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Daily Panchang for 19th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 19 सितम्बर 2019
⛅ दिन - गुरुवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ *मास - अश्विन  *
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - पंचमी शाम 07:26 तक तत्पश्चात षष्ठी
⛅ नक्षत्र - भरणी सुबह 08:46 तक तत्पश्चात कृत्तिका
⛅ योग - हर्षण रात्रि 11:28 तक तत्पश्चात वज्र
⛅ राहुकाल - दोपहर 01:51 से शाम 03:22 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:27
⛅ सूर्यास्त - 18:37 
⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - पंचमी का श्राद्ध, कृत्तिका श्राद्ध
💥 विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 पितृ पक्ष 🌷
🙏🏻 अभी पितृ पक्ष चल रहा है |  अपने घर के लोग जो गुजर गये हैं | उनकी आत्मा को शांति देने के लिए इतना जरूर करें कि अब सर्व पितृ अमावस्या आयेगी, (28 सितम्बर 2019 शनिवार को ) उस दिन गीता का 7 अध्याय पाठ करें, सूर्य भगवान के सामने जल और अन्न ले जाकर प्रार्थना करें कि: "हे सूर्यदेव, यमराज आप के पुत्र हैं, हमारे घर के जो भी गुजर गये उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, आज के गीता के पाठ का पुण्य उनके लिए दीजीये" पितृ गण राजी होंगे, घर में अच्छी संतान जन्म लेगी यह सर्व पितृ अमावस्या के दिन जरूर करें।
*
          🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 अश्विन  माह 🌷
🙏🏻 अश्विन  हिन्दू धर्म का सप्तम महिना है। अश्विन नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम अश्विन  पड़ा (अश्विनीनक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र मासे सः)। आश्विन मास का संबंध अश्विनौ से है जो सूर्य के दो पुत्र हैं और देवताओं के चिकित्सक हैं। इस मास का एक नाम क्वार भी है। (उत्तर भारत हिन्दू पंचांग के अनुसार) से अश्विन  का आरम्भ हो चुका  है। (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अभी भाद्रपद मास चल रहा है) ।

🙏🏻 महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “तथैवाश्वयुजं मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। प्रज्ञावान्वाहनाढ्यश्च बहुपुत्रश्च जायते।।” जो अश्विन मास को एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकार के वाहनों से सम्पन्न तथा अनेक पुत्रों से युक्त होता है ।
🌷 आश्विने भौमावास्याम जायते खलु पार्वती। विविध विपदाम धनक्षयं पापाचारम वर्धते।।


🙏🏻 महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार जो अश्विन  मास में ब्राह्माणों को घृत दान करता है, उस पर दैव वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे रूप प्रदान करते हैं ।

🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार अश्विन  में धान्य दान करने से अन्न तथा धन की वृद्धि होती है।

🙏🏻 अग्निपुराण के अनुसार अश्विन  के महिने में गोरस- गाय का घी, दूध और दही तथा अन्न देनेवाला सब रोगों से छुटकारा पा जाता है |
🌷 आश्विने कृष्णपक्षे तु षष्ठ्यां भौमेऽथ रोहिणी । व्यतीपातस्तदा षष्ठी कपिलानन्तपुण्यदा ।।


🙏🏻 अश्विन  महिने के कृष्णपक्ष की षष्ठी के दिन मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र और व्यतिपात हो तो वह अनंत पुण्य देने वाला कपिला षष्टी योग कहा जाता है। यह योग बहुत दुर्लभ है।

🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार सती ने अश्विन  मास में नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी) तिथियों में भक्तिपूर्वक गुड़, भात और नमक चढाकर भगवान शिवका पूजन किया और उन्हें नमस्कार करके उसी नियम के साथ उस मास को व्यतीत किया |

🙏🏻 अश्विन  कृष्णपक्ष को पितृपक्ष महालय के नाम से जाना जाता है जिसमें पितृ ऋण से मुक्त होने तथा पितरों को तृप्त करने के उद्देश्य से श्राद्ध किया जाता है।

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
           🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏
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Daily Panchang for 18th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 18 सितम्बर 2019
⛅ दिन - बुधवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ *मास - अश्विन  *
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - चतुर्थी शाम 06:12 तक तत्पश्चात पंचमी
⛅ नक्षत्र - अश्विनी सुबह 06:45 तक तत्पश्चात भरणी
⛅ योग - व्याघात रात्रि 11:35 तक तत्पश्चात हर्षण
⛅ राहुकाल - दोपहर 12:21 से दोपहर 01:52 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:26
⛅ सूर्यास्त - 18:40 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - चतुर्थी का श्राद्ध, भरणी श्राद्ध
💥 विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 पितरों का उद्धार 🌷
🙏🏻 भगवान शिव अपने पुत्र से कहते हैं: कार्तिकेय ! संसार में विशेषतः कलियुग में वे ही मनुष्य धन्य हैं, जो सदा पितरों के उद्धार के लिये श्रीहरि का सेवन करते हैं । बेटा ! बहुत से पिण्ड देने और गया में श्राद्ध आदि करने की क्या आवश्यकता है। वे मनुष्य तो हरिभजन के ही प्रभाव से पितरों का नरक से उद्धार कर देते हैं। यदि पितरों के उद्देश्य से दूध आदि के द्वारा भगवान विष्णु को स्नान कराया जाय तो वे पितर स्वर्ग में पहुँचकर कोटि कल्पों तक देवताओं के साथ निवास करते हैं। - पद्मपुराण
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 श्राद्धकर्म 🌷
🙏🏻 अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :
🌷 "न मेऽस्ति वित्तं न धनं न चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्‌नतोऽस्मि ।
तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।"
➡ 'मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।
💥 ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 भरणी श्राद्ध 🌷
🙏🏻 18 सितम्बर 2019 भरणी नक्षत्र होने के कारण महाभरणी श्राद्ध है। भरणी नक्षत्र के देवता यमराज होने के कारण महाभरणी श्राद्ध का विशेष महत्व है। सामान्यतः आश्विन पितृपक्ष में चतुर्थी अथवा पंचमी को ही भरणी नक्षत्र आता है। कहा जाता है लोक - लोकान्तर की यात्रा जन्म, मृ्त्यु व पुन: जन्म उत्पत्ति का कारकत्व भरणी नक्षत्र के पास है अतः भरणी नक्षत्र के दिन श्राद्ध करने से पितरों को सद्गति मिलती है। महाभरणी श्राद्ध में कहीं भी श्राद्ध किया जाए, फल गयाश्राद्ध के बराबर मिलता है। यह श्राद्ध सभी कर सकते हैं।
👉🏻 भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करने से श्राद्धकर्ता को उत्तम आयु प्राप्त होती है।
💥 भरणी नक्षत्र में ब्राह्मण को काले तिल एवं गाय का दान करने से सद्गति प्राप्ति होती है व कष्ट कम होता है।

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
           🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏
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Daily Panchang for 17th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 17 सितम्बर 2019
⛅ दिन - मंगलवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद*
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - तृतीया दोपहर 04:32 तक तत्पश्चात चतुर्थी
⛅ नक्षत्र - अश्विनी पूर्ण रात्रि तक 
⛅ योग - ध्रुव रात्रि 11:23 तक तत्पश्चात व्याघात
⛅ राहुकाल - शाम 03:23 से 04:54 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:26
⛅ सूर्यास्त - 18:40 
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - तृतीया का श्राद्ध, संकष्ट चतुर्थी  (चन्द्रोदय रात्रि 08:49), अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी  (शाम 04:33 से 18 सितम्बर सूर्योदय तक), षडशीती संक्रांति  (पुण्यकाल : दोपहर 01:04 से सूर्यास्त तक)
💥 विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 षडशीति संक्रान्ती 🌷

👉 17 सितम्बर 2019 मंगलवार को षडशीति संक्रान्ती है ।

🙏 पुण्यकाल : दोपहर 01:04 से सूर्यास्त तक… जप,तप,ध्यान और सेवा का पूण्य 86000 गुना है !!!

🙏 इस दिन करोड़ काम छोड़कर अधिक से अधिक समय जप – ध्यान, प्रार्थना में लगायें।

🙏 षडशीति संक्रांति में किये गए जप ध्यान का फल ८६००० गुना होता है – (पद्म पुराण )
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 मंगलवारी चतुर्थी 🌷

➡ 17 सितम्बर 2019 को ( पुण्यकाल शाम 04:33 से 18 सितम्बर को सूर्योदय तक)

🌷 मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग

🙏🏻 मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।

👉🏻 मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना ... जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है...
           🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 मंगलवारी चतुर्थी 🌷
🙏 अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…
🌷 > बिना नमक का भोजन करें
🌷 > मंगल देव का मानसिक आह्वान करो
🌷 > चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें
💵 कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |

                 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 मंगलवार चतुर्थी 🌷
🙏🏻 इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें  और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें,शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं..
👉🏻मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :-
🌷 1) ॐ मंगलाय नमः
🌷 2) ॐ भूमि पुत्राय नमः
🌷 3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः
🌷 4) ॐ धन प्रदाय नमः
🌷 5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः
🌷 6) ॐ महा कायाय नमः
🌷 7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः
🌷 8) ॐ लोहिताय नमः
🌷 9) ॐ लोहिताक्षाय नमः
🌷 10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः
🌷 11) ॐ धरात्मजाय नमः
🌷 12) ॐ भुजाय नमः
🌷 13) ॐ भौमाय नमः
🌷 14) ॐ भुमिजाय नमः
🌷 15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः
🌷 16) ॐ अंगारकाय नमः
🌷 17) ॐ यमाय नमः
🌷 18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः
🌷 19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः
🌷 20) ॐ वृष्टि हराते नमः
🌷 21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः

🙏 ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें  ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :-
🌷 भूमि पुत्रो महा तेजा
🌷 कुमारो रक्त वस्त्रका
🌷 ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम 
🌷 ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे
🙏 हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ..


📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145*
                 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏🏻
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Daily Panchang for 16th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 16 सितम्बर 2019
⛅ दिन - सोमवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ *मास - अश्विन *
⛅ पक्ष - कृष्ण 
⛅ तिथि - द्वितीया दोपहर 02:35 तक तत्पश्चात तृतीया
⛅ नक्षत्र - रेवती 17 सितम्बर प्रातः 04:23 तक तत्पश्चात अश्विन
⛅ योग - वृद्धि रात्रि 10:55 तक तत्पश्चात ध्रुव
⛅ राहुकाल - सुबह 07:48 से सुबह 09:19 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:26
⛅ सूर्यास्त - 18:40 
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ *व्रत पर्व विवरण - 
💥 विशेष -  द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 जानिए पुराणों के अनुसार श्राद्ध का महत्व🌷

 🙏 कुर्मपुराण : कुर्मपुराण में कहा गया है कि 'जो प्राणी जिस किसी भी विधि से एकाग्रचित होकर श्राद्ध करता है, वह समस्त पापों से रहित होकर मुक्त हो जाता है और पुनः संसार चक्र में नहीं आता।'

 🙏 गरुड़ पुराण : इस पुराण के अनुसार 'पितृ पूजन (श्राद्धकर्म) से संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।

 🙏 मार्कण्डेय पुराण : इसके अनुसार 'श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को दीर्घायु, सन्तति, धन, विद्या सुख, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करते हैं।

 🙏 ब्रह्मपुराण : इसके अनुसार 'जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति से श्राद्ध करता है, उसके कुल में कोई भी दुःखी नहीं होता।' साथ ही ब्रह्मपुराण में वर्णन है कि 'श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक किए हुए श्राद्ध में पिण्डों पर गिरी हुई पानी की नन्हीं-नन्हीं बूंदों से पशु-पक्षियों की योनि में पड़े हुए पितरों का पोषण होता है। जिस कुल में जो बाल्यावस्था में ही मर गए हों, वे सम्मार्जन के जल से तृप्त हो जाते हैं।
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 श्राद्ध में क्या करें क्या ना करें 🌷

🌷 श्राद्ध एकान्त में ,गुप्तरुप से करना चाहिये, पिण्डदान पर दुष्ट मनुष्यों की दृष्टि पडने पर वह पितरों को नहीं पहुचँता, दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिये, जंगल, पर्वत, पुण्यतीर्थ और देवमंदिर ये दूसरे की भूमि में नही आते, इन पर किसी का स्वामित्व नहीं होता, श्राद्ध में पितरों  की तृप्ति ब्राह्मणों  के द्वारा ही होती है, श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को निमन्त्रित करना आवश्यक है, जो बिना ब्राह्मण के श्राद्ध करता है, उसके घर पितर भोजन नहीं करते तथा श्राप देकर लौट जाते हैं, ब्राह्मणहीन श्राद्ध करने से मनुष्य महापापी होता है | (पद्मपुराण, कूर्मपुराण, स्कन्दपुराण )

🌷 श्राद्ध के द्वारा प्रसन्न हुये पितृगण मनुष्यों को पुत्र, धन, आयु, आरोग्य, लौकिक सुख, मोक्ष आदि प्रदान करते हैं , श्राद्ध के योग्य समय हो या न हो, तीर्थ में पहुचते ही मनुष्य को सर्वदा स्नान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये,
शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष और पूर्वाह्न की अपेक्षा अपराह्ण श्राद्ध के लिये श्रेष्ठ माना जाता है | (पद्मपुराण, मनुस्मृति)


🌷 सायंकाल में  श्राद्ध नहीं करना चाहिये, सायंकाल का समय राक्षसी बेला नाम से प्रसिद्ध है, चतुर्दशी को श्राद्ध करने से कुप्रजा (निन्दित सन्तान) पैदा होती है, परन्तु जिसके पितर युद्ध में शस्त्र से मारे गये हो, वे चतुर्दशी को श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं, जो चतुर्दशी को श्राद्ध करने वाला स्वयं भी युद्ध का भागी होता है | (स्कन्दपुराण, कूर्मपुराण, महाभारत)

🌷 रात्रि में  श्राद्ध नहीं  करना चाहिये, उसे राक्षसी कहा गया है, दोनो संध्याओं में भी श्राद्ध नहीं करना चाहिये, दिन के आठवें भाग (महूर्त) में जब सूर्य का ताप घटने लगता है उस समय का नाम 'कुतप' है, उसमें  पितरों  के लिये दिया हुआ दान अक्षय होता है, कुतप, खड्गपात्र, कम्बल, चाँदी , कुश, तिल, गौ और दौहित्र ये आठो कुतप नाम से प्रसिद्ध है, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त पवित्र हैं, दौहित्र, कुतपकाल, तथा तिल, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त प्रशंसनीय हैं, बाहर और भीतर की शुद्धि, क्रोध न करना तथा जल्दबाजी न करना (मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण)

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145
             🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏
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Daily Panchang for 13th September 2019

🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

⛅ दिनांक 13 सितम्बर 2019
⛅ दिन - शुक्रवार 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 *
⛅ शक संवत -1941
⛅ अयन - दक्षिणायन
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - भाद्रपद
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - चतुर्दशी सुबह 07:36 तक तत्पश्चात पूर्णिमा
⛅ नक्षत्र - शतभिषा रात्रि 08:00 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद
⛅ योग - धृति 08:32 तक तत्पश्चात शूल
⛅ राहुकाल - सुबह 10:51 से दोपहर 12:23 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:26
⛅ सूर्यास्त - 18:42 
⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - व्रत पूर्णिमा, प्रोष्ठीपदी पूर्णिमा, महालय श्राद्धारम्भ, पूर्णिमा का श्राद्ध
               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 कालसर्प दोष 🌷
🙏🏻 हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध पक्ष कहलाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ 13 सितंबर, शुक्रवार से हो रहा है, जिसका समापन 28 सितम्बर, शनिवार को होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष हो, वे अगर श्राद्ध पक्ष में इस दोष के निवारण के लिए उपाय व पूजन करें तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है तथा कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

🙏🏻 ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष मुख्य रूप से 12 प्रकार का होता है, इसका निर्धारण जन्म कुंडली देखकर ही किया जा सकता है। प्रत्येक कालसर्प दोष के निवारण के लिए अलग-अलग उपाय हैं। यदि आप जानते हैं कि आपकी कुंडली में कौन सा कालसर्प दोष है तो उसके अनुसार आप श्राद्ध पक्ष में कभी भी ये उपाय कर सकते हैं। कालसर्प दोष के प्रकार व उनके निवारण के लिए उपाय इस प्रकार हैं-

🐍  अनन्त कालसर्प दोष
👉🏻 - अनन्त कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष में एकमुखी, आठमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
➡ - यदि इस दोष के कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो श्राद्ध के दौरान रांगे (एक धातु) से बना सिक्का पानी में प्रवाहित करें।

 🐍 कुलिक कालसर्प दोष
👉🏻 - कुलिक नामक कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष में दो रंग वाला कंबल अथवा गर्म वस्त्र दान करें।
➡ - चांदी की ठोस गोली बनवाकर उसकी पूजा करें और उसे अपने पास रखें।

🐍 वासुकि कालसर्प दोष
👉🏻 - वासुकि कालसर्प दोष होने पर रात को सोते समय सिरहाने पर थोड़ा बाजरा रखें और सुबह उठकर उसे पक्षियों को खिला दें।
➡ - श्राद्ध के दौरान किसी भी दिन लाल धागे में तीन, आठ या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

🐍 शंखपाल कालसर्प दोष
👉🏻 - शंखपाल कालसर्प दोष के निवारण के लिए श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी दिन 400 ग्राम साबुत  बादाम बहते पानी में प्रवाहित करें।
➡ - शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें।

🐍  पद्म कालसर्प दोष
👉🏻 - पद्म कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष के किसी भी दिन से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सरस्वती चालीसा का पाठ करें।
➡ - जरूरतमंदों को पीले वस्त्र का दान करें और तुलसी का पौधा लगाएं।

🐍 महापद्म कालसर्प दोष
👉🏻 - महापद्म कालसर्प दोष के निदान के लिए हनुमान मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करें।
➡ - श्राद्ध के दौरान गरीब, असहायों को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें।

🐍  तक्षक कालसर्प दोष
👉🏻 - तक्षक कालसर्प योग के निवारण के लिए 11 नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें।
➡ - सफेद वस्त्र और चावल का दान करें।

 🐍 कर्कोटक कालसर्प दोष
👉🏻 - कर्कोटक कालसर्प योग होने पर बटुकभैरव के मंदिर में जाकर दही-गुड़ का भोग लगाएं और पूजा करें।
➡ - शीशे के आठ टुकड़े पानी में प्रवाहित करें।

🐍 शंखचूड़ कालसर्प दोष
👉🏻 - शंखचूड़ नामक कालसर्प दोष की शांति के लिए श्राद्ध के किसी भी दिन रात को सोने से पहले सिरहाने के पास जौ रखें और उसे अगले दिन पक्षियों को खिला दें।
➡ - पांचमुखी, आठमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

 🐍 घातक कालसर्प दोष
👉🏻 - घातक कालसर्प के निवारण के लिए पीतल के बर्तन में गंगाजल भरकर अपने पूजा स्थल पर रखें।
➡ - चारमुखी, आठमुखी और नौमुखी रुद्राक्ष हरे रंग के धागे में धारण करें।

🐍 विषधर कालसर्प दोष
👉🏻 - विषधर कालसर्प के निदान के लिए परिवार के सदस्यों की संख्या के बराबर नारियल लेकर एक-एक नारियल पर उनका हाथ लगवाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें।
➡ - भगवान शिव के मंदिर में जाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।

 🐍 शेषनाग कालसर्प दोष
👉🏻 - शेषनाग कालसर्प दोष होने पर अंतिम श्राद्ध की पूर्व रात्रि को लाल कपड़े में सौंफ बांधकर सिरहाने रखें और उसे अगले दिन सुबह खा लें।
➡ - श्राद्ध पक्ष में किसी भी दिन गरीबों को दूध व अन्य सफेद वस्तुओं का दान करें।

📖 आचार्य अरुणा दाधीच जन्मपत्री विशेषज्ञ जयपुर 9983974145*
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