध कर्म में काम में नहीं लाये जाते हैं l

📖आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145*
          🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🙏🏻

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Daily Panchang for 11th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 11 सितम्बर 2019
⛅ दिन - बुधवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - त्रयोदशी 12 सितम्बर प्रातः 05:06 तक तत्पश्चात चतुर्दशी
⛅ नक्षत्र - श्रवण दोपहर 02:00 तक तत्पश्चात धनिष्ठा
⛅ योग - अतिगण्ड शाम 06:38 तक तत्पश्चात सुकर्मा
⛅ राहुकाल - दोपहर 12:23 से दोपहर 01:55 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:25
⛅ सूर्यास्त - 18:44 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ *व्रत पर्व विवरण - 
💥 विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 अनंत चतुर्दशी 🌷

🙏🏻 गुरुवार, 12 सितंबर को दस दिवसीय गणेशोत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन की गई गणेश पूजा से घर में सुख-समृद्धि यानी रिद्धि और सिद्धि का प्रवेश होता है। गणेशजी की कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं। यहां 23 सितंबर के लिए खास उपाय...

🌷 ऐसे करें गणेश पूजा 🌷
 सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद गणेशजी की पूजा करें। पूजा में श्रीगणेश को सिंदूर, चंदन, जनेऊ, दूर्वा, लड्डू या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। धूप व दीप लगाकर आरती करें। पूजन में इस मंत्र का जप करें-

🌷 मंत्र- प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।

🙏🏻 इस मंत्र का अर्थ यह है कि मैं ऐसे देवता का पूजन करता हूं, जिनकी पूजा स्वयं ब्रह्मदेव करते हैं। ऐसे देवता, जो मनोरथ सिद्धि करने वाले हैं, भय दूर करने वाले हैं, शोक का नाश करने वाले हैं, गुणों के नायक हैं, गजमुख हैं, अज्ञान का नाश करने वाले हैं। मैं शिव पुत्र श्री गणेश का सुख-सफलता की कामना से भजन, पूजन और स्मरण करता हूं।

🌷 लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप करें 🌷
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरदे सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।।

 🙏🏻 यदि आप लक्ष्मी कृपा चाहते हैं तो पूजा में इस लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्‌टे की माला का उपयोग करना चाहिए।
💥 ध्यान रखें मंत्र का जप सही उच्चारण के साथ करना चाहिए।

 ➡ यदि आप इस मंत्र का जप नहीं कर पा रहे हैं तो इन सरल मंत्रों का जप कर सकते हैं।
🌷 श्रीगणेश मंत्र- ॐ महोदराय नम:। ॐ विनायकाय नम:।
🌷 महालक्ष्मी मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै नम:। ॐ दिव्याये नम:
         🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 अनंत चतुर्दशी 🌷
➡ 12 सितम्बर 2019 गुरुवार को अंनत चतुर्दशी है ।
🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्र बांधा जाता है।

🙏🏻 कहा जाता है कि जब पाण्डव जुएं में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्तचतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनन्तसूत्रधारण किया। अनन्तचतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए।

🙏🏻 व्रत-विधान-व्रतकर्ता प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करें। शास्त्रों में यद्यपि व्रत का संकल्प एवं पूजन किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर करने का विधान है, तथापि ऐसा संभव न हो सकने की स्थिति में घर में पूजागृह की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित करें। कलश पर शेषनाग की शैय्यापर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति  अथवा चित्र को रखें। उनके समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनन्तसूत्र (डोरा) रखें। इसके बाद “ॐ अनन्तायनम:” मंत्र से भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधिसे पूजा करें। पूजनोपरांत अनन्तसूत्र को मंत्र पढकर पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें-

🌷 अनंन्तसागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजितात्माह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते॥

🙏🏻 अनंतसूत्र बांध लेने के पश्चात किसी ब्राह्मण को नैवेद्य (भोग) में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के बाद व्रत-कथा को पढें या सुनें। कथा का सार-संक्षेप यह है- सत्ययुग में सुमन्तु नाम के एक मुनि थे। उनकी पुत्री शीला अपने नाम के अनुरूप अत्यंत सुशील थी। सुमन्तु मुनि ने उस कन्या का विवाह कौण्डिन्यमुनि से किया। कौण्डिन्यमुनि अपनी पत्नी शीला को लेकर जब ससुराल से घर वापस लौट रहे थे, तब रास्ते में नदी के किनारे कुछ स्त्रियां अनन्त भगवान की पूजा करते दिखाई पडीं। शीला ने अनन्त-व्रत का माहात्म्य जानकर उन स्त्रियों के साथ अनंत भगवान का पूजन करके अनन्तसूत्र बांध लिया। इसके फलस्वरूप थोडे ही दिनों में उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया।

🌷 कथा 
🙏🏻 एक दिन कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के बाएं हाथ में बंधे अनन्तसूत्र पर पडी, जिसे देखकर वह भ्रमित हो गए और उन्होंने पूछा-क्या तुमने मुझे वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है? शीला ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया-जी नहीं, यह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है। परंतु ऐश्वर्य के मद में अंधे हो चुके कौण्डिन्यने अपनी पत्नी की सही बात को भी गलत समझा और अनन्तसूत्रको जादू-मंतर वाला वशीकरण करने का डोरा समझकर तोड दिया तथा उसे आग में डालकर जला दिया। इस जघन्य कर्म का परिणाम भी शीघ्र ही सामने आ गया। उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। दीन-हीन स्थिति में जीवन-यापन करने में विवश हो जाने पर कौण्डिन्यऋषि ने अपने अपराध का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। वे अनन्त भगवान से क्षमा मांगने हेतु वन में चले गए। उन्हें रास्ते में जो मिलता वे उससे अनन्तदेवका पता पूछते जाते थे। बहुत खोजने पर भी कौण्डिन्यमुनि को जब अनन्त भगवान का साक्षात्कार नहीं हुआ, तब वे निराश होकर प्राण त्यागने को उद्यत हुए। तभी एक वृद्ध ब्राह्मण ने आकर उन्हें आत्महत्या करने से रोक दिया और एक गुफामें ले जाकर चतुर्भुज अनन्तदेव का दर्शन कराया।

🙏🏻 भगवान ने मुनि से कहा-तुमने जो अनन्तसूत्र का तिरस्कार किया है, यह सब उसी का फल है। इसके प्रायश्चित हेतु तुम चौदह वर्ष तक निरंतर अनन्त-व्रत का पालन करो। इस व्रत का अनुष्ठान पूरा हो जाने पर तुम्हारी नष्ट हुई सम्पत्ति तुम्हें पुन:प्राप्त हो जाएगी और तुम पूर्ववत् सुखी-समृद्ध हो जाओगे। कौण्डिन्यमुनि ने इस आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया। भगवान ने आगे कहा-जीव अपने पूर्ववत् दुष्कर्मो का फल ही दुर्गति के रूप में भोगता है।मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पातकों के कारण अनेक कष्ट पाता है। अनन्त-व्रत के सविधि पालन से पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन करके खोई हुई समृद्धि को पुन:प्राप्त कर लिया।

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏
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Daily Panchang for 10th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 10 सितम्बर 2019
⛅ दिन - मंगलवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - द्वादशी 11 सितम्बर रात्रि 02:42 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
⛅ नक्षत्र - उत्तराषाढा सुबह 11:10 तक तत्पश्चात श्रवण
⛅ योग - शोभन शाम 05:47 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
⛅ राहुकाल - शाम 03:28 से शाम 05:00 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:25
⛅ सूर्यास्त - 18:45 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - वामन जयंती
💥 विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 दुकान में बरकत ना हो तो 🌷
👉🏻 दुकान में अपनी जिनकी, जिनका अपना कारोबार है, अपना कुछ काम धंधा करते हैं और दुकान-धंधे में बरकत नहीं तो क्या करें  ? सुबह घर से  पूर्ब दिशा की ओर मुँह करके तिलक करके जायें | दुकान में जाके थोडा सा कपूर जला ले, गुरुदेव और गणपतिजी की तस्वीर रखें और गणेश गायत्री मंत्र बोलें -
🌷 एकदंताय विद्यमहे वक्रतुंडाय धीमहि | तन्नोदंती प्रच्चोदयात ||
🙏🏻 ये गणेश गायत्री मंत्र पांच बार, ग्यारह बार बोल ले अपने आप सही होने लगेगा |
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 ज्योतिष शास्त्र 🌷
🙏🏻 12 सितंबर, गुरुवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है व घरों व सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन विसर्जन से पहले नीचे बताए गए छोटे-छोटे उपाय किए जाएं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

➡ पैसा नौकरी बिजनेस हर समस्या का हल है ये उपाय
👉🏻 भगवान श्री गणेश को पूजा में रेशमी दुपटटा चढ़ाएं। दाम्पत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा।

👉🏻 भगवान श्री गणेश को पांच तरह के लड्डुओं का भोग लगाएं। भौतिक सुख-सुविधाएं मिलेंगी।

👉🏻 श्री गणेश का अभिषेक गाय के कच्चे दूध  (बिना उबला) से करें। धन की कमी पूरी होगी।

👉🏻 स्फटिक से  बनी श्री गणेश की मूर्तियाँ भक्तों को बांटें। समाज में मान-सम्मान मिलेगा।

👉🏻 श्री गणेश को ताजी, हरी दूर्वा चढ़ाएं। मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होगी।

👉🏻 श्री गणेश को सिंदूर चढ़ाएं। ऑफिस और परिवार में चल रही समस्याएं समाप्त होंगी।

👉🏻 आम के पत्तों से भगवान श्री गणेश की पूजा करें। सभी तरह के  रोग ठीक होने लगेंगे।

👉🏻 भगवान श्री गणेश को गुड, चीनी और दही का भोग लगाएं। आने वाले संकटों से बचेंगे।

👉🏻 भगवान श्री गणेश का पंचामृत से अभिषेक करें। पैसों से संबंधित फायदा होने के योग बन सकते हैं।

👉🏻 तांबे के सिक्के को काले धागे में बांधकर श्री गणेश को चढ़ाएं। धन लाभ होगा।

👉🏻 भगवान श्री गणेश को गुलाब के 21 फूल चढ़ाएं। संतान संबंधी समस्या का निदान होगा।

👉🏻 पीले रेशमी कपड़ा भगवान श्री गणेश को अर्पित करें। नौकरी व व्यापार में लाभ होगा।

आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145*
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Daily Panchang for 09 September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 09 सितम्बर 2019
⛅ दिन - सोमवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - एकादशी रात्रि 12:31 तक तत्पश्चात द्वादशी
⛅ नक्षत्र - पूर्वाषाढा सुबह 08:37 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा
⛅ योग - सौभाग्य शाम 05:08 तक तत्पश्चात शोभन
⛅ राहुकाल - सुबह 07:47 से सुबह 09:20 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:24
⛅ सूर्यास्त - 18:48 
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - पद्मा-परिवर्तनी एकादशी
💥 विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।
💥 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
💥 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
💥 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
💥 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 वामन द्वादशी 🌷
🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती कहते हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान वामन का प्राकट्य हुआ था। इस बार वामन द्वादशी 10 सितंबर, मंगलवार को है। धर्म ग्रंथों में वामन को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। वामन द्वादशी का व्रत इस प्रकार करें-

 🌷 व्रत व पूजा विधि 🌷
वैष्णव भक्तों को इस दिन उपवास करना चाहिए। सुबह स्नान आदि करने के बाद वामन द्वादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दोपहर (अभिजित मुहूर्त) में भगवान वामन की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद एक बर्तन में चावल, दही और शक्कर रखकर किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए।
शाम के समय व्रती (व्रत करने वाला) को फिर से स्नान करने के बाद भगवान वामन का पूजन करना चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए और स्वयं फलाहार करना चाहिए। इस तरह व्रत व पूजन करने से भगवान वामन प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

🌷 वामन जयंती की प्रामाणिक कथा 🌷
🙏🏻 एक बार दैत्यराज बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग  पर अधिकार कर लिया। पराजित इंद्र की दयनीय स्थिति को देखकर उनकी मां अदिति बहुत दुखी हुईं। उन्होंने अपने पुत्र के उद्धार के लिए विष्णु की आराधना की।

🙏🏻 इससे प्रसन्न होकर विष्णु प्रकट होकर बोले- देवी! चिंता मत करो। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य  दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे।

🙏🏻 एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करा रहा है। यह जानकर वामन वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा।

🙏🏻 इस पर वामन चुप रहे। लेकिन जब बलि उनके पीछे पड़ गया तो उन्होंने अपने कदमों के बराबर तीन पग भूमि भेंट में मांगी। बलि ने उनसे और अधिक मांगने का आग्रह किया, लेकिन वामन अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर बलि ने हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया। संकल्प पूरा होते ही वामन का आकार बढ़ने लगा और वे वामन से विराट हो गए।

🙏🏻 उन्होंने एक पग से पृथ्वी  और दूसरे से स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक  आगे कर दिया। वह बोला- प्रभु, सम्पत्ति का स्वामी सम्पत्ति से बड़ा होता है। तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दें। सब कुछ गंवा चुके बलि को अपने वचन  से न फिरते देख वामन प्रसन्न हो गए। उन्होंने ऐसा ही किया और बाद में उसे पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय  से मुक्ति दिलाई।

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
          🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🙏🏻
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Daily Panchang for 6th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 06 सितम्बर 2019
⛅ दिन - शुक्रवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - अष्टमी रात्रि 08:43 तक तत्पश्चात नवमी
⛅ नक्षत्र - ज्येष्ठा 07 सितम्बर प्रातः 04:59 तक तत्पश्चात मूल
⛅ योग - विष्कम्भ शाम 05:27 तक तत्पश्चात प्रीति
⛅ राहुकाल - सुबह 10:52 से दोपहर 12:25 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:24
⛅ सूर्यास्त - 18:49 
⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - राधाष्टमी, दधीचि ऋषि जयंती, महालक्ष्मी व्रतारम्भ, गौरी पूजन
💥 विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 राधा अष्टमी 🌷
🙏🏻 06 सितम्बर, शुक्रवार को श्रीराधा अष्टमी है। जन्माष्टमी के पूरे 15 दिन बाद ब्रज के रावल गांव में राधा जी का जन्म हुआ । कहते हैं कि जो राधा अष्टमी का व्रत नहीं रखता, उसे जन्माष्टमी व्रत का फल नहीं मिलता। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी व्रत रखा जाता है। पुराणों में राधा-रुक्मिणी को एक ही माना जाता है। जो लोग राधा अष्टमी के दिन राधा जी की उपासना करते हैं, उनका घर धन संपदा से सदा भरा रहता है। राधा अष्टमी के दिन ही महालक्ष्मी व्रत का आरंभ होता है।

➡ पुराणों के अनुसार राधा अष्टमी
🙏🏻 स्कंद पुराण के अनुसार राधा श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। इसी कारण भक्तजन सीधी-साधी भाषा में उन्हें 'राधारमण' कहकर पुकारते हैं।

🙏🏻 पद्म पुराण में 'परमानंद' रस को ही राधा-कृष्ण का युगल-स्वरूप माना गया है। इनकी आराधना के बिना जीव परमानंद का अनुभव नहीं कर सकता।

🙏🏻 भविष्य पुराण और गर्ग संहिता के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन महाराज वृषभानु की पत्नी कीर्ति के यहां भगवती राधा अवतरित हुई। तब से भाद्रपद शुक्ल अष्टमी 'राधाष्टमी' के नाम से विख्यात हो गई।

🙏🏻 नारद पुराण के अनुसार 'राधाष्टमी' का व्रत करनेवाला भक्त ब्रज के दुर्लभ रहस्य को जान लेता है। 

🙏🏻 पद्म पुराण में सत्यतपा मुनि सुभद्रा गोपी प्रसंग में राधा नाम का स्पष्ट उल्लेख है। राधा और कृष्ण को 'युगल सरकार' की संज्ञा तो कई जगह दी गई है।
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🌷 मनोकामनापूर्ति योग 🌷
🙏🏻 देवी भागवत में व्यास भगवान ने बताया है.... भाद्रपद मास, शुक्ल नवमी तिथि हो ..... उस दिन अगर कोई जगदंबाजी का पूजन करता है, तो उसकी मनोकामनायें पूर्ण होती है , और जिंदगी जब तक उसकी रहेगी वो सुखी और संपन्न रहेगा | और वो दिन 07 सितम्बर 2019 शनिवार को है, इस दिन ए मंत्र का जप करें......
🌷 ॐ अम्बिकाय नम :
🌷 ॐ श्रीं नम :
🌷 ॐ ह्रीं नम:
🌷 ॐ पार्वेत्येय नम :
🌷 ॐ गौराये नम :
🌷 ॐ शंकरप्रियाय नम :
🙏🏻 थोड़ी देर तक बैठकर जप करना | और जिसको धन धान्य है, वो माँ से कहना मेरी गुरुचरणों में श्रध्दा बढे, भक्ति बढे (ये भी एक संपत्ति है साधक की) मेरी निष्ठा बढे मेरी उपासना बढे |
🙏🏻 -आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
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Daily Panchang for 5th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 05 सितम्बर 2019
⛅ दिन - गुरुवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - सप्तमी रात्रि 08:49 तक तत्पश्चात अष्टमी
⛅ नक्षत्र - अनुराधा 06 सितम्बर प्रातः 04:10 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा
⛅ योग - वैधृति रात्रि 06:40 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
⛅ राहुकाल - दोपहर 01:58 से शाम 03:31 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:24
⛅ सूर्यास्त - 18:50 
⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - गौरी-आवाहन, शिक्षक दिवस
💥 विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा  शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है तो 🌷
🙏🏻 स्कंदपुराण और दूसरे ग्रंथों में बात आयी है कि जिन लोगों के घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है उनके लिए भाद्र शुक्ल अष्टमी (06 सितम्बर 2019 शुक्रवार) के दिन से लेकर आश्विन कृष्ण अष्टमी (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) माने 22 सितम्बर 2019 रविवार तक महालक्ष्मी माता का पूजन विधान स्कंदपुराण, आदि ग्रंथो में बताया गया है और इस सरल विधान के अनुसार 17 दिनों में - 06 सितम्बर से 22 सितम्बर तक नित्य प्रात: लक्ष्मी माता का सुमिरन करते हुए – ॐ लक्ष्‍मयै नम: ॐ लक्ष्‍मयै नम: ॐ लक्ष्‍मयै नम: मंत्र का 16 बार प्रति दिन जप करें और फिर लक्ष्मीमाता का पूजन करते हुए एक श्लोक पाठ करें  । इससे समय, शक्ति खर्च नहीं होगी उल्टा  पुण्य भी  बढ़ेगा | श्लोक इस प्रकार है-
🌷 धनं धान्यं धराम हरम्यम, कीर्तिम आयुर्यश: श्रीयं,
दुर्गां दंतीन: पुत्रां, महालक्ष्मी प्रयच्‍छ मे '
 "ॐ श्री महालक्ष्मये नमः" "ॐ श्री महालक्ष्मये नमः"

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🌷 लक्ष्मी प्रप्ति व्रत 🌷
🙏🏻 भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से आश्विन कृष्ण अष्टमी तक घर में अगर कोई महालक्ष्मी माता का पूजन करे और रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे तो उस के घर में लक्ष्मी बढती जाती है…
➡ इस वर्ष ये योग 06 सितम्बर 2019 शुक्रवार से 22 सितम्बर 2019 रविवार तक है…
🙏🏻 1) महालक्ष्मी का पूजन करें .
🌙 2)रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देना कच्चे दूध(थोडासा) से फिर पानी से.. .
🙏🏻 3)महालक्ष्मी का मन्त्र जप करना.
🌷 ॐ श्रीं नमः
🌷 ॐ विष्णु प्रियाय नमः
🌷 ॐ महा लक्ष्मै नमः
➡ इन में से कोई भी एक जप करे..


📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
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