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Astrology and You

Astrology is not merely acknowledged as prophecy anymore but an esoteric language of ancient science. Purely mathematical calculations of celestial positions and their influence on our world that can help us to expand our vision and senses to better connect with the supreme cosmic energies that dwell in this vast multi-verse.This profound education has been a part of Indian heritage since forever. It was being utilized in identifying directions in several phases of life great personalities, and is still been nurtured by many aficionados who are pursuing it as a profession and educating others about the same.

About

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We at Astrolok, pledge to teach diligent aspirers about the depths of studying celestial positions and energies that once was a very popular academic part in many civilizations. Hence, in lead up to this, we stepped in the educational process with our own institute, where we can impart this incredible knowledge of self-discovery with our students who ultimately can help many others in rising above their problems and lead a life of contentment through effective techniques.

Astrolok is been serving as a multi-purpose platform for budding astrologers, wherein its not just the education we impart with them but also provide them with a room for being a part of our expert clan. This will help them to give a kick-start to their career as an astrologer.

Daily Horoscope

Get forecasts of daily horoscope according to your birth astrological signs governed by their respective ruling planets.

Taurus (Vrushabh)

आज के दिन दैनिक कार्यो के अलावा धार्मिक कार्यो के लिये भी समय निकालेंगे परोपकार की भावना दिखावे की रहेगी दान पुण्य मतलब के लिये ही करेंगे। व्यवहारिक जगत के लिये आज आप नकारा ही सिद्ध होंगे। अपना कार्य साधने के लिये मीठे बनेंगे परन्तु किसी और का कार्य करने में क्रोध आएगा। कार्य-व्यवसाय से आज लाभ की उम्मीद अधिक रहेगी धन लाभ होगा भी आशाजनक लेकिन असमय होने उत्साहित नही करेगा। नौकरी वाले लोग जदबाजी में कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे जिसके उजागर होने पर आलोचना होगी। पारिवारिक वातावरण गरिमामय रहेगा लेकिन परिजनों मन ही मन कुछ ना कुछ उधेड़ बुन में रहेंगे। घरेलू कार्यो की टालमटोल से बचे कलह हो सकती है। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी।

Gemini (Mithun)

आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही शारीरिक शिथिलता सभी कार्यो में बाधा डालेगी फिर भी जबरदस्ती करना बाद में महंगा पड़ेगा। शारीरिक रूप से आज कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा। घर अथवा व्यावसायिक कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे लेकिन फिर भी मनोरंजन की योजना बनायेगें। कार्य व्यवसाय से लाभ निश्चित होगा लेकिन किसी के सहयोग से ही। महिलाये भी आरोग्य में कमी रहने के कारण धीमी गति से कार्य करेंगी घर का वातावरण अस्त-व्यस्त रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन आशाजनक नही रहेगा फिर भी कर्म की तुलना में अधिक ही होगा। परिवार के सदस्य झुंझलाहट में बेवजह ही एक दूसरे से उलझेंगे। यात्रा टालें।

Cancer (Karka)

आज का दिन पिछले दिन की तुलना में बेहतर रहेगा लेकिन फिर भी आज दिमाग से सभी प्रकार के डर को दूर करके ही लाभ पाया जा सकता है। दिन के आरंभ से मानसिक रूप से हल्कापन अनुभव करेंगे मन मे विचित्र ख्याल चलते रहेंगे। व्यवसायी वर्ग आज जल्दी ही अपने कामो में जुट जाएंगे इसके विपरीत नौकरी वाले लोग पहले विलम्ब करेंगे बाद में कार्य खत्म करने की जल्दी रहेगी। काम-धंधा मध्यान बाद से गति पकड़ेगा आज कोई बड़ा निर्णय ना ही ले तो बेहतर रहेगा। बचकानी हरकतों से आस-पास का माहौल हास्यप्रद बनाएंगे परिवार में धन अथवा अन्य कारण चिता का विषय रहेंगे। संध्या बाद यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। सेहत में सुधार अनुभव होगा।

Leo (Sinh)

आज का दिन वृद्धिकारक रहेगा। जिस कार्य से कोई आशा नही रहेगी वहां से भी कुछ ना कुछ लाभ ही होगा। अकस्मात लघु यात्रा आने से दैनिक कार्यो में फेरबदल करना पड़ेगा। आलस्य से आज बचें एक बार किसी कार्य मे विलम्ब हुआ तो रात्रि तक यही क्रम जारी रहेगा। मध्यान बाद व्यस्तता बढ़ेगी व्यवसाय में अकस्मात उछाल आएगा लेकिन इसके अनुरूप आपकी तैयारी नही होने पर खासी मशक्कत करनी पडेगी फिर भी धन की आमद एक से अधिक मार्ग से होगी आर्थिक दृष्टिकोण से भविष्य के प्रति आज निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर मे किसी ना किसी से कलह होकर ही रहेगी। स्वास्थ्य मानसिक दुविधा के कारण सर दर्द अथवा अन्य छोटी मोटी परेशानी आ सकती है।

Virgo (Kanya)

आज आप स्वभाव से विवेक का परिचय देंगे इसके विपरीत घर का वातावरण बेवजह के झमेलों में डालेगा जिस कारण बाहर समय बिताना अच्छा लगेगा। दैनिक कार्य आज व्यवस्थित रहेंगे अधिक से अधिक धन कमाने की मानसिकता चैन से बैठने नही देगी। कार्य क्षेत्र पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहेंगे फिर भी इसका लाभ आशाजनक नही मिलेगा। आज आप अनैतिक कार्यो से स्वयं ही दूरी बनाकर रहेंगे फिर भी प्रलोभन से स्वयं को बचाना बड़ी चुनौती रहेगी। धन की आमद अन्य दिनों की अपेक्षा सुधरेगी लेकिन घर मे फरमाइशें की सूची भी लंबी रहने के कारण तुरंत निकल जायेगा। सामाजिक कार्यो के प्रति उदासीनता व्यवहारिक जगत से दूरी बढ़ाएगी। स्वयं अथवा परिजन के स्वास्थ्य के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।

Libra (Tula)

आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। घर एवं बाहर की परिस्थितियां पल पल पर क्रोध दिलाएंगी इसलिये आज आपको अधिक से अधिक मौन रहने की सलाह है। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मी अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से तालमेल बिगड़ेगा आपको उनका एवं उनको आपका व्यवहार उद्दंड लगेगा जिससे कलह बढ़ेगी। गलती करने पर मान लें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से भी दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा जिस लाभ के आप अधिकारी है उसे कोई अन्य ले जाएगा अथवा बहुत कम होने पर निराश होंगे। व्यवसायी वर्ग तगादा करते समय विनम्र रहें अन्यथा गरमा गर्मी में धन डूब सकता है। मन आज वर्जित और असंवैधानिक कार्यो में शीघ्र आकर्षित होगा। महिलाए घर का वातावरण जितना सुधारने का प्रयास करेंगी उतना अधिक बिगड़ेगा। सेहत में नई समस्या बनेगी।

Scorpio (Vrushchik)

आज का दिन सामाजिक एवं राजकीय कार्य के लिये अनुकूल है धन के साथ पद प्रतिष्ठा का भी लाभ मिलेगा। समाज के उच्चवर्गीय लोगो से जान पहचान होगी परन्तु इनसे तुरंत लाभ उठाने का प्रयास ना करें अन्यथा संबंधों में तुरंत खटास भी आ सकती है। सार्वजिक क्षेत्र पर आवश्यकता पड़ने पर ही बोले जल्दबाजी में कुछ अप्रिय बयानबाजी कर देंगे जिससे व्यक्तित्व में कमी आ सकती है। व्यवसायी वर्ग धन कमाने के चक्कर मे जल्दबाजी करेंगे परन्तु ध्यान रहे प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी आज धैर्य रखने का परिणाम बाद में अवश्य ही लाभ दिलाएगा। धन की आमद संतोषजनक रहेगी खर्च करने में पीछे नही हटेंगे। घर का वातावरण गलतफहमी के कारण कुछ समय के लिये अशान्त बनेगा। जोड़ो अथवा मासपेशी संबंधित समस्या बन सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।

Sagittarius (Dhanu)

आज के दिन परिस्थितियां विपरीत बनेगी पूर्व में बनाई योजना परिस्थिति वश अंत समय मे बदलनी पड़ेगी। जिस कार्य ने लाभ देख रहे थे वहां से लाभ तो होगा लेकिन आशा से बहुत कम। व्यवसायी वर्ग धन अथवा महंगी वस्तुओ संबंधित कार्य विचार कर ही करें हानि की संभावना आज अधिक है। धन के फंसने पर आगे के कार्य प्रभावित होंगे। नौकरी वाले जातक विषम परिस्थितियों में भी निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर के वातावरण में कुछ ना कुछ उथल-पुथल लगी रहेगी। धन की आमद प्रयास करने पर हो जाएगी लेकिन आवश्यकता की तुलना में कम रहेगी। महिला वर्ग भावुक कर खर्चा करवाएगी कर्ज बढ़ने के आसार है खर्च आज सोच समझ कर ही करे। सेहत में नया विकार आएगा।

Capricorn (Makar)

आज का दिन यादगार रहेगा। कई दिनों से मन में चल रही कामना की पूर्ति आज होने से अकस्मात खुशी मिलेगी। कार्य व्यवसाय में भी उन्नति के योग है जिस किसी कार्य को करेंगे उसमें स्वयं के बल पर ही सफलता पा लेंगे भागीदारी के कार्यो में बड़े निर्णय लेने से आज बचें अन्यथा तालमेल की कमी के कारण आपस मे फुट पड़ सकती है। महिलाए भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें वरना घर का सुरम्य वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण लंबे समय के लिये अशान्त बनेगा। धन की आमद सही समय पर होगी फिर भी आज संतोष की कमी रहने पर कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। व्यवहारिक संबंधों को छोड़ अन्य सभी कार्य में विजय मिलेगी। सेहत उत्तम रहेगी।

Aquarius (Kumbha)

आज का दिन धैर्य से बिताने में ही भलाई है। मेहनत करने पर तुरंत लाभ की आशा ना रखें आज किया परिश्रम का फल संध्या बाद से दिखने लगेगा लेकिन प्राप्ति में अड़चनें आएंगी आज की तुलना में कल दिन ज्यादा बेहतर रहेगा। आज केवल आश्वासनो से ही काम चलाना पड़ेगा। मध्यान तक का समय कार्य व्यवसाय के लिये उतार चढ़ाव वाला रहेगा इसके बाद परिस्थिति से समझौता कर लेंगे स्वभाव में संतोष बनेगा। धन अथवा अन्य किसी भी प्रकार के वादे ना करें पूरे नही कर पाएंगे उलटे आलोचना ही होगी। घर का कोई सदस्य जिद पर अड़ेगा जिससे कुछ समय के लिये शांति भंग होगी। महिलाए अपने कार्य छोड़ अन्य के कार्य मे मीन मेख निकालेंगी यह झगड़े का कारण बनेगा। बदन दर्द स्नायु तंत्र में दुर्बलता रहेगी।

Pisces (Meen)

आज का दिन कार्य सिद्धि वाला रहेगा जिस भी कार्य को करेंगे उसमे परिस्थितियां स्वतः ही अनुकूल बनने लगेंगी आवश्यकता के समय सहयोग भी आसानी से मिल जाएगा। अधिकांश कार्य सही दिशा और भाग्य का साथ मिलने से समय पर पूर्ण होंगे। कारोबारी लोग आज किया निवेश का लाभ निकट भविष्य में उठाएंगे फिर भी ज्यादा जोखिम ना लें। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त कार्य आने पर असहज अनुभव करेंगे सहयोग भी कम मिलेगा फिर भी अपने पराक्रम से थोडे विलम्ब से विजय पा लेंगे। धन की आमद दोपहर बाद निश्चित होगी अतिरिक्त खर्च भी होंगे। गृहस्थ का माहौल पल-पल में बदलने से तालमेल बैठाने में परेशानी होगी। परिजनों के लिये समय निकालें अन्यथा मतभेद हो सकते है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

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सायन पद्धति से 21 जून को सूर्य दक्षिणायन होगा, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्षा के योग

vastu
                                                         *सायन पद्धति से 21 जून को सूर्य दक्षिणायन होगा*

सायन पद्धति के अनुसार सूर्य 21 जून को दक्षिणायन हो जाएगा जो 22 दिसम्बर तक रहेगा। जबकि निरयण पद्धति से यह समय 15 जुलाई से लेकर 14 जनवरी के बीच होता है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। इसे ही उत्तरायण व दक्षिणायन कहते है। जब सूर्य मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है तब इस समय को उत्तरायण कहते है। और जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तो इसे दक्षिणायन कहते है।

कर्क संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ने के बाद क्रमशः दक्षिण की और खिसकते हुए मकर संक्रांति के दिन मकर रेखा पर सीधी पड़ती है। सूर्य की सीधी किरणों के पड़ने के खिसकाव में छह माह लग जाते है। यह समय 21 जून से लेकर 22 दिसम्बर तक होता है। जबकि निरयण पद्धति में यह समय 15 जुलाई से 14 जनवरी के बीच होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायन का काल देवताओ की रात्रि है।
दक्षिणायन के समय रातें लंबी हो जाती है और दिन छोटे होने लगते है। दक्षिणायन में सूर्य दक्षिण की और झुकाव के साथ गति करता है। दक्षिणायन के दौरान वर्षा, शरद ऋतु, और हेमंत यह तीन ऋतुएं होती है। तथा आकाश बदलो से घिरा रहता है।

 दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते है। सूर्य दक्षिणायन होने से इस बार वर्षा अधिक होगी। वायु में आद्रता बनी रहेगी। उमस का वातावरण रहेगा।

                                                           *ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्षा के योग*

वर्षा ऋतु का प्रारंभ 21 जून से सूर्य के दक्षिणायन होते ही हो जाएगा जो 23 अगस्त तक रहेगा। उसके पश्चात शरद ऋतु का प्रारंभ होगा।
जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में आता है तो वर्षा प्रारम्भ होती है । यह नक्षत्र 22 जून को आएगा। वर्षा आने के आठ नक्षत्र माने गए है। आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र।
जब सूर्य इन नक्षत्र से भ्रमण करता है तो बारिश आती है।

इस वर्ष ज्योतिष के अनुसार संवत्सर के राजा शनि व मंत्री सूर्य देवता है और संवत्सर का नाम परिधावी है। इसलिए इस बार अच्छी वर्षा के योग बने हुए  है। और आंधी तूफान के भी योग है। 

वर्षा आने के दिन इस प्रकार रहेंगे, जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में 22/23 जून, पुनर्वसु नक्षत्र में 6/7 जुलाई को, पुष्य नक्षत्र 20/21 जुलाई को व अश्लेषा नक्षत्र 3,4 अगस्त को भारी वर्षा के योग बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
Mob. No. 9302325222
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*15 जून को सूर्य का मिथुन राशि मे प्रवेश*

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*15 जून को सूर्य का मिथुन राशि मे प्रवेश* 
*कई दुर्लभ योग व चतुर्ग्रही योग बनेगे*

15 जून शनिवार शाम 5:38 बजे सूर्य देव वृषभ राशि से अपनी मित्र राशि मिथुन मे प्रवेश करेंगे जिससे मिथुन राशि मे चतुर्ग्रही योग व कई दुर्लभ योग बनेगें। मिथुन राशि मे मंगल, राहु व बुध के पूर्व में होने से त्रिग्रही योग बना हुआ है। सूर्य के प्रवेश से चतुर्ग्रही योग बनेगा जो की 21 जून तक यह योग बना रहेगा। 

21जून सुबह 2:29 बजे बुध अपनी स्वराशि मिथुन छोड़कर चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश करेगा। इसके पश्चात मिथुन राशि मे त्रिग्रही योग बना रहेगा। जो 22 जून रात्रि 11: 21 बजे मंगल के कर्क राशि मे प्रवेश से समाप्त होगा।

    सूर्य के इस गोचर के साथ ही 15 जून  से कई दुर्लभ योग बनेगें।

*बुधादित्य योग*  सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के साथ ही मिथुन राशि में 'बुधादित्य योग' का निर्माण होगा। 'बुधादित्य योग' एक राजयोग है, जो जातक को जीवन में प्रचुर लाभ व समृद्धि प्रदान करता है।  सूर्य व बुध की युति को 'बुधादित्य' नामक राजयोग के नाम से जाना जाता है।
*गजकेसरी योग*  चंद्र वृश्चिक राशि में रहेंगे। चंद्र किसी भी राशि में मात्र सवा दो दिन तक ही स्थित रहते हैं। नवग्रहों में एकमात्र चंद्र ही ऐसे ग्रह हैं, जो सबसे कम दिन किसी राशि में रहते हैं। देवगुरु बृहस्पति पहले से ही वक्र गति होकर वृश्चिक राशि में विराजमान हैं। चंद्र की गोचरवश इस उपस्थिति से वृश्चिक राशि में  'गजकेसरी' नामक राजयोग का सृजन होगा। 'गजकेसरी' योग भी सुप्रसिद्ध राजयोग है, जो जातक को जीवन आशातीत सफलता एवं उन्नति प्रदान करता है।

*ग्रहण योग*  सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के साथ ही मिथुन राशि में 'ग्रहण योग' का भी निर्माण होने जा रहा है। मिथुन राशि में राहु पूर्व से ही स्थित हैं। सूर्य के गोचर से मिथुन राशि में सूर्य-राहु की युति का निर्माण होगा जिसे 'ग्रहण योग' के नाम से जाना जाता है। 'ग्रहण योग' एक अशुभ योग है, जो जातक को जीवन असफलता व संघर्ष देता है।
*अंगारक योग* राहु व मंगल की युति पूर्व से ही मिथुन राशि मे बनी हुई है। जिससे 'अंगारक' योग बना हुआ है। 'अंगारक योग' एक अत्यंत अशुभ व अनिष्टकारी योग है जिसके कारण जातक को अपने जीवन में संकटों व असफलताओं का सामना करना पड़ता है। मंगल के 22 जून को कर्क राशि मे प्रवेश से यह योग समाप्त हो जायेगा।

*किन किन राशियो पर पड़ेगा सर्वाधिक प्रभाव*

 इन दुर्लभ संयोगों से सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे किंतु सर्वाधिक प्रभावित मिथुन राशि वाले जातक होंगे, क्योंकि इनमें से अधिकतर योग मिथुन राशि में ही बन रहे हैं।
शुभ प्रभाव वाली राशियां- वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, मीन होंगी।
अशुभ प्रभाव वाली राशियां- मेष, मिथुन, सिंह, धनु, कुंभ 

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
9302325222
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*निर्जला एकादशी रवि योग में मनेगी*

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                                                               *निर्जला एकादशी रवि योग में मनेगी*


गुरुवार 13 जून जयेष्ठ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि चित्रा नक्षत्र रवियोग में मनेगी। एकादशी तिथि 12 जून शाम 6:26 बजे से प्रारंभ होकर 13 जून शाम 4:49 बजे तक रहेगी।

निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते है। ऋषि वेदव्यास जी के अनुसार इस एकादशी को भीमसेन ने धारण किया था, इसी वजह से इस एकादशी का नाम भीमसेनी एकादशी पड़ा। 

इस एकादशी को व्रत करने से वर्ष की 24 एकादशियो के व्रत के समान फल मिलता है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से बाकी इस वर्ष की सभी 23 एकादशियो का पुण्य लाभ मिलता है तथा व्यक्ति को दीर्घायु व मोक्ष की प्राप्ति होती है। निर्जला अर्थात जल को बिना ग्रहण कर व्रत करना कहा जाता है। यह एक कठिन व्रत है जिसमे जल का सेवन नही किया जाता।

       इस व्रत में सबसे पहले ब्रह्मा बेल में उठकर गंगा स्नान या किसी भी नदी में स्नान करना चाहिए। उसके पश्चात भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है, तथा व्रत कथा को सुना जाता है।
108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप किया जाता है। पूजा पाठ के पश्चात सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को दक्षिणा मिष्ठान देना चाहिए। इस दिन गौ दान करने का विशेष महत्व है। जिससे करोड़ो गायों को दान करने के समान फल मिलता है। इस दिन खाली मटका, हाथ का पंखा व खरबूजों का दान किया जाता है। जिससे पूरे वर्ष की 23 एकादशियो का पुण्य फल इसी एक निर्जला एकादशी के व्रत व दान से मिलता है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
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जाने ज्योतिष के अनुसार जातक को होने वाले रोग - भाग २ !!

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                                                   ज्योतिष के अनुसार जातक को होने वाले रोग 

नेत्र रोग

नेत्र रोग सम्बंधित विचार सूर्य, चन्द्रमा , मंगल , शनि और द्वितीय तथा द्वादश भाव से किया जाता है | द्वादश भाव बांयें नेत्र का और द्वितीय भाव से दाहिने नेत्र का कारक होता है | इसी प्रकार सूर्य दाहिने नेत्र का और चन्द्रमा बांयें नेत्र का कारक होता है |

सूर्य और चण्द्रमा के लिए वृषभ राशि का छठा अंश से दशम अंश तक अंध-अंश कहलाता है| अर्थात सूर्य या चन्द्रमा यदि जन्म के समय में इन अंशों में से किसी अंश में हो तो इस तरह का चन्द्रमा अंध-अंश-गत कहा जाता है | इसी प्रकार मिथुन राशि का ९ अंश से १५ अंश तक अंध अंश कहलाता | कर्क और सिंह राशि में १८वें , २७वें और २८वें अंश को अंध-अंश कहा जाता है | वृश्चिक राशि का पहला , १०वां, २७वां, और २८वां अंश , मकर राशि में २६ अंश से २९ अंश तक और कुम्भ राशि का ८वां, १०वां , १८वां एवं १९वां अंश को अंध अंश कहते हैं |


क्षीण  चन्द्रमा (कृष्ण पक्ष दशमी तिथि  से शुक्ल  पक्ष पंचमी तिथि तक ) वृषभ राशि के २१वां,२२वां और २९वां अंश को भी अंध-अंश कहते हैं| तथा कर्क राशि का १९वां और २०वां अंश , सिंह राशि का १०वां अंश से १६वां अंश तक , कन्या का १९वां अंश से २१वां अंश तक , धनु राशि का २०वां अंश से २३वां अंश तक और मकर राशि का १ला ,२रा , ४था एवं ५वां अंश क्षीण चन्द्रमा के लिए अंधान्श कहलाता है|

     जब सूर्य अथवा चण्द्रमा जन्म के समय अंध अंश में रहता है तो जातक के नेत्र रोग की सूचना होती है |

१. यदि जातक का जन्म दिन में हुआ हो और सूर्य अंधान्श में चतुर्थ भाव के भुक्तांश से लेकर दशम स्थान के भोग्यांश में हो तथा पाप ग्रह से दृष्ट हो तो दाहिने नेत्र से जातक काना होता है |

२. चतुर्थ भाव के भुक्तांश से लेकर दशम स्थान के के भोग्यांश तक यदि क्षीण चन्द्रमा या दग्धा चन्द्रमा (सूर्य और चन्द्रमा जब एक अंश में आता है तब चन्द्रमा दग्ध कहलाता है ) अंध-अंश गत हो तो बांया नेत्र नष्ट हो जाता है |

३. यदि चतुर्थ भाव के भोग्यांश से दशम भाव के भुक्तांश पर्यन्त अर्थात दशवें से चतुर्थ भाव तक यदि अंधान्श गत चन्द्रमा हो और दिन का जन्म हो तो बाएं नेत्र में केवल कोई दोष  होता है |

४. परन्तु अगर उपरोक्त ३रे योग में यदि रात्रि का जन्म हो तो दाहिने नेत्र में कोई रोग होता है |

५. यदि सूर्य अंधान्श गत हो तथा चतुर्थ भाव के भुक्तांश से दशम भाव के भोग्यांश पर्यन्त हो तो दाहिना नेत्र नष्ट होता है |

६. चतुर्थ भाव के भोग्यांश और दशम भाव के भुक्तांश के अंर्तगत (दशम भाव से चतुर्थ भाव ) यदि अंधान्श का सूर्य हो और दिन का जन्म हो तो दाहिने नेत्र में कोई दोष होता है |

७. यदि उपरोक्त योग में रात्रि का जन्म  हो तो बांये नेत्र में रोग होता है |

८. यदि छठे स्थान में चन्द्रमा शुभ ग्रह दृष्ट या युत न हो अथवा षष्ठेश शुक्र लग्न में बैठा हो  और कोई शुभ ग्रह वक्री होकर छठे आठवें अथवा द्वादश भाव में बैठा हो तो जातक को नेत्र रोग होता है |

९. यदि दिन का जन्म  हो , सूर्य धनु से प्रथम अंश में हो और शनि से दृष्ट हो तो अंध योग होता है |

१० . क्षीण चन्द्रमा धनु राशि गत  हो और शनि से दृष्ट हो पर बृहस्पति अथवा शुक्र से दृष्ट न हो तो अंध योग होता है |

११. सूर्य से दूसरे स्थान में चन्द्रमा यदि क्रूर ग्रह के साथ हो  तो अंध योग होता है |

१२. दशम स्थान में चन्द्रमा पापदृष्ट हो पर शुभ-दृष्ट न हो तो अँधा होता है |

१३. चन्द्रमा छठे अथवा बारहवें स्थान में नीच राशि गत हो और पाप दृष्ट हो तो अंध-योग होता है |

१४. मंगल यदि सूर्य से अस्त होकर लग्न में बैठा हो तो अंध-योग होता है |

१५. यदि चतुर्थ और पंचम स्थान में पापग्रह हो तथा चन्द्रमा छठे , आठवें अथवा बारहवें स्थान में हो तो जातक अँधा होता है |

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हस्त नक्षत्र में मानेगा गंगा दशहरा, दस योग के साथ अद्भुत सयोंग

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                               गंगा दशेहरा और उसमे होने वाले अद्भुत संयोग 

गंगा दशहरा 12 जून ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र, रवियोग, सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा।
दशमी तिथि दिनांक 11 जून को रात्रि 8 :19 बजे से प्रारंभ होकर 12 जून शाम 6 : 26 बजे तक रहेगी।

गंगा दशहरा पर एक साथ दस योग पड़ रहे है। सोमवती अमावस पर 6 योग बने, और दशमी पर रवियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, हस्त नक्षत्र, वरियान योग, गर करन, आनंद योग व सूर्य वृषभ राशि मे तथा चंद्र कन्या राशि मे इसी के साथ अगले दिन निर्जला एकादशी पर्व मनाया जाएगा।

वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास, शुक्लपक्ष, दशमी तिथि, बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से धरती पर गंगा का अवतरण हुआ था। भगीरथ की तपस्या के पश्चात गंगा माता के धरती पर  अवतरण को ही गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है।
इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर दस डुबकी लगाने से दस प्रकार के पापो का नाश होता है।
इन दस पापो में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक, और तीन पाप मानसिक होते है। इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।
गंगा स्नान के पश्चात व्यक्ति को पूजन कर दस प्रकार की वस्तुओं का दान करना चाहिए। जिसमें जौ और तिल सोलह मुठी होना चाहिये। उसके पश्चात दस ब्रह्मिनो को दक्षिणा देनी चाहिए। जो व्यक्ति गंगा में स्नान के लिए नही जा सकते वे किसी भी नदी में स्नान कर पूजा कर सकते है अन्यथा  घर मे पानी मे गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा
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जाने ज्योतिष के अनुसार जातक को होने वाले रोग - भाग १

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                                                         ज्योतिष के अनुसार जातक को होने वाले रोग 

ज्योतिष के माध्यम से जातक को होने वाले रोग अर्थात शारीरिक कष्ट की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है | ज्योतिषीय गणना से जातक के विद्यमान रोग के अलावा जातक को भविष्य में होने वाली बिमारियों के बारे में सचेत करने में आसानी होती है | बशर्ते की आज के युग में चिकित्सा विज्ञानं बहुत उन्नति कर गया है लेकिन वर्तमान चिकित्सा विज्ञानं से किसी भी इंसान की मौजूदा बिमारियों का पता लगाया जा सकता है , वहीँ ज्योतिषीय गणना से भविष्य का भी

हर इंसान की चाहत होती है की वह स्वस्थ रहे | बीमार होने के बाद बिमारियों के ऊपर होने वाले खर्च काफी अधिक होते हैं तथा शारीरिक कष्ट भी , अर्थात ज्योतिषीय सलाह से इंसान अपनी होने वाली बिमारियों से सचेत रहकर काफी हद तक उनसे बच सकता है | ज्योतिषीय उपायों द्वारा विद्यमान अथवा भविष्य में होने वाली बिमारियों से निजात भी पाया जा सकता है |

ग्रह गण और राशियों के द्वारा कफ, पित्तादि दोष किस प्रकार उत्पन्न होते हैं और उन दोषों से रोगों का अनुमान किस प्रकार किया जा सकता है ,अग्रलिखित  हैं |

मस्तिष्क रोग

१. सूर्य अथवा बृहस्पति  लग्न में  हो और मंगल अथवा शनि सप्तमस्थ हो तो जातक उन्माद रोग से पीड़ित होता है |

२. यदि शनि लग्न में और मंगल सप्तम अथवा त्रिकोण में हो तो जातक उन्माद बुद्धि होता है |

३. यदि लग्न धनु के आरम्भ में हो , सूर्य और चन्द्रमा एक साथ होकर लग्न में हो अथवा केंद्र में हो तो जातक उन्माद बुद्धि होता है |

४. यदि जन्मा लग्न मकर, कुम्भ , मीन, अथवा मेष लग्न हो , तथा रवि और चंद्र साथ होकर त्रिकोण में तथा बृहस्पति तृतीय या केंद्र में हो तो जातक उन्माद बुद्धि होता है |

५. यदि चन्द्रमा और बुद्ध केंद्र में हो अथवा सुबह नवमांश के न हों तो जातक अत्यंत भ्रमयुक्त अर्थात सभी बातों में संदेह करने वाला होता है |

६. यदि चन्द्रमा पाप ग्रह के साथ हो और राहु लग्न से पंचम , अष्टम तथा द्वादश गत हो तो जातक को इस प्रकार का उन्माद होता है जिसमे क्रोधांश अधिक  होता हैं (सनकी होता है )| ऐसा जातक हमेशा कलह-प्रिय होता है |

७. चंद्र, सूर्य और मंगल लग्न में अथवा अष्टम में अथवा पाप ग्रह से दृष्ट हो तो जातक अनेक रोगों से व्यथित होता है | विशेषतः मृगी रोग से पीड़ित होता है |

८. चन्द्रमा और बुद्ध केंद्र में हो और उसपर पाप ग्रह की दृष्टि हो  और पंचम अथवा अष्टम भाव में पाप ग्रह हो तो ऐसे योग वाला जातक मृगी रोग से पीड़ित रहता है |

९. यदि चन्द्रमा शनि के साथ हो और उसपर मंगल की दृष्टि हो तो जातक वावला होता है |

१०.  यदि बुद्ध लग्नेश वा अष्टमेश के साथ हो, अथवा चंद्र लग्नेश अथवा अश्टमेष के साथ हो तो जातक पागल होता है |

११. यदि क्षीण चन्द्रमा शनि के साथ द्वादश भाव में हो तो मूर्छा होती है |

१२. यदि बुद्ध लग्नेश के साथ होकर ६ , ८ या १२ स्थान गत हो तो जातक पागल होता है |

१३. यदि लग्न में पापग्रह हो और चन्द्रमा छठे या अष्टम स्थान में हो तो मूर्छा होती है |

१४. यदि लग्न में चन्द्रमा पापयुक्त हो और ६ या ८ में पापग्रह हो तो मुर्छ रोग होती है |

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